टोलनाका विवाद में TI सस्पेंड
भोपाल। मप्र की विधानसभा में एक बार फिर एक टीआई को सस्पेंड कर दिया गया। मामला चार महीने पहले एक टोल नाके पर कांग्रेसी विधायक के साथ हुए विवाद का है। इस विवाद में आरोपी टीआई ने विधायक की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। गृहमंत्री ने टोल अधिकारी के खिलाफ एफआईआर के आदेश भी दिए हैं परंतु टोल निरस्त करने की कार्रवाई नहीं की गई।
विधानसभा में मंगलवार को कुक्षी विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल की आंखों से आंसू निकल आए। अपने साथ 20 मार्च 2014 को हुई एक घटना को बताते उनका गला भर आया। रुंधे हुए स्वर में उन्होंने बताया कि जब वे लेबड़ रोड से मानपुर होते हुए जा रहे थे तो दुर्जनपुरा टोल नाके पर टोल वसूलने को लेकर विवाद हुआ।
उनके एमएलए के रूप में परिचय दिए जाने के बाद भी उनसे वसूली करने की कोशिश की गई। यही नहीं उनके साथ टोल कर्मचारियों ने मारपीट भी की। बघेल ने कहा कि उनके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल तक किया गया। मगर टोल नाके में हुई इस घटना के पुलिस ने भी उनकी एफआईआर पर कार्रवाई में लापरवाही बरती। न तो जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और न ही टोल नाके के अधिकारी के नामों को एफआईआर में शामिल किया गया।
यह वाकया सुनकर सदन के अधिकांश विधायक एकस्वर में बोलने लगे। जीतू पटवारी ने बघेल के साथ हुई घटना पर अफसोस जताया। उन्होंने इसे टोल नाके की ज्यादती बताते हुए टोल वसूली के लिए उसका टेंडर निरस्त करने की मांग की। साथ ही पुलिस की लापरवाही के लिए टीआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
विधानसभा में मंगलवार को कुक्षी विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल की आंखों से आंसू निकल आए। अपने साथ 20 मार्च 2014 को हुई एक घटना को बताते उनका गला भर आया। रुंधे हुए स्वर में उन्होंने बताया कि जब वे लेबड़ रोड से मानपुर होते हुए जा रहे थे तो दुर्जनपुरा टोल नाके पर टोल वसूलने को लेकर विवाद हुआ।
उनके एमएलए के रूप में परिचय दिए जाने के बाद भी उनसे वसूली करने की कोशिश की गई। यही नहीं उनके साथ टोल कर्मचारियों ने मारपीट भी की। बघेल ने कहा कि उनके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल तक किया गया। मगर टोल नाके में हुई इस घटना के पुलिस ने भी उनकी एफआईआर पर कार्रवाई में लापरवाही बरती। न तो जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और न ही टोल नाके के अधिकारी के नामों को एफआईआर में शामिल किया गया।
यह वाकया सुनकर सदन के अधिकांश विधायक एकस्वर में बोलने लगे। जीतू पटवारी ने बघेल के साथ हुई घटना पर अफसोस जताया। उन्होंने इसे टोल नाके की ज्यादती बताते हुए टोल वसूली के लिए उसका टेंडर निरस्त करने की मांग की। साथ ही पुलिस की लापरवाही के लिए टीआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

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