जल्द भरे जाएंगे न्यायाधीशों के रिक्त पद : रविशंकर
मथुरा : केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार आम जनता को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के लिए आने वाले समय में न्यायिक व्यवस्था में कई परिवर्तन करने जा रही है जिसके तहत अदालतों में रिक्त पड़े पदों पर जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी, अदालतों की संख्या बढ़ाई जाएंगी तथा अदालती कामकाज का पूर्ण कंप्यूटरीकरण एवं पुराने कानूनों को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जांएगे।
रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को वृन्दावन में संवाददाताओं से कहा कि अदालतों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को जल्दी भरा जाएगा, ताकि जनता को त्वरित न्याय मिल सके। प्रसाद यहां बांके बिहारी के दर्शन करने के लिए आए थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे यहां आकर बेहद आत्मिक शांति मिलती है।’
कानून मंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालयों में कुल 906 पद हैं, जिनमें से 263 खाली हैं। निचली अदालतों में जजों के करीब 4000 पद रिक्त हैं। इस बारे में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों को शीघ्र खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालयों एवं अन्य स्तरों पर भी न्यायाधीशों की संख्या में इजाफा करने का निर्णय लिया गया है। कई राज्य सरकारों ने इस संबंध में अपनी सहमति भी दे दी है।
कानून मंत्री ने बताया कि अदालतों में ढांचागत संसाधन बढ़ाने के साथ-साथ उनका तेजी से कंप्यूटरीकरण भी कराया जा रहा है। अभी तक 10,000 अदालतों का कंप्यूटरीकरण हो चुका है। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद एक बटन दबाने पर मुवक्किल को अपने मुकदमे की स्थिति तुरंत पता चल जाएगी।
उन्होंने बताया कि विधि आयोग के माध्यम से सभी राज्यों के सचिवों को पत्र लिखकर अनुपयोगी कानूनों की सूची मंगाई है। इस प्रकार सभी आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हुए अनुपयोगी कानूनों को हटाया जा सकता है अथवा उनमें वर्तमान जरूरतों के हिसाब से परिवर्तन भी किया जा सकता है।
रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को वृन्दावन में संवाददाताओं से कहा कि अदालतों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को जल्दी भरा जाएगा, ताकि जनता को त्वरित न्याय मिल सके। प्रसाद यहां बांके बिहारी के दर्शन करने के लिए आए थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे यहां आकर बेहद आत्मिक शांति मिलती है।’
कानून मंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालयों में कुल 906 पद हैं, जिनमें से 263 खाली हैं। निचली अदालतों में जजों के करीब 4000 पद रिक्त हैं। इस बारे में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों को शीघ्र खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालयों एवं अन्य स्तरों पर भी न्यायाधीशों की संख्या में इजाफा करने का निर्णय लिया गया है। कई राज्य सरकारों ने इस संबंध में अपनी सहमति भी दे दी है।
कानून मंत्री ने बताया कि अदालतों में ढांचागत संसाधन बढ़ाने के साथ-साथ उनका तेजी से कंप्यूटरीकरण भी कराया जा रहा है। अभी तक 10,000 अदालतों का कंप्यूटरीकरण हो चुका है। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद एक बटन दबाने पर मुवक्किल को अपने मुकदमे की स्थिति तुरंत पता चल जाएगी।
उन्होंने बताया कि विधि आयोग के माध्यम से सभी राज्यों के सचिवों को पत्र लिखकर अनुपयोगी कानूनों की सूची मंगाई है। इस प्रकार सभी आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हुए अनुपयोगी कानूनों को हटाया जा सकता है अथवा उनमें वर्तमान जरूरतों के हिसाब से परिवर्तन भी किया जा सकता है।

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