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आज राज्‍यसभा में पेश होगा लोकपाल बिल, सपा करेगी विरोध

नई दिल्‍ली(13DEC)। तमाम अटकलों के बीच केंद्र सरकार शुक्रवार को राज्‍यसभा में लोकपाल बिल पेश करने जा रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍यमंत्री वी. नारायणसामी बिल को सदन में पेश करेंगे, जबकि इससे पूर्व इस संशोधित बिल पर चर्चा की जाएगी. चर्चा के लिए 6 घंटे का समय निर्धारित किया गया है.गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के अनुसार राज्‍यसभा की चयन समिति ने विधेयक में 13 संशोधन सुझाए थे, जिसे स्‍वीकार कर लिया गया. संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने कहा कि बिल को पास कराना हमारी प्राथमिकता है. पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने भी शुक्रवार को ट्वीट कर सभी दलों से बिल का समर्थन करने की अपील की है. गौरतलब है कि लोकपाल बिल पूर्व में ही लोकसभा में पास हो चुका है, जबकि राज्‍यसभा में इसपर सहमति नहीं बन पाई थी.दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने यह कहते हुए सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं कि बिल का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं किया जाएगा. ऐसे में बिल को लेकर असमंजस की स्थित‍ि बनी हुई है, वहीं सूत्रों के अनुसार राज्‍यसभा सदस्‍य सचिन तेंदुलकर बिल पेशी के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे.

अन्‍ना ने लिखी पीएम, सोनिया व बीजेपी को चिट्ठी
उधर, रालेगण सिद्धि में जनलोकपाल बिल को लेकर अन्‍ना हजारे के अनशन का आज चौथा दिन है. अन्‍ना ने कहा है कि बिल पास होने तक उनका अनशन नहीं टूटेगा. अन्‍ना बिल पर सरकार और कांग्रेस के साथ ही बीजेपी के रुख से खासे नाराज हैं. अन्‍ना ने प्रधानमंत्री, यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी समेत बीजेपी को भी चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.

अपनी चिट्ठी में अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी को लिखा कि उन्‍हें बार-बार झूठा आश्‍वासन देकर मुझे और देश को धोखा दिया गया है. अन्‍ना ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार की बात करते हुए लिखा कि बिल पास नहीं होने के कारण जनता गुस्‍से में है और इसलिए कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है. यदि इस बार भी बिल पास नहीं हुआ तो 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ेगा. अन्‍ना हजारे ने चिट्ठी में लिखा है कि उनका अनशन बिल पास होने तक जारी रहेगा और देश के लिए वह अंतिम बलिदान देने के लिए भी तैयार हैं.

बिल के जरिए बीजेपी पर निशाना
माना जा रहा है कि यूपीए सरकार संसद में बीजेपी की रणनीति को ढेर करने के लिए लोकपाल बिल पेश कर रही है. अगर विपक्ष सदन नहीं चलने देता है तो उसे इस मुद्दे पर घेरा जाएगा. साथ ही इस रणनीति के जरिए सरकार अन्ना हजारे और लोकपाल बिल समर्थकों को भी यह संदेश देना चाहती है कि वह लोकपाल बिल पास कराने के लिए गंभीर है.गौर करने वाली बात यह है कि संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत 5 दिसंबर को हुई थी. उस दिन से अब तक दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है. चाहे 2जी पर जेपीसी रिपोर्ट हो या तेलंगाना गठन का मसला, विपक्ष के साथ सरकार ने अपनों ने भी संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी है. ऐसे में इस बिल का पास हो पाना नामुमकिन ही लगता है.

लोकपाल बिल पर तमाम पार्टियों की प्रतिक्रियाएं
बीजेपी नेता अरुण जेटली- इस पर देरी नहीं होनी चाहिए.

आप नेता कुमार विश्वास- ना तो अन्ना और ना ही आम आदमी पार्टी राज्यसभा में पेश किए जाने वाले लोकपाल बिल के पक्ष में हैं. हमारी पार्टी इसे अस्वीकार करती है.

सपा नेता रामगोपाल यादव- समाजवादी पार्टी लोकपाल के समर्थन में नहीं है. बिल पर समर्थन का सवाल ही नहीं है.

बीजेपी नेता नजमा हेपतुल्ला- हमारी पार्टी लोकपाल के पक्ष में है. लेकिन सरकार इसे पास नहीं कराना चाहती. पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली भी लोकपाल के समर्थन के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं.

जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव- अच्छा होगा कि अन्ना अनशन ना करें. लोकपाल बिल तभी पास हो सकता है जब संसद चले और इस पर गहन विचार-विमर्श हो.

कांग्रेस नेता कमलनाथ- सत्र को घटाने की कोई योजना नहीं है. इस संबंध में आ रही खबरें गलत हैं. हमें कई बिल पास करने हैं जिनमें जनलोकपाल हमारी प्राथमिकता है. इसे पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा में लाया जाएगा.

सपा नेता नरेश अग्रवाल- सरकार जनता में विश्वास खो चुकी है. उसे कोई बिल संसद में पास कराने का हक नहीं है. नई सरकार सभी अहम बिल पास कराएगी. इस सरकार के सभी फैसले असंवैधानिक होते हैं. चुनाव लड़ना देश के हर नागरिक का अधिकार है. और हम हमेशा ऐसे लोगों का स्वागत करना चाहते हैं जो कि उत्तर प्रदेश में आकर चुनाव लड़ना चाहते हैं.

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