RTI संशोधन विधेयक पर सोमवार को हो सकती है चर्चा
नई दिल्ली : पारदर्शी कानून के तहत राजनीतिक दलों को सूचना उपलब्ध कराने से
सुरक्षा प्रदान करने के लिए लाए जा रहे आरटीआई संशोधन कानून पर कल लोकसभा
में चर्चा होने की संभावना है। सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक 2013 12
अगस्त को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने
लोकसभा में पेश किया था।
नारायणसामी कल इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए पेश करेंगे। लोकसभा की कल की कार्यसूची में इसे चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इससे पूर्व 23, 24, 26 और 29 अगस्त को आरटीआई संशोधन विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने राजनीतिक दलों को छूट प्रदान करने और इस संबंध में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के एक आदेश को निषप्रभावी बनाने के लिए आरटीआई अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। सीआईसी द्वारा छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों कांग्रेस, भाजपा, राकांपा, माकपा, भाकपा और बसपा को आरटीआई के दायरे के भीतर लाने का आदेश दिए जाने के करीब दो महीने बाद कैबिनेट का फैसला आया था।
सरकार ने अधिनियम के अनुच्छेद 2 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है जो राजनीतिक दलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए लोक प्राधिकार की व्याख्या करता है। प्रस्तावित संशोधनों को यदि संसद द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि लोक प्राधिकार की व्याख्या में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल शामिल नहीं होंगे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीआईसी ने अपने तीन जून के आदेश में कहा था कि छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को परोक्ष रूप से केंद्र सरकार से काफी धन मिलता है और उन्हें जनसंपर्क अधिकारियों की नियुक्ति करने की जरूरत है क्योंकि आरटीआई अधिनियम के तहत उनका चरित्र लोक प्राधिकार का है। इस आदेश पर राजनीतिक दलों ने खासकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि कांग्रेस को ही यह कानून लाने का श्रेय जाता है। कई आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया है।
नारायणसामी कल इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए पेश करेंगे। लोकसभा की कल की कार्यसूची में इसे चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इससे पूर्व 23, 24, 26 और 29 अगस्त को आरटीआई संशोधन विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने राजनीतिक दलों को छूट प्रदान करने और इस संबंध में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के एक आदेश को निषप्रभावी बनाने के लिए आरटीआई अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। सीआईसी द्वारा छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों कांग्रेस, भाजपा, राकांपा, माकपा, भाकपा और बसपा को आरटीआई के दायरे के भीतर लाने का आदेश दिए जाने के करीब दो महीने बाद कैबिनेट का फैसला आया था।
सरकार ने अधिनियम के अनुच्छेद 2 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है जो राजनीतिक दलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए लोक प्राधिकार की व्याख्या करता है। प्रस्तावित संशोधनों को यदि संसद द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि लोक प्राधिकार की व्याख्या में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत पंजीकृत राजनीतिक दल शामिल नहीं होंगे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीआईसी ने अपने तीन जून के आदेश में कहा था कि छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को परोक्ष रूप से केंद्र सरकार से काफी धन मिलता है और उन्हें जनसंपर्क अधिकारियों की नियुक्ति करने की जरूरत है क्योंकि आरटीआई अधिनियम के तहत उनका चरित्र लोक प्राधिकार का है। इस आदेश पर राजनीतिक दलों ने खासकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि कांग्रेस को ही यह कानून लाने का श्रेय जाता है। कई आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया है।

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