लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर स्पीकर करेंगी फैसला: नायडू
हैदराबाद : केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि विपक्ष के नेता (एलओपी) का दर्जा देने का विषय लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष है और सभी को पीठासीन अधिकारी के निर्णय को मानना चाहिए।
नायडू ने कहा, ‘नेहरूजी के समय में विपक्ष का कोई नेता नहीं होता था। इंदिरा गांधी के दौर में कोई विपक्ष का नेता नहीं था। राजीव गांधी के समय में विपक्ष का नेता नहीं था।’ भाजपा के कार्यालय में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजिम समारोह के दौरान संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, ‘वे (कांग्रेस नेता) कहते हैं कि स्थिति तब और अब अलग-अलग है। वे आपको उदार बनने के लिए (एलओपी के विषय पर) कहते हैं। यह जनादेश है और यह विषय संविधान से संबंधित है। लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को मानना चाहिए। देखें कि लोकसभा अध्यक्ष क्या फैसला करती हैं। कुछ नियम, कायदे, चलन, नियमन और स्पीकर के निर्देश हैं। यह सब हमारे समक्ष है। सभी को इसके अनुरूप चलना चाहिए।’
कांग्रेस नेता शकील अहमद की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर नायडू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘देखते हैं, क्या होता है। हम सदन चलाना जानते हैं। इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा की जरूरत नहीं है। वे हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है। हम इसे उनकी बुद्धिमता पर छोड़ देते हैं।’ भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘लोगों को जो निर्णय करना था, वह निर्णय कर लिया। हम उम्मीद करते हैं कि कांग्रेस और हम सभी को मिलकर सदल चलाना है, लोगों की भलाई और देश के विकास के लिए काम करना है।’
इससे पहले पार्टी की बैठक में नायडू ने कांग्रेस के कुछ नेताओं की उन टिप्पणियों का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर एलओपी का पद नहीं मिला तब वे अदालत में जायेंगे। नायडू ने कहा, ‘उन्हें अदालत में जाने का अधिकार है। आप प्रधानमंत्री पद नहीं मिलने पर भी अदालत में जा सकते हैं। कई लोग अदालत जाते हैं। उन्हें अदालत जाने का अधिकार है।’
उन्होंने कहा, ‘लेकिन जनता की अदालत ने निर्णय कर लिया है। लोगों ने अपना जनादेश दे दिया है। हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में है। इन बातों पर न्यायपालिका निर्णय नहीं कर सकती है। इस पर लोग फैसला करते हैं।’
नायडू ने कहा, ‘नेहरूजी के समय में विपक्ष का कोई नेता नहीं होता था। इंदिरा गांधी के दौर में कोई विपक्ष का नेता नहीं था। राजीव गांधी के समय में विपक्ष का नेता नहीं था।’ भाजपा के कार्यालय में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजिम समारोह के दौरान संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, ‘वे (कांग्रेस नेता) कहते हैं कि स्थिति तब और अब अलग-अलग है। वे आपको उदार बनने के लिए (एलओपी के विषय पर) कहते हैं। यह जनादेश है और यह विषय संविधान से संबंधित है। लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को मानना चाहिए। देखें कि लोकसभा अध्यक्ष क्या फैसला करती हैं। कुछ नियम, कायदे, चलन, नियमन और स्पीकर के निर्देश हैं। यह सब हमारे समक्ष है। सभी को इसके अनुरूप चलना चाहिए।’
कांग्रेस नेता शकील अहमद की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर नायडू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘देखते हैं, क्या होता है। हम सदन चलाना जानते हैं। इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा की जरूरत नहीं है। वे हार स्वीकार करने को तैयार नहीं है। हम इसे उनकी बुद्धिमता पर छोड़ देते हैं।’ भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘लोगों को जो निर्णय करना था, वह निर्णय कर लिया। हम उम्मीद करते हैं कि कांग्रेस और हम सभी को मिलकर सदल चलाना है, लोगों की भलाई और देश के विकास के लिए काम करना है।’
इससे पहले पार्टी की बैठक में नायडू ने कांग्रेस के कुछ नेताओं की उन टिप्पणियों का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर एलओपी का पद नहीं मिला तब वे अदालत में जायेंगे। नायडू ने कहा, ‘उन्हें अदालत में जाने का अधिकार है। आप प्रधानमंत्री पद नहीं मिलने पर भी अदालत में जा सकते हैं। कई लोग अदालत जाते हैं। उन्हें अदालत जाने का अधिकार है।’
उन्होंने कहा, ‘लेकिन जनता की अदालत ने निर्णय कर लिया है। लोगों ने अपना जनादेश दे दिया है। हम लोकतांत्रिक व्यवस्था में है। इन बातों पर न्यायपालिका निर्णय नहीं कर सकती है। इस पर लोग फैसला करते हैं।’

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