NIC की बैठक बनी सियासी कुश्ती का अखाड़ा
नई दिल्ली।
सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के तरीकों पर चर्चा के लिए सोमवार को दिल्ली
में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक बुलाई गई। लेकिन बीजेपी के प्रधानमंत्री
पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। बीजेपी शासित
प्रदेशों में से सिर्फ मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ही बैठक
में शिरकत की। बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दंगा भड़काने
वाले तत्वों के सियासी रसूख की परवाह किए बगैर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की
जानी चाहिए। उन्होंने दंगा फैलाने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी
चिंता जताई।
मुजफ्फरनगर में चार दर्जन से
ज्यादा लोगों की जान लेने वाले दंगों के बाद बुलाई गई राष्ट्रीय एकता
परिषद यानी एनआईसी की बैठक सियासी घमासान का अखाड़ा बन गई। सोमवार को
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में बुलाई गई इस बैठक से गुजरात के
मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी नदारद
रहे। हालांकि गुजरात के गृहराज्य मंत्री रजनीकांत पटेल ने सूबे की
नुमाइंदगी की।
कांग्रेस ने सवाल उठाया
कि क्या मोदी दंगे जैसे संजीदा मसले पर राय देने से बचना चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि मोदी के पास अमेरिका के लोगों को
संबोधित करने का समय है लेकिन एनआईसी में देश के मुद्दे पर चर्चा का नहीं।
उन्होंने अभी से खुद को बड़ा मानना शुरू कर दिया है।
सांप्रदायिक
सौहार्द के खास एजेंडे वाली इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान को छोड़कर
बीजेपी का कोई मुख्यमंत्री नहीं पहुंचा। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी
बैठक में हिस्सा नहीं लिया लेकिन लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण
जेटली ने बैठक में शिरकत की। अपने नेताओं की गैरमौजूदगी का बीजेपी के पास
कोई ठोस जवाब नहीं था।
वैसे पूरी बैठक
में मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा छाया रहा। तमाम पार्टियों ने आरोप लगाया कि
सियासी दिलचस्पियों के चलते इन दंगों को हवा दी गई। आरोप सूबे की समाजवादी
पार्टी सरकार पर लगे तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विश्व हिंदू परिषद पर
हमला बोला। अखिलेश ने कहा कि चौरासी कोसी परिक्रमा खत्म हो चुकी थी। विश्व
हिंदू परिषद के इस आयोजन का कोई मतलब नहीं था। ये काम सांप्रदायिक सौहार्द
बिगाड़ कर राजनीतिक फायदा उठाने के लिए किया जा रहा था।
बैठक
की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दंगा भड़काने वालों के
खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही। बैठक में दंगों के दौरान सोशल मीडिया के
बेजा इस्तेमाल को लेकर भी खासी चर्चा हुई। हालांकि सरकार ने किसी तरह की
बंदिश की बात नहीं की लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रविरोधी तत्वों
को सोशल मीडिया का इस तरह से इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

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