भारत के लिए 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के बराबर पदक जीतना मुश्किल
नई दिल्ली : भारत के विदेशी टेबल टेनिस कोच पीटर एंजेल ने कहा कि उन्हें ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अपने खिलाड़ियों से तीन पदक की उम्मीद है जो कि चार साल पहले दिल्ली में जीत गये पदकों से दो कम है। पिछले अक्तूबर में पद भार संभालने वाले एंजेल ने कहा कि उनका आकलन वर्तमान फार्म को देखकर है और इसके साथ ही इस बार भारत को घरेलू परिस्थितियों का लाभ नहीं मिलेगा।
एंजेल ने दस सदस्यीय टीम के कल ग्लास्गो रवाना होने से पहले कहा, खिलाड़ियों की तैयारियों से मैं बहुत खुश हूं। मैंने पहले भी कहा था कि महिला खिलाड़ियों को अपने खेल में सुधार के लिये अधिक से अधिक विदेशी दौरों की जरूरत है। भारत राष्ट्रमंडल खेलों की टेबल टेनिस प्रतियोगिता में पदक जीतता रहा है क्योंकि विश्व और एशियाई स्तर पर उसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। भारत ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में पांच पदक जीते थे। तब पुरूष युगल में शरत कमल और सुभाजीत साहा ने स्वर्ण और महिला टीम ने रजत पदक जीता था। इसके अलावा भारत ने तीन कांस्य पदक भी हासिल किये थे। एंजेल भले की घरेलू परिस्थितियों की बात कर रहे हों लेकिन भारत ने मेलबर्न 2006 में दो स्वर्ण पदक जीते थे जब शरत ने एकल का खिताब जीता था। इसके अलावा उन्होंने भारत को टीम खिताब दिलाने में भी अहम भूमिका निभायी थी।
एंजेल से जब पूछा गया कि भारत कितने स्वर्ण पदक का लक्ष्य लेकर चल रहा है, उन्होंने कहा, रंग मेरे लिये मायने नहीं रखता। मैं यही कह सकता हूं कि मैं तीन पदकों की उम्मीद कर रहा हूं। भारतीय टीम ने पटिायाल में दो सप्ताह तक कोचिंग की। एंजेल का मानना है कि शरत अब भी भारत का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है भले ही उन्होंने पिछले तीन साल से राष्ट्रीय खिताब नहीं जीता है। उन्होंने कहा, मुझे शरत से काफी अपेक्षा है। उसका शिविर में होना बहुत अच्छा रहा। प्रत्येक उसकी तरफ देखता है और यदि वह ग्लास्गो में अच्छा प्रदर्शन करता है तो अन्य को उससे अन्य खिलाड़ियों को विशेष परिणाम हासिल करने के लिये अतिरिक्त प्रयास करने की प्रेरणा मिलेगी।
एंजेल ने दस सदस्यीय टीम के कल ग्लास्गो रवाना होने से पहले कहा, खिलाड़ियों की तैयारियों से मैं बहुत खुश हूं। मैंने पहले भी कहा था कि महिला खिलाड़ियों को अपने खेल में सुधार के लिये अधिक से अधिक विदेशी दौरों की जरूरत है। भारत राष्ट्रमंडल खेलों की टेबल टेनिस प्रतियोगिता में पदक जीतता रहा है क्योंकि विश्व और एशियाई स्तर पर उसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। भारत ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में पांच पदक जीते थे। तब पुरूष युगल में शरत कमल और सुभाजीत साहा ने स्वर्ण और महिला टीम ने रजत पदक जीता था। इसके अलावा भारत ने तीन कांस्य पदक भी हासिल किये थे। एंजेल भले की घरेलू परिस्थितियों की बात कर रहे हों लेकिन भारत ने मेलबर्न 2006 में दो स्वर्ण पदक जीते थे जब शरत ने एकल का खिताब जीता था। इसके अलावा उन्होंने भारत को टीम खिताब दिलाने में भी अहम भूमिका निभायी थी।
एंजेल से जब पूछा गया कि भारत कितने स्वर्ण पदक का लक्ष्य लेकर चल रहा है, उन्होंने कहा, रंग मेरे लिये मायने नहीं रखता। मैं यही कह सकता हूं कि मैं तीन पदकों की उम्मीद कर रहा हूं। भारतीय टीम ने पटिायाल में दो सप्ताह तक कोचिंग की। एंजेल का मानना है कि शरत अब भी भारत का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है भले ही उन्होंने पिछले तीन साल से राष्ट्रीय खिताब नहीं जीता है। उन्होंने कहा, मुझे शरत से काफी अपेक्षा है। उसका शिविर में होना बहुत अच्छा रहा। प्रत्येक उसकी तरफ देखता है और यदि वह ग्लास्गो में अच्छा प्रदर्शन करता है तो अन्य को उससे अन्य खिलाड़ियों को विशेष परिणाम हासिल करने के लिये अतिरिक्त प्रयास करने की प्रेरणा मिलेगी।

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