अखिलेश ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
नई दिल्ली : संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न के खिलाफ और सी-सैट को खत्म करने की मांग के मद्देनजर यूपीएससी के अभ्यर्थियों ने सोमवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। दूसरी ओर, सिविल सर्विसेज ऐप्टिट्यूड टेस्ट्स (सी-सैट) परीक्षा प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में अखिलेश यादव ने पीएम मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है ताकि क्षेत्रीय भाषाओं के परीक्षार्थियों के साथ अन्याय न हो। अखिलेश यादव परीक्षा पैटर्न में बदलाव चाहते हैं।
गौर हो कि बीते सप्ताह, नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों को भरोसा दिलाया था कि वे अपनी मांग को लेकर संयम बरतें और उनके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी बीते कई दिनों से यूपीएससी की ओर से आवेदनकर्ताओं को प्रवेशपत्र जारी करने के खिलाफ और सिविल सर्विसेज ऐप्टिट्यूड टेस्ट्स (सी-सैट) खत्म करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
उधर, सूत्रों के मुताबिक संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूचित किया कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ बैठक कर छात्रों के आंदोलन से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की है। सिंह ने प्रधानमंत्री को उन संभावित कदमों के बारे में बताया जो मुद्दे को सुलझाने के लिए उठाये जा सकते हैं। छात्र संघ लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव और साथ ही परीक्षा के कार्यक्रम को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, सरकार ने छात्रों से प्रदर्शन रोकने का अनुरोध किया है। अगले महीने होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के लिए यूपीएससी द्वारा प्रवेश पत्र जारी करने के चलते बीते बृहस्पतिवार रात से प्रदर्शन तेज हो गया। ग्रामीण इलाकों से आने वालों छात्रों को प्रतियोगिता का समान स्तर मुहैया करने के लिए सीसैट के पैटर्न में बदलाव की छात्रों की मांग पर सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति विचार कर रही है।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह छात्रों की मांग के मद्देनजर यूपीएससी से प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित करने का अनुरोध पहले ही कर चुके हैं। वहीं, प्रदर्शन करने वाले यूपीएससी अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि वर्तमान प्रारूप उन लोगों के साथ भेदभाव करता है जो अंग्रेजी भाषा में दक्ष नहीं हैं।
जिक्र योग्य है कि सिविल सेवा परीक्षा प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार के रूप में तीन चरणों में होती है, जिसके जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) सहित अन्य सेवाओं के लिए उम्मीदवार चुने जाते हैं।
गौर हो कि बीते सप्ताह, नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों को भरोसा दिलाया था कि वे अपनी मांग को लेकर संयम बरतें और उनके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होगा। सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी बीते कई दिनों से यूपीएससी की ओर से आवेदनकर्ताओं को प्रवेशपत्र जारी करने के खिलाफ और सिविल सर्विसेज ऐप्टिट्यूड टेस्ट्स (सी-सैट) खत्म करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
उधर, सूत्रों के मुताबिक संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूचित किया कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह के साथ बैठक कर छात्रों के आंदोलन से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की है। सिंह ने प्रधानमंत्री को उन संभावित कदमों के बारे में बताया जो मुद्दे को सुलझाने के लिए उठाये जा सकते हैं। छात्र संघ लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव और साथ ही परीक्षा के कार्यक्रम को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, सरकार ने छात्रों से प्रदर्शन रोकने का अनुरोध किया है। अगले महीने होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के लिए यूपीएससी द्वारा प्रवेश पत्र जारी करने के चलते बीते बृहस्पतिवार रात से प्रदर्शन तेज हो गया। ग्रामीण इलाकों से आने वालों छात्रों को प्रतियोगिता का समान स्तर मुहैया करने के लिए सीसैट के पैटर्न में बदलाव की छात्रों की मांग पर सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति विचार कर रही है।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह छात्रों की मांग के मद्देनजर यूपीएससी से प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित करने का अनुरोध पहले ही कर चुके हैं। वहीं, प्रदर्शन करने वाले यूपीएससी अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि वर्तमान प्रारूप उन लोगों के साथ भेदभाव करता है जो अंग्रेजी भाषा में दक्ष नहीं हैं।
जिक्र योग्य है कि सिविल सेवा परीक्षा प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार के रूप में तीन चरणों में होती है, जिसके जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) सहित अन्य सेवाओं के लिए उम्मीदवार चुने जाते हैं।

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