निराश छात्राओं को प्रधानमंत्री मोदी से बंधी आस
नई दिल्ली :
दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध लक्ष्मीबाई कॉलेज की छात्राएं अपना हक
पाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई की तरह मैंदान में उतर गई हैं। यह सभी
छात्राएं बी.ए. पॉलीटिकल साइंस ऑनर्स अंतिम सत्र की है।
पीड़ित छात्राओं के अनुसार अंतिम सत्र में उन्हें जबरन इकॉनोमिक्स सब्जैक्ट दिया गया और ऊपर से परीक्षा में पेपर बदल गया। जिसके चलते वह फेल हो गई। तब से विश्वविद्यालय के चक्कर काट रही हैं, मगर डी.यू. प्रशासन उनकी तरफ से आंखे मूंदे बैठा है।
ऐसे में सभी ने यू.जी.सी., एच.आर.डी. मिनिस्ट्री, डी.यू. विजीटर उपराष्ट्रपति के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायत भेजी हैं। लक्ष्मीबाई कॉलेज में बी.ए पॉलीटिक्ल साइंस ऑनर्स अंतिम सत्र की परीक्षा में करीब 40 से ज्यादा छात्राएं फेल हैं।
छात्राओं के अनुसार अंतिम सत्र में उन्हें जबरन इकॉनोमिक्स सबजैक्ट दिया गया। जब छात्राओं को जबरन इस विषय में भेजे जने का विरोध किया, तो उनकी एक नही सुनी गई।
असमंजस में फंसी छात्राओं ने शुरूआती 20 दिनों तक क्लास भी नहीं की। सभी छात्राओं ने मिलकर इस मामले में दोबारा कॉलेज प्रशासन से बात की और इकॉनोमिक्स के स्थान पर दूसरा विषय पढऩे की इच्छा जताई।
इस पर कॉलेज ने जवाब दिया कि उन्हें पढ़ाने के लिए इकॉनोमिक्स टीचर की नियुक्ति की जा चुकी है जबकि मिरांडा आदि दूसरे कॉलेजों में दूसरे सब्जैक्ट भी हैं।
छात्राओं की समस्या यहीं खत्म नहीं हुई, जबरदस्ती मिले विषय को पढऩे के बाद जब छात्राएं परीक्षा देने पहुंची तो प्रश्न पत्र देख होश उड़ गए। प्रश्न पत्र बी.एस.सी. (ऑनर्स) के छात्रों के लिए था।
कॉलेज ने पॉलीटिकल साइंस ऑनर्स की छात्राओं के लिए पेपर तक तैयार नहीं कराया था। इस पर भी छात्राओं को जबरन वही पेपर करवाया गया। इसमें अधिकतर छात्राएं फेल हो गई।
ज्यादातर छात्राओं के सभी विषयों में अच्छे अंक हैं, मगर इकॉनोमिक्स की जानकारी नहीं होने के कारण वह इसमें रह गई। पेपर बदलने के कारण छात्राओं को हो रहे नुक्सान के कारण अभी तक वह कॉलेज से विश्वविद्यालय तक के धक्के खा रही हैं।
डूटा और डूसू में भी वह अपना मुद्दा लेकर गई, मगर दोनों संगठन भी डी.यू. प्रशासन के रवैए के चलते उन्हें न्याय नहीं दिला सके।
खुद लडऩे का लिया निर्णय
छात्राओं अपने लिए न्याय की लड़ाई खुद ही लडऩे का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय के बेरुखी भरे रवैए से परेशान होकर छात्राओं ने यू.जी.सी, एच.आर.डी., उपराष्ट्रपति के साथ ही पी.एम.ओ. को अपनी समस्याओं के संबंध में पत्र लिखा।
अब छात्राओं को प्रधानमंत्री कार्यालय से इंसाफ किए जाने की उम्मीद है। पीड़ितों में शामिल छात्रा वर्षा, का यह भी कहना है कि यदि इस स्तर तक अपनी लड़ाई को ले जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिलता है, तो वह सभी मिलकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।
पीड़ित छात्राओं के अनुसार अंतिम सत्र में उन्हें जबरन इकॉनोमिक्स सब्जैक्ट दिया गया और ऊपर से परीक्षा में पेपर बदल गया। जिसके चलते वह फेल हो गई। तब से विश्वविद्यालय के चक्कर काट रही हैं, मगर डी.यू. प्रशासन उनकी तरफ से आंखे मूंदे बैठा है।
ऐसे में सभी ने यू.जी.सी., एच.आर.डी. मिनिस्ट्री, डी.यू. विजीटर उपराष्ट्रपति के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायत भेजी हैं। लक्ष्मीबाई कॉलेज में बी.ए पॉलीटिक्ल साइंस ऑनर्स अंतिम सत्र की परीक्षा में करीब 40 से ज्यादा छात्राएं फेल हैं।
छात्राओं के अनुसार अंतिम सत्र में उन्हें जबरन इकॉनोमिक्स सबजैक्ट दिया गया। जब छात्राओं को जबरन इस विषय में भेजे जने का विरोध किया, तो उनकी एक नही सुनी गई।
असमंजस में फंसी छात्राओं ने शुरूआती 20 दिनों तक क्लास भी नहीं की। सभी छात्राओं ने मिलकर इस मामले में दोबारा कॉलेज प्रशासन से बात की और इकॉनोमिक्स के स्थान पर दूसरा विषय पढऩे की इच्छा जताई।
इस पर कॉलेज ने जवाब दिया कि उन्हें पढ़ाने के लिए इकॉनोमिक्स टीचर की नियुक्ति की जा चुकी है जबकि मिरांडा आदि दूसरे कॉलेजों में दूसरे सब्जैक्ट भी हैं।
छात्राओं की समस्या यहीं खत्म नहीं हुई, जबरदस्ती मिले विषय को पढऩे के बाद जब छात्राएं परीक्षा देने पहुंची तो प्रश्न पत्र देख होश उड़ गए। प्रश्न पत्र बी.एस.सी. (ऑनर्स) के छात्रों के लिए था।
कॉलेज ने पॉलीटिकल साइंस ऑनर्स की छात्राओं के लिए पेपर तक तैयार नहीं कराया था। इस पर भी छात्राओं को जबरन वही पेपर करवाया गया। इसमें अधिकतर छात्राएं फेल हो गई।
ज्यादातर छात्राओं के सभी विषयों में अच्छे अंक हैं, मगर इकॉनोमिक्स की जानकारी नहीं होने के कारण वह इसमें रह गई। पेपर बदलने के कारण छात्राओं को हो रहे नुक्सान के कारण अभी तक वह कॉलेज से विश्वविद्यालय तक के धक्के खा रही हैं।
डूटा और डूसू में भी वह अपना मुद्दा लेकर गई, मगर दोनों संगठन भी डी.यू. प्रशासन के रवैए के चलते उन्हें न्याय नहीं दिला सके।
खुद लडऩे का लिया निर्णय
छात्राओं अपने लिए न्याय की लड़ाई खुद ही लडऩे का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय के बेरुखी भरे रवैए से परेशान होकर छात्राओं ने यू.जी.सी, एच.आर.डी., उपराष्ट्रपति के साथ ही पी.एम.ओ. को अपनी समस्याओं के संबंध में पत्र लिखा।
अब छात्राओं को प्रधानमंत्री कार्यालय से इंसाफ किए जाने की उम्मीद है। पीड़ितों में शामिल छात्रा वर्षा, का यह भी कहना है कि यदि इस स्तर तक अपनी लड़ाई को ले जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिलता है, तो वह सभी मिलकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।

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