वार्न और कुक बने दोस्त, बात करके मतभेद दूर किए
नई दिल्ली। जेम्स एंडरसन की आईसीसी से शिकायत किए जाने से बौखलाई इंग्लैंड टीम ने जडेजा को भी मामले में आरोपी बना दिया है। धक्का मुक्की से शुरू हुए विवाद को इंग्लैंड ने प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। इंग्लिश कप्तान एलेस्टर कुक अपने गेंदबाज जेम्स एंडरसन के बचाव में पूरी तरह कूद गए हैं।
यहां तक कि आईसीसी से एंडरसन की शिकायत को मैच से पहले भारतीय रणनीति का हिस्सा करार दिया है। आखिर क्यों विवाद खड़ा कर रहे हैं कुक। क्या उनका मकसद लगातार हार की वजह से हो रही आलोचना से लोगों का ध्यान भटकाना तो नहीं है।
कुक भारतीय कप्तान धोनी और उनके साथियों को झूठा बता रहे हैं। अपने स्टार गेंदबाज़ का बचाव करने के लिए मैदान पर उतरे कुक का ये रवैया उन्हें फिर से विवादों के घेरे में ले आया है। वैसे भी कुक और विवादों का एक लंबा इतिहास रहा है।
हाल ही में श्रीलंका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ के दौरान अपने उदासीन कप्तानी के चलते वो ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वार्न की आलोचना का शिकार बने थे। कुक को वार्न की आलोचना इतनी खटकी कि उन्होंने वार्न पर निजी खुंदक होने का आरोप तक मढ़ दिया।
इतना ही नहीं कुक की कप्तानी के दौर में ही उनके सबसे बड़े स्टार खिलाड़ी केविन पीटरसन का टेस्ट करियर ख़त्म कर दिया गया। कुक इस बात को लेकर भी विवादों में घिरे थे कि वो पीटरसन की शख़्सियत से घबराते थे और इसलिए हर तरह के झंझट से बचने के लिए उन्होंने पीटरसन का करियर ही ख़त्म करवा डाला।
वैसे भी कुक का आलोचना से परेशान होने का पुराना इतिहास रहा है। अपने करियर के शुरुआती दौर में कुक वन-डे क्रिकेट में धीमी गति से रन बनाते थे जिसके चलते इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन ने उन्हें डॉन्की यानी गधा कहा था। इस मुहावरे से तिलमिलाए कुक ने पलटकर जवाब दिया था कि देखिए एक गधा ही दूसरे गधे को पहचान सकता है।
कुक की मंशा बातों ही बातों में एथर्टन के ख़राब वनडे रिकॉर्ड की तरफ ध्यान खींचने की थी। बहरहाल, कुक जानते हैं कि अगर भारत के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज़ हारते हैं तो उनकी कप्तानी निश्चित तौर पर जाएगी।
पिछली एशेज सीरीज में 5-0 से सफाया और उसके बाद श्रीलंका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज हारने के बाद कुक पर दबाव काफी बढ़ गया है। आलम ये है कि 92-93 के बाद ये पहला मौका है जब इंग्लैंड की टीम को इतने दिनों से जीत नसीब नहीं हुई है।
ऐसे में चौतरफा आलोचना से बचने के लिए कुक ने एक और पासा फेंका है। टीम और मैनेजमेंट का विश्वास खो चुके कुक की योजना साफ है। हर हथकंडा अपनाकर किसी भी तरह से विरोधी टीम को परेशान करें। अगर जीत मिली तो ठीक नहीं तो सहानुभूति के सहारे ही शायद कुछ दिन और कप्तानी बच जाए।
एंडरसन और जडेजा के बीच हुए विवाद को लेकर अंग्रेजी अखबारों ने भी प्रतिक्रिया जाहिर की है-
टेलीग्राफ ने लिखा है कि जब तक इस मामले में नस्लभेदी टिप्पणी जैसी कोई बात सामने नहीं आती। भारतीय टीम प्रबंधन को इस मामले को इतना तूल नहीं देना चाहिए। यहां अगर वो एंडरसन पर बैन लगवाना चाहते हैं तो ये अलग बात है।
द टाइम्स ने इस मामले पर लिखा है कि यभारत की ओर से लगाया गया ये आरोप दोनों टीमों की पुरानी प्रतिद्वंदता के कारण है। खासकर भारत कि पिछले कुछ दौरों पर उनका अनुभव इंग्लैंड में अच्छा नहीं रहा है। डेली मेल में लिखा है कि भारत इस घटना के जरिए एंडरसन को बैन करने की योजना बना रहा है, जिसके एवज में वो रवींद्र जडेजा को बलि का बकरा बना रहे हैं।
मिरर ने इस घटना के लिए धोनी को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा है कि धोनी इस पूरे मामले के पीछे रहे हैं। और इस आरोप के कारण भी वही हैं। अब दबाव एंडरसन पर होगा कि वो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए मैदान पर उतरें।
यहां तक कि आईसीसी से एंडरसन की शिकायत को मैच से पहले भारतीय रणनीति का हिस्सा करार दिया है। आखिर क्यों विवाद खड़ा कर रहे हैं कुक। क्या उनका मकसद लगातार हार की वजह से हो रही आलोचना से लोगों का ध्यान भटकाना तो नहीं है।
कुक भारतीय कप्तान धोनी और उनके साथियों को झूठा बता रहे हैं। अपने स्टार गेंदबाज़ का बचाव करने के लिए मैदान पर उतरे कुक का ये रवैया उन्हें फिर से विवादों के घेरे में ले आया है। वैसे भी कुक और विवादों का एक लंबा इतिहास रहा है।
हाल ही में श्रीलंका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ के दौरान अपने उदासीन कप्तानी के चलते वो ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वार्न की आलोचना का शिकार बने थे। कुक को वार्न की आलोचना इतनी खटकी कि उन्होंने वार्न पर निजी खुंदक होने का आरोप तक मढ़ दिया।
इतना ही नहीं कुक की कप्तानी के दौर में ही उनके सबसे बड़े स्टार खिलाड़ी केविन पीटरसन का टेस्ट करियर ख़त्म कर दिया गया। कुक इस बात को लेकर भी विवादों में घिरे थे कि वो पीटरसन की शख़्सियत से घबराते थे और इसलिए हर तरह के झंझट से बचने के लिए उन्होंने पीटरसन का करियर ही ख़त्म करवा डाला।
वैसे भी कुक का आलोचना से परेशान होने का पुराना इतिहास रहा है। अपने करियर के शुरुआती दौर में कुक वन-डे क्रिकेट में धीमी गति से रन बनाते थे जिसके चलते इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन ने उन्हें डॉन्की यानी गधा कहा था। इस मुहावरे से तिलमिलाए कुक ने पलटकर जवाब दिया था कि देखिए एक गधा ही दूसरे गधे को पहचान सकता है।
कुक की मंशा बातों ही बातों में एथर्टन के ख़राब वनडे रिकॉर्ड की तरफ ध्यान खींचने की थी। बहरहाल, कुक जानते हैं कि अगर भारत के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज़ हारते हैं तो उनकी कप्तानी निश्चित तौर पर जाएगी।
पिछली एशेज सीरीज में 5-0 से सफाया और उसके बाद श्रीलंका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज हारने के बाद कुक पर दबाव काफी बढ़ गया है। आलम ये है कि 92-93 के बाद ये पहला मौका है जब इंग्लैंड की टीम को इतने दिनों से जीत नसीब नहीं हुई है।
ऐसे में चौतरफा आलोचना से बचने के लिए कुक ने एक और पासा फेंका है। टीम और मैनेजमेंट का विश्वास खो चुके कुक की योजना साफ है। हर हथकंडा अपनाकर किसी भी तरह से विरोधी टीम को परेशान करें। अगर जीत मिली तो ठीक नहीं तो सहानुभूति के सहारे ही शायद कुछ दिन और कप्तानी बच जाए।
एंडरसन और जडेजा के बीच हुए विवाद को लेकर अंग्रेजी अखबारों ने भी प्रतिक्रिया जाहिर की है-
टेलीग्राफ ने लिखा है कि जब तक इस मामले में नस्लभेदी टिप्पणी जैसी कोई बात सामने नहीं आती। भारतीय टीम प्रबंधन को इस मामले को इतना तूल नहीं देना चाहिए। यहां अगर वो एंडरसन पर बैन लगवाना चाहते हैं तो ये अलग बात है।
द टाइम्स ने इस मामले पर लिखा है कि यभारत की ओर से लगाया गया ये आरोप दोनों टीमों की पुरानी प्रतिद्वंदता के कारण है। खासकर भारत कि पिछले कुछ दौरों पर उनका अनुभव इंग्लैंड में अच्छा नहीं रहा है। डेली मेल में लिखा है कि भारत इस घटना के जरिए एंडरसन को बैन करने की योजना बना रहा है, जिसके एवज में वो रवींद्र जडेजा को बलि का बकरा बना रहे हैं।
मिरर ने इस घटना के लिए धोनी को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा है कि धोनी इस पूरे मामले के पीछे रहे हैं। और इस आरोप के कारण भी वही हैं। अब दबाव एंडरसन पर होगा कि वो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए मैदान पर उतरें।

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