रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करेंगे भारत, जापान
टोक्यो : भारत और जापान ने आज रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग का ‘उन्नयन’ करने व उसे ‘मजबूत’ करने का फैसला किया है। दोनों देशों ने अपने अधिकारियों से कहा है कि वे सैन्य उपकरण के मामले में सहयोग को बढ़ाने के लिए बातचीत शुरू करें।
इसके अलावा जापान के यूएस-2 एम्फिबियन (जमीन और समुद्र पर उतरने वहां से उड़ने में सक्षम) विमान की भारत को बिक्री के तौरतरीके तय करने की बातचीत में तेजी लाने पर भी सहमति हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान के प्रधानमंत्री शिन्जो आबे के साथ शिखर स्तर की वार्ता के बाद रक्षा सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया गया। वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपनी रणनीतिक भागीदारी में भारत व जापान के बीच रक्षा संबंधों के महत्व को और पुन:पुष्ट किया है। और उन्होंने इसका उन्नयन व इसे मजबूत करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी की पांच दिन की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग व आदान प्रदान के करार पर दस्तखत किए हैं।
मोदी ने आबे के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, हम रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देना चाहते हैं। इसमें रक्षा प्रौद्योगिकी व उपकरण क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है। शांति व स्थिरता तथा समुद्री सुरक्षा में साझा हितों के मद्देनजर हम यह करना चाहते हैं। इसके अलावा हमने आधुनिक प्रौद्योगिकी, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, लोगों की आवाजाही व शिक्षा क्षेत्र में आदान प्रदान को भी बढ़ाने का फैसला किया है।
भारत-जापान ने द्विपक्षीय समुद्री अ5यास नियमित आधार पर किए जाने के महत्व पर जोर दिया। इसके अलावा भारत-अमेरिका मालाबार श्रृंखला के अ5यास में जापान की भागीदारी को जारी रखने पर भी बल दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की जापान की नीति में हाल के घटनाक्रमों का स्वागत किया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने उम्मीद जताई कि इससे रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग का नया युग शुरू होगा। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व सहयोग की परियोजनाओं की विशाल संभावना है।
भारत व जापान ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दोनों देशों के बीच कार्यस्तर का विचार विमर्श शुरू करें। इसके जरिये रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाया जाए। दोनों पक्षों ने यूएस-2 एम्फिबियन विमान व उसकी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त कार्यसमूह पर विचार विमर्श को भी तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया।
भारत व जापान ने मना है कि समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र में उनके व्यापक साझा हित हैं। दोनों देशों ने इस दिशा में एक-दूसरे के साथ और समान सोच वाले भागीदारों के साथ काम करने का फैसला किया है, जिससे इन क्षेत्रों की अखंडता को कायम रखा जा सके।
बयान में कहा गया है, दोनों देशों ने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और ओवरफ्लाइट, नागर विमानन सुरक्षा, बिना बाधा के कानूनी व्यापार और विवादों का अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से निपटान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। इसके अलावा दोनों पक्षों ने भारत व जापानी तटरक्षक संगठनों के बीच मौजूदा वार्ता और व संयुक्त अभ्यास का स्वागत किया है। रक्षा संबंधों को मजबूती देने के लिए मोदी व आबे ने सालाना शिखर सम्मेलन का सिलसिला जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा दोनों ने क्षेत्रीय व बहुपक्षीय बैठकों के दौरान भी अलग से मुलाकातों को यथा संभव आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में मंत्रिस्तरीय व कैबिनेट स्तरीय बातचीत की व्यवस्था को सघन और संपुष्ट करने का भी फैसला किया है। इस संबंध में विशेषरूप से विदेश मंत्रियों, रक्षा मंत्रियों व वित्त, अर्थव्यवस्था, व्यापार व उर्जा क्षेत्र के मंत्रियों के बीच संपर्क बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस बारे में फैसला किया गया है कि विदेश मंत्रियों के बीच रणनीतिक वार्ता व रक्षा मंत्रियों के बीच अगले दौर की बैठक इसी साल बाद में आयोजित की जाएंगी।
दोनों नेताओं ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच वार्ताओं को काफी महत्व दिया है। यह बातचीत इसी साल जापान में राष्ट्रीय सुरक्षा सचिवालय की स्थापना के बाद शुरू हुई है। यह वार्ता सुरक्षा से जुड़े समस्त पहलुओं पर पारस्परिक समझ पैदा करने और सहयोग के विकास का महत्पूर्ण जरिया है।
इसके अलावा दोनों ने 2 जमा 2 की वार्ता के महत्व को भी रेखांकित किया है। इस तरह की वार्ता में विदेश व रक्षा सचिव शामिल रहते हैं। बढ़ती रणनीतिक भागीदारी के लिए इस तरह की वार्ता को काफी महत्व दिया गया है। प्रधानमंत्री की जापान यात्रा का आज तीसरा दिन है।
इसके अलावा जापान के यूएस-2 एम्फिबियन (जमीन और समुद्र पर उतरने वहां से उड़ने में सक्षम) विमान की भारत को बिक्री के तौरतरीके तय करने की बातचीत में तेजी लाने पर भी सहमति हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान के प्रधानमंत्री शिन्जो आबे के साथ शिखर स्तर की वार्ता के बाद रक्षा सहयोग को मजबूत करने का फैसला किया गया। वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपनी रणनीतिक भागीदारी में भारत व जापान के बीच रक्षा संबंधों के महत्व को और पुन:पुष्ट किया है। और उन्होंने इसका उन्नयन व इसे मजबूत करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी की पांच दिन की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग व आदान प्रदान के करार पर दस्तखत किए हैं।
मोदी ने आबे के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, हम रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देना चाहते हैं। इसमें रक्षा प्रौद्योगिकी व उपकरण क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है। शांति व स्थिरता तथा समुद्री सुरक्षा में साझा हितों के मद्देनजर हम यह करना चाहते हैं। इसके अलावा हमने आधुनिक प्रौद्योगिकी, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, लोगों की आवाजाही व शिक्षा क्षेत्र में आदान प्रदान को भी बढ़ाने का फैसला किया है।
भारत-जापान ने द्विपक्षीय समुद्री अ5यास नियमित आधार पर किए जाने के महत्व पर जोर दिया। इसके अलावा भारत-अमेरिका मालाबार श्रृंखला के अ5यास में जापान की भागीदारी को जारी रखने पर भी बल दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की जापान की नीति में हाल के घटनाक्रमों का स्वागत किया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने उम्मीद जताई कि इससे रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग का नया युग शुरू होगा। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व सहयोग की परियोजनाओं की विशाल संभावना है।
भारत व जापान ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दोनों देशों के बीच कार्यस्तर का विचार विमर्श शुरू करें। इसके जरिये रक्षा उपकरण व प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाया जाए। दोनों पक्षों ने यूएस-2 एम्फिबियन विमान व उसकी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त कार्यसमूह पर विचार विमर्श को भी तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया।
भारत व जापान ने मना है कि समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र में उनके व्यापक साझा हित हैं। दोनों देशों ने इस दिशा में एक-दूसरे के साथ और समान सोच वाले भागीदारों के साथ काम करने का फैसला किया है, जिससे इन क्षेत्रों की अखंडता को कायम रखा जा सके।
बयान में कहा गया है, दोनों देशों ने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और ओवरफ्लाइट, नागर विमानन सुरक्षा, बिना बाधा के कानूनी व्यापार और विवादों का अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से निपटान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। इसके अलावा दोनों पक्षों ने भारत व जापानी तटरक्षक संगठनों के बीच मौजूदा वार्ता और व संयुक्त अभ्यास का स्वागत किया है। रक्षा संबंधों को मजबूती देने के लिए मोदी व आबे ने सालाना शिखर सम्मेलन का सिलसिला जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा दोनों ने क्षेत्रीय व बहुपक्षीय बैठकों के दौरान भी अलग से मुलाकातों को यथा संभव आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में मंत्रिस्तरीय व कैबिनेट स्तरीय बातचीत की व्यवस्था को सघन और संपुष्ट करने का भी फैसला किया है। इस संबंध में विशेषरूप से विदेश मंत्रियों, रक्षा मंत्रियों व वित्त, अर्थव्यवस्था, व्यापार व उर्जा क्षेत्र के मंत्रियों के बीच संपर्क बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस बारे में फैसला किया गया है कि विदेश मंत्रियों के बीच रणनीतिक वार्ता व रक्षा मंत्रियों के बीच अगले दौर की बैठक इसी साल बाद में आयोजित की जाएंगी।
दोनों नेताओं ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच वार्ताओं को काफी महत्व दिया है। यह बातचीत इसी साल जापान में राष्ट्रीय सुरक्षा सचिवालय की स्थापना के बाद शुरू हुई है। यह वार्ता सुरक्षा से जुड़े समस्त पहलुओं पर पारस्परिक समझ पैदा करने और सहयोग के विकास का महत्पूर्ण जरिया है।
इसके अलावा दोनों ने 2 जमा 2 की वार्ता के महत्व को भी रेखांकित किया है। इस तरह की वार्ता में विदेश व रक्षा सचिव शामिल रहते हैं। बढ़ती रणनीतिक भागीदारी के लिए इस तरह की वार्ता को काफी महत्व दिया गया है। प्रधानमंत्री की जापान यात्रा का आज तीसरा दिन है।

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