लालू और नीतीश की 'दोस्ती' से बीजेपी का 'प्लान' चौपट
पटना। बिहार में राज्यसभा की दो सीटों के उप चुनाव में आज क्रॉस वोटिंग के बावजूद सत्तारूढ़ जनता दल यू के दोनों उम्मीदवार पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी जीत गए। विधानसभा के कार्यकारी सचिव सह निर्वाची पदाधिकारी हरेराम मुखिया ने मतगणना के बाद जेडीयू प्रत्याशी पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी को निर्वाचित घोषित किया। जेडीयू प्रत्याशियों को 122 मत मिले वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों को 108 मत मिले।
राज्य में सत्तारूढ़ जेडीयू के 117 में से 21 विधायक और कांग्रेस के चार में से एक विधायक ने क्रॉस वोटिंग कर निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। वहीं भारतीय जनता पार्टी के 84 में से 83 और तीन निर्दलीय विधायकों ने भी साबिर अली और अनिल शर्मा को वोट दिया। बीजेपी के एक विधायक रामेश्वर चौरसिया विदेश में होने के कारण मतदान नहीं कर सके।
जेडीयू उम्मीदवार पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी को अपनी पार्टी के 117 में से 96, राष्ट्रीय जनता दल के 21 में से 20, कांग्रेस के तीन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक विधायक के अलावा दो निर्दलीय विधायकों का मत मिला। आरजेडी के विधायक केदारनाथ सिंह एक मामले में फरार हैं और इस कारण वह मतदान करने नहीं आए।
गौरतलब है कि 243 सदस्यीय विधानसभा में 11 सीट रिक्त हैं और ऐसे में 232 सदस्यीय वर्तमान विधानसभा में जीत के लिए 117 विधायकों का वोट ही चाहिए था। दो विधायकों के मतदान में हिस्सा नहीं लेने के कारण जीत के लिए 116 वोट की ही जरूरत रह गई थी।
वहीं राज्यसभा के लिये दो सीटों पर हुए उप चुनाव के परिणाम मिलने के तत्काल बाद सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं ने अपने ही दल के बागी विधायकों के आवास के समक्ष प्रदर्शन किया। उप चुनाव में जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार गुलाम रसूल वलियाबी और पवन वर्मा के पक्ष में परिणाम की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद ही पार्टी के कार्यर्कता नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कार्यकर्ता गोलबंद होकर बागी विधायकों का नेतृत्व कर रहे जेडीयू विधायक ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह उर्फ ज्ञानू और पूनम देवी के अति सुरक्षित क्षेत्र माने जाने वाले विशिष्ट इलाके में सरकारी आवास के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
इस दौरान जेडीयू कार्यकर्ताओं ने ज्ञानू का पुतला जलाया और कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण बागी सभी विधायकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे नेताओं के कारण ही पार्टी की छवि खराब हो रही है।
वहीं, पराजित निर्दलीय उम्मीदवार साबिर अली ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर उप चुनाव में धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सर्मथन देने का वायदा किया था और कसमें भी खाई थी लेकिन वह अचानक पलट गए। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि ऐसा क्या डील यादव और नीतीश कुमार के बीच हुई जिसके कारण लालू यादव रातों रात बदल गए।
अली ने कहा कि इस उप चुनाव से श्री यादव और श्री कुमार का चेहरा भी बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि लालू यादव को जंगल राज का पर्याय बताते नीतीश कुमार नहीं थकते थे, वहीं लालू यादव पानी पी पीकर नीतीश कुमार को कोसते रहते थे लेकिन दोनों ने ही अपने अपने स्वार्थ के कारण एक दूसरे से हाथ मिलाने में देर नहीं की।
राज्य में सत्तारूढ़ जेडीयू के 117 में से 21 विधायक और कांग्रेस के चार में से एक विधायक ने क्रॉस वोटिंग कर निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। वहीं भारतीय जनता पार्टी के 84 में से 83 और तीन निर्दलीय विधायकों ने भी साबिर अली और अनिल शर्मा को वोट दिया। बीजेपी के एक विधायक रामेश्वर चौरसिया विदेश में होने के कारण मतदान नहीं कर सके।
जेडीयू उम्मीदवार पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी को अपनी पार्टी के 117 में से 96, राष्ट्रीय जनता दल के 21 में से 20, कांग्रेस के तीन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक विधायक के अलावा दो निर्दलीय विधायकों का मत मिला। आरजेडी के विधायक केदारनाथ सिंह एक मामले में फरार हैं और इस कारण वह मतदान करने नहीं आए।
गौरतलब है कि 243 सदस्यीय विधानसभा में 11 सीट रिक्त हैं और ऐसे में 232 सदस्यीय वर्तमान विधानसभा में जीत के लिए 117 विधायकों का वोट ही चाहिए था। दो विधायकों के मतदान में हिस्सा नहीं लेने के कारण जीत के लिए 116 वोट की ही जरूरत रह गई थी।
वहीं राज्यसभा के लिये दो सीटों पर हुए उप चुनाव के परिणाम मिलने के तत्काल बाद सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं ने अपने ही दल के बागी विधायकों के आवास के समक्ष प्रदर्शन किया। उप चुनाव में जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार गुलाम रसूल वलियाबी और पवन वर्मा के पक्ष में परिणाम की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद ही पार्टी के कार्यर्कता नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कार्यकर्ता गोलबंद होकर बागी विधायकों का नेतृत्व कर रहे जेडीयू विधायक ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह उर्फ ज्ञानू और पूनम देवी के अति सुरक्षित क्षेत्र माने जाने वाले विशिष्ट इलाके में सरकारी आवास के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
इस दौरान जेडीयू कार्यकर्ताओं ने ज्ञानू का पुतला जलाया और कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण बागी सभी विधायकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे नेताओं के कारण ही पार्टी की छवि खराब हो रही है।
वहीं, पराजित निर्दलीय उम्मीदवार साबिर अली ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर उप चुनाव में धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सर्मथन देने का वायदा किया था और कसमें भी खाई थी लेकिन वह अचानक पलट गए। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि ऐसा क्या डील यादव और नीतीश कुमार के बीच हुई जिसके कारण लालू यादव रातों रात बदल गए।
अली ने कहा कि इस उप चुनाव से श्री यादव और श्री कुमार का चेहरा भी बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि लालू यादव को जंगल राज का पर्याय बताते नीतीश कुमार नहीं थकते थे, वहीं लालू यादव पानी पी पीकर नीतीश कुमार को कोसते रहते थे लेकिन दोनों ने ही अपने अपने स्वार्थ के कारण एक दूसरे से हाथ मिलाने में देर नहीं की।

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