भारत ने चीन से कहा, गाड़ी ऐसे नहीं चल सकती
नई दिल्ली : भारत ने चीन से कहा है कि करीब 36 अरब डॉलर का व्यापार असंतुलन सही नहीं है। इसके बाद दोनों पक्षों ने इस मसले के हल के लिए विशेषज्ञ स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय किया है। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने रेखांकित किया कि चीन के साथ संबंध भारत की नई सरकार के लिए प्राथमिकता सूची में ऊपर है। पांच दिन की चीन यात्रा के बाद वह कल रात स्वदेश लौटे।
उन्होंने कहा, मेरी लंबी चर्चा हुई, मंत्री (वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण) ने अलग से चर्चा की। हमने कहा कि व्यापार बढ़ा है लेकिन असंतुलन बना हुआ है जो सही नहीं है और इस तरह से गाड़ी ज्यादा नहीं चल सकती। भारतीय निर्यात में लगातार कमी के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार 2011 में 75 अरब डॉलर से घटकर पिछले साल 65.45 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच व्यापार अंसुतलन फिलहाल 36.5 अरब डॉलर है जो भारतीय पक्ष के लिए चिंता का विषय है।
इस असंतुलन का मुख्य कारण कारण चीन में मजबूत नियामकीय ढांचा है जो आईटी तथा औषधि क्षेत्र में भारतीय निर्यात को हतोत्साहित करता है जबकि दोनों क्षेत्रों में भारत की मजबूत स्थिति है। दोनों देशों ने अगले साल तक व्यापार बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि यह मुश्किल है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि असंतुलन दूर करने के लिये दो रास्ते हैं। एक, भारत, चीन को निर्यात बढ़ाये और दूसरा यह है कि चीन, भारत में निवेश बढ़ाये। स्वदेश लौटते समय संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक थी। कुछ मुद्दे हैं, जिनका वह अध्ययन करना चाहते हैं..यह जटिल, तकनीकी विषय है। उन्होंने कहा, विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत होगी।
विदेशी कंपनियों के भारत में इकाई स्थापित करने में कथित कठिनाइयों से जुड़े एक सवाल के जवाब में हामिद अंसारी ने कहा कि वित्त मंत्री अरूण जेटली तथा अन्य ने इस संदर्भ में बयान दिये हैं और एफडीआई प्रक्रिया को सरलीकृत बनाने के प्रस्ताव हैं। उन्होंने कहा कि आम बजट में इस बारे में विस्तार से उल्लेख होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चीनी नेतृत्व भारत में नये नेतृत्व के साथ ‘व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क’ स्थापित करने को लेकर गंभीर है। अंसारी ने कहा, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इस बारे में मुझसे कहा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को लेकर उनके मन में उत्साह है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इसी महीने ब्राजील में होना है।
उन्होंने कहा, मेरी लंबी चर्चा हुई, मंत्री (वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण) ने अलग से चर्चा की। हमने कहा कि व्यापार बढ़ा है लेकिन असंतुलन बना हुआ है जो सही नहीं है और इस तरह से गाड़ी ज्यादा नहीं चल सकती। भारतीय निर्यात में लगातार कमी के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार 2011 में 75 अरब डॉलर से घटकर पिछले साल 65.45 अरब डॉलर रहा। दोनों देशों के बीच व्यापार अंसुतलन फिलहाल 36.5 अरब डॉलर है जो भारतीय पक्ष के लिए चिंता का विषय है।
इस असंतुलन का मुख्य कारण कारण चीन में मजबूत नियामकीय ढांचा है जो आईटी तथा औषधि क्षेत्र में भारतीय निर्यात को हतोत्साहित करता है जबकि दोनों क्षेत्रों में भारत की मजबूत स्थिति है। दोनों देशों ने अगले साल तक व्यापार बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि यह मुश्किल है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि असंतुलन दूर करने के लिये दो रास्ते हैं। एक, भारत, चीन को निर्यात बढ़ाये और दूसरा यह है कि चीन, भारत में निवेश बढ़ाये। स्वदेश लौटते समय संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक थी। कुछ मुद्दे हैं, जिनका वह अध्ययन करना चाहते हैं..यह जटिल, तकनीकी विषय है। उन्होंने कहा, विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत होगी।
विदेशी कंपनियों के भारत में इकाई स्थापित करने में कथित कठिनाइयों से जुड़े एक सवाल के जवाब में हामिद अंसारी ने कहा कि वित्त मंत्री अरूण जेटली तथा अन्य ने इस संदर्भ में बयान दिये हैं और एफडीआई प्रक्रिया को सरलीकृत बनाने के प्रस्ताव हैं। उन्होंने कहा कि आम बजट में इस बारे में विस्तार से उल्लेख होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चीनी नेतृत्व भारत में नये नेतृत्व के साथ ‘व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क’ स्थापित करने को लेकर गंभीर है। अंसारी ने कहा, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इस बारे में मुझसे कहा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को लेकर उनके मन में उत्साह है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इसी महीने ब्राजील में होना है।

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