दिल्ली हाईकोर्ट ने कायम की मिसाल
नई
दिल्ली: आपराधिक मामलों में अक्सर न्याय की बातें सरकार व देश के विभिन्न
हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जाती है लेकिन हकीकत यह है कि आपराधिक
मामलों में न्याय मंदिर की चौखट के चक्कर काटते-काटते लोगों के वर्षो बीत
जाते हैं, मगर उन्हें समय पर न्याय नहीं मिल पाता। जानकारी के अनुसार ऐसे
में दिल्ली हाईकोर्ट ने लोगों को न्याय दिलाने के लिए हत्या जैसे एक संगीन
अपराध में नेत्रहीन दंपती द्वारा दायर याचिका का निपटारा महज तीन तारीखों
में कर देशभर की अदालतों के लिए त्वरित न्याय की एक बेहतरीन मिसाल कायम की
है।
बताया जा रहा है कि 16 मार्च, 2011 को उनके पड़ोसी नेत्रहीन मनोज व उसकी पत्नी लीलावती के खिलाफ सरला की मां मुन्नी देवी की हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले में तीस हजारी कोर्ट ने सरला की गवाही को अहम मानते हुए उक्त दंपति को उम्रकैद की सजा दी थी। नेत्रहीन दंपति ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। नेत्रहीन दंपती ने अपने अधिवक्ता सुमित वर्मा के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में निचली अदालत के निर्णय को चुनौती देते हुए 27 मई, 2014 को अपील दायर की। इस अपील को हाईकोर्ट ने 29 मई को सुनवाई के लिए स्वीकार किया और पुलिस को नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने हत्या के मामले में निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पा चुके नेत्रहीन दंपती को राहत प्रदान करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा रद कर दी है। खंडपीठ ने हत्या के मामले में आरोपी लीलावती को बरी कर दिया, जबकि उसके पति मनोज को गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी माना है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले में चश्मदीद गवाह की विश्वसनीयता संदेह के दायरे में है। इस मामले में नेत्रहीन दंपती के पास अपनी पड़ोसन मुन्नी देवी की हत्या की कोई वजह नहीं थी। जो भी कुछ हुआ, अचानक से हुए झगड़े का परिणाम था। इस झगड़े में नेत्रहीन व्यक्ति के हाथ में चाकू आ गया और उसने पड़ोसन महिला पर वार कर दिए। नेत्रहीन होने से उसे नहीं पता था कि उसके द्वारा किए गए वार कहां पर जाकर लगे। उसके द्वारा किया गया एक वार गर्दन पर भी हुआ और महिला की जान चली गई।
बताया जा रहा है कि 16 मार्च, 2011 को उनके पड़ोसी नेत्रहीन मनोज व उसकी पत्नी लीलावती के खिलाफ सरला की मां मुन्नी देवी की हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले में तीस हजारी कोर्ट ने सरला की गवाही को अहम मानते हुए उक्त दंपति को उम्रकैद की सजा दी थी। नेत्रहीन दंपति ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। नेत्रहीन दंपती ने अपने अधिवक्ता सुमित वर्मा के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में निचली अदालत के निर्णय को चुनौती देते हुए 27 मई, 2014 को अपील दायर की। इस अपील को हाईकोर्ट ने 29 मई को सुनवाई के लिए स्वीकार किया और पुलिस को नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ ने हत्या के मामले में निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पा चुके नेत्रहीन दंपती को राहत प्रदान करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा रद कर दी है। खंडपीठ ने हत्या के मामले में आरोपी लीलावती को बरी कर दिया, जबकि उसके पति मनोज को गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी माना है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले में चश्मदीद गवाह की विश्वसनीयता संदेह के दायरे में है। इस मामले में नेत्रहीन दंपती के पास अपनी पड़ोसन मुन्नी देवी की हत्या की कोई वजह नहीं थी। जो भी कुछ हुआ, अचानक से हुए झगड़े का परिणाम था। इस झगड़े में नेत्रहीन व्यक्ति के हाथ में चाकू आ गया और उसने पड़ोसन महिला पर वार कर दिए। नेत्रहीन होने से उसे नहीं पता था कि उसके द्वारा किए गए वार कहां पर जाकर लगे। उसके द्वारा किया गया एक वार गर्दन पर भी हुआ और महिला की जान चली गई।

No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com