धरना-सौहार्द यात्रा के नाम पर सियासत
नई दिल्ली। यूपी के मुरादाबाद में सियासत अपने खेल से बाज आना नहीं चाहती। कांग्रेस के कई नेता मुरादाबाद के कांठ के लिए दिल्ली और गाजियाबाद से निकले। इनका मकसद था कांठ में सौहार्द यात्रा निकालना। लेकिन यात्रा शुरू होते ही यूपी बॉर्डर पर जाम की वजह से आम लोग परेशान हो गए। दूसरी तरफ बीजेपी ने भी मुरादाबाद के डीएम दफ्तर के बाहर धरना दिया। बीजेपी नेताओं की मांग थी कि इलाके के एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना।
यूपी में धरने और सौहार्द यात्रा के नाम पर सियासत की दो तस्वीरें दिखी। पहली तस्वीर में यूपी बीजेपी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी मुरादाबाद के डीएम आवास के बाहर धरने पर हैं। तो दूसरी तस्वीर में कांग्रेस के नेता मधुसूदन मिस्त्री, प्रदीप माथुर और नगमा सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गाजियाबाद के पुलिस लाइंस में। कहने को मकसद अलग-अलग, लेकिन असल मकसद दोनों का एक ही है, सूबे में मजहबी सियासत को गर्माना।
पहले बात कांग्रेस की, मुरादाबाद के कांठ में पहले से घोषित सौहार्द यात्रा के लिए जब कांग्रेसी निकले, तो सड़कों पर लंबा जाम लग गया। ताक में बैठी पुलिस ने कांग्रेस के नेताओं को रोक लिया। बाद में उन्हें पुलिस लाइंस लाया गया। कांग्रेस के नेताओं की दलील थी कि वो मार्च के जरिए अमन का पैगाम देना चाहते हैं।
लेकिन प्रशासन को ऐसी सौर्हाद यात्रा से अमन पर खतरा मंडराता नजर आया। इसलिए इलाके में धारा 144 लगा दी गई। लेकिन प्रशासन की मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई। बीजेपी ने शनिवार को मुरादाबाद में डीएम आवास के बाहर धरना कार्यक्रम तय किया था। इसके तहत लक्ष्मीकांत वाजपेयी 25 समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। वाजपेयी ने मुरादाबाद के एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। एसएसपी पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की बेवजह पिटाई का आरोप है। ये पिटाई लाउडस्पीकर विवाद के दौरान करने का आरोप है। बाद में डीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद ये धरना खत्म हो गया।
हालांकि इस दौरान संगीत सोम से लेकर सुरेश राणा जैसे वो चेहरे भी नजर आए, जिनके खिलाफ सद्भाव बिगाड़ने से संबंधित मामले दर्ज हैं। एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने गए राणा को पुलिस ने कांठ में ही हिरासत में ले लिया।
बीजेपी विधायक सुरेश राणा ने कहा कि हमने कहा था कि हम कांठ जाएंगे और एफआईआर करेंगे। इमरजेंसी के खिलाफ ये पहली बार ऐसा हो रहा है। जिन लोगों ने लाठीचार्ज किया है उनके खिलाफ शिकायत की है।
हालांकि बीजेपी के इस कार्यक्रम के मद्देनजर प्रशासन ने बड़ी तादाद में सुरक्षाबलों की तैनाती कर पुख्ता तैयारी के संकेत दे दिए थे। कांठ के मंदिर में लाउडस्पीकर को लेकर शुरू हुआ विवाद पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। अब इलाके में बीजेपी और कांग्रेस की सियासत का दौर तेज होने लगा है।
शुक्रवार को जलाभिषेक के लिए निकली साध्वी प्राची को बिजनौर में रोका गया तो बीजेपी को ये भी रास नहीं आया। और अब सौहार्द के बहाने कांग्रेस की सियासत। क्या धर्म और अमन के नाम पर समाजिक तानेबाने को बिगाड़ने का खतरनाक खेल खत्म नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया
उत्तर प्रदेश में जारी बवाल पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नेता आनंद शर्मा का कहना है कि देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है, लेकिन देश के प्रधानमंत्री खामोश हैं।
आनंद शर्मा ने कहा कि पीएम की चुप्पी क्यों नहीं टूट रही है। कम्यूनल टेंशन पूरे देश में बढ़ रहा है लेकिन पीएम चुप क्यों हैं। बीजेपी जानबूझकर वोटों का ध्रुवीकरण कराना चाहते है। कांग्रेस शांति मार्च निकाल रही है, बीजेपी की तरह लोगों में धार्मिक भावना नहीं भड़का रही है।
यूपी में धरने और सौहार्द यात्रा के नाम पर सियासत की दो तस्वीरें दिखी। पहली तस्वीर में यूपी बीजेपी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी मुरादाबाद के डीएम आवास के बाहर धरने पर हैं। तो दूसरी तस्वीर में कांग्रेस के नेता मधुसूदन मिस्त्री, प्रदीप माथुर और नगमा सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गाजियाबाद के पुलिस लाइंस में। कहने को मकसद अलग-अलग, लेकिन असल मकसद दोनों का एक ही है, सूबे में मजहबी सियासत को गर्माना।
पहले बात कांग्रेस की, मुरादाबाद के कांठ में पहले से घोषित सौहार्द यात्रा के लिए जब कांग्रेसी निकले, तो सड़कों पर लंबा जाम लग गया। ताक में बैठी पुलिस ने कांग्रेस के नेताओं को रोक लिया। बाद में उन्हें पुलिस लाइंस लाया गया। कांग्रेस के नेताओं की दलील थी कि वो मार्च के जरिए अमन का पैगाम देना चाहते हैं।
लेकिन प्रशासन को ऐसी सौर्हाद यात्रा से अमन पर खतरा मंडराता नजर आया। इसलिए इलाके में धारा 144 लगा दी गई। लेकिन प्रशासन की मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई। बीजेपी ने शनिवार को मुरादाबाद में डीएम आवास के बाहर धरना कार्यक्रम तय किया था। इसके तहत लक्ष्मीकांत वाजपेयी 25 समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। वाजपेयी ने मुरादाबाद के एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। एसएसपी पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की बेवजह पिटाई का आरोप है। ये पिटाई लाउडस्पीकर विवाद के दौरान करने का आरोप है। बाद में डीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद ये धरना खत्म हो गया।
हालांकि इस दौरान संगीत सोम से लेकर सुरेश राणा जैसे वो चेहरे भी नजर आए, जिनके खिलाफ सद्भाव बिगाड़ने से संबंधित मामले दर्ज हैं। एसएसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने गए राणा को पुलिस ने कांठ में ही हिरासत में ले लिया।
बीजेपी विधायक सुरेश राणा ने कहा कि हमने कहा था कि हम कांठ जाएंगे और एफआईआर करेंगे। इमरजेंसी के खिलाफ ये पहली बार ऐसा हो रहा है। जिन लोगों ने लाठीचार्ज किया है उनके खिलाफ शिकायत की है।
हालांकि बीजेपी के इस कार्यक्रम के मद्देनजर प्रशासन ने बड़ी तादाद में सुरक्षाबलों की तैनाती कर पुख्ता तैयारी के संकेत दे दिए थे। कांठ के मंदिर में लाउडस्पीकर को लेकर शुरू हुआ विवाद पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। अब इलाके में बीजेपी और कांग्रेस की सियासत का दौर तेज होने लगा है।
शुक्रवार को जलाभिषेक के लिए निकली साध्वी प्राची को बिजनौर में रोका गया तो बीजेपी को ये भी रास नहीं आया। और अब सौहार्द के बहाने कांग्रेस की सियासत। क्या धर्म और अमन के नाम पर समाजिक तानेबाने को बिगाड़ने का खतरनाक खेल खत्म नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया
उत्तर प्रदेश में जारी बवाल पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नेता आनंद शर्मा का कहना है कि देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है, लेकिन देश के प्रधानमंत्री खामोश हैं।
आनंद शर्मा ने कहा कि पीएम की चुप्पी क्यों नहीं टूट रही है। कम्यूनल टेंशन पूरे देश में बढ़ रहा है लेकिन पीएम चुप क्यों हैं। बीजेपी जानबूझकर वोटों का ध्रुवीकरण कराना चाहते है। कांग्रेस शांति मार्च निकाल रही है, बीजेपी की तरह लोगों में धार्मिक भावना नहीं भड़का रही है।

No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com