भाजपा के महत्वपूर्ण मुस्लिम चेहरे नकवी की 15 साल बाद वापसी
नई दिल्ली: भाजपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिने जाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री रहने के 15 साल बाद आज फिर से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में लौटे हैं। दो बार राज्यसभा की सदस्यता हासिल कर चुके 57 वर्षीय नकवी भाजपा के उपाध्यक्षों में से एक हैं और लंबे समय से पार्टी के प्रवक्ता रहे हैं।
भाजपा ने अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिमों के संबंध में पार्टी के दृष्टिकोण की व्याख्या करने में नकवी की सेवाआें का सहारा लिया है। संसद की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे नकवी उच्च सदन में पार्टी के मुख्य वक्ता भी रहे हैं। इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में भाजपा के चुनावी प्रबंध में शामिल रहे नकवी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भी धुआंधार प्रचार किया था।
कानून के छात्र रहे नकवी ने 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर (राज नारायण) के टिकट पर इलाहाबाद पश्चिम से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ा था और उसके बाद 1989 में अयोध्या से निर्दलीय के रूप में किस्मत आजमायी। वह 1998 में भाजपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से चुने गए और उन्हें वाजपेयी कैबिनेट में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्हें संसदीय मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। उनकी धर्मपत्नी सीमा हिंदू हैं।
नकवी अपने छात्र जीवन से ही सामाजिक , राजनीतिक गतिविधियों और छात्र आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। उन्हें 1975 में आपातकाल के दौरान 17 साल की उम्र में आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार कर नैनी केंद्रीय कारागार में रखा गया था। नकवी छात्र नेता रहे हैं और उन्होंने जेपी आंदोलन में भी भाग लिया था। नकवी एक अच्छे लेखक भी हैं और उन्होंने तीन किताबें ‘‘स्याह’’,(1991), ‘‘दंगा’’ (1998) और ‘‘वैशाली’’ (2007) लिखी हैं।
भाजपा ने अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिमों के संबंध में पार्टी के दृष्टिकोण की व्याख्या करने में नकवी की सेवाआें का सहारा लिया है। संसद की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे नकवी उच्च सदन में पार्टी के मुख्य वक्ता भी रहे हैं। इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में भाजपा के चुनावी प्रबंध में शामिल रहे नकवी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भी धुआंधार प्रचार किया था।
कानून के छात्र रहे नकवी ने 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर (राज नारायण) के टिकट पर इलाहाबाद पश्चिम से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ा था और उसके बाद 1989 में अयोध्या से निर्दलीय के रूप में किस्मत आजमायी। वह 1998 में भाजपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से चुने गए और उन्हें वाजपेयी कैबिनेट में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्हें संसदीय मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। उनकी धर्मपत्नी सीमा हिंदू हैं।
नकवी अपने छात्र जीवन से ही सामाजिक , राजनीतिक गतिविधियों और छात्र आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। उन्हें 1975 में आपातकाल के दौरान 17 साल की उम्र में आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार कर नैनी केंद्रीय कारागार में रखा गया था। नकवी छात्र नेता रहे हैं और उन्होंने जेपी आंदोलन में भी भाग लिया था। नकवी एक अच्छे लेखक भी हैं और उन्होंने तीन किताबें ‘‘स्याह’’,(1991), ‘‘दंगा’’ (1998) और ‘‘वैशाली’’ (2007) लिखी हैं।

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