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सोनिया की इफ्तार पार्टी में नजर आया नया सियासी समीकरण

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में नए सियासी समीकरण नजर आए। अब तक खुद को धर्मनिरपेक्ष करार देने वाले कांग्रेस के कई सहयोगी नदारद रहे।सोनिया गांधी के साथ डिनर टेबल पर बिहार के दो दिग्गज नेताओं, लालू यादव और शरद यादव की मौजूदगी चर्चा में रही। बिहार में भाजपा को रोकने के लिए राजद और जेडीयू ने दो दशक बाद हाथ मिलाया है।

राकांपा सुप्रीमो शरद पवार खुद नहीं आए। उन्होंने तारिक अनवर को भेजकर औपचारिकता निभाई। वहीं रालोद प्रमुख अजीत पवार की गैरमौजूदगी पर भी कानाफूसी हुई।साथ ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ छाती ठोंककर खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और वामदलों ने भी शिरकत नहीं की। मायावती की ओर से भी कोई नहीं आया।बहरहाल, कांग्रेसी नेता सफाई दे रहे हैं कि रविवार होने के कारण कई सहयोगी दलों के नेता नहीं आ सके। सोमवार और मंगलवार को संसद की कार्रवाई नहीं हो रही है।

कुछ ऐसा था इफ्तार पार्टी का नजारा

सोनिया ने लालू, शरद और अनवर के साथ खाना खाया। कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मोहसिना किदवई मौजूद रहीं। शरद यादव के साथ केसी त्यागी भी थे, लेकिन वे जल्दी चले गए।पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अलग टेबल पर गैर-राजनीतिक मेहमानों के साथ बैठे नजर आए। ऐसे मेहमानों में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाय कुरैशी और शर्मिला टेगौर शामिल थीं।सोनिया ने शर्मिला से अपने साथ बैठने की गुजारिश भी की थी, लेकिन पूर्व अभिनेत्री अलग ही बैठी रहीं।

कांग्रेस के सेकंड-इन-कमांड राहुल गांधी राजनयिकों के साथ बैठे नजर आए। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलामनबी आजाद और उपनेता आनंद शर्मा ने उन्हें कंपनी दी।राहुल मजाकिया मूड में नजर आए। उन्होंने मीडियाकर्मियों के साथ भी हल्के-फुल्के अंदाज में बात की, लेकिन कोई राजनीतिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।जब कांग्रेस उपाध्यक्ष से नितिन गडकरी के निवास पर हुई कथित जासूसी के बारे में पूछा गया तो राहुल ने उल्टा सवाल किया, क्या वे कह रहे हैं कि हमने (कांग्रेस) ऐसा किया है?विदेशी मेहमानों में पाकिस्तान के हाईकमिश्नर अब्दुल बासित और रूसी राजदूत मौजूद थे।

क्या यह कांग्रेस से दूरी का नतीजा है?

राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि लोकसभा में कांग्रेस की करारी हार के बाद अधिकांश दल उससे दूरी बनाए रखना चाहते हैं। हालात ये हैं कि एआईएडीएमके, तृणमूल कांग्रेस और बीजेडी दलों के नेता संसद में कांग्रेस के साथ बैठने को राजी नहीं हैं।

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