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संत रामपाल के खिलाफ नया वारंट जारी

चंडीगढ़: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले में बाबा संत रामपाल के खिलाफ नया गैर जमानती वारंट जारी किया और वर्ष 2006 के हत्या के एक मामले में उनकी जमानत रद्द कर दी। अदालत ने हरियाणा सरकार की यह दलील भी ठुकरा दी कि संत रामपाल बीमार हैं और उनकी गिरफ्तारी कानून व्यवस्था के लिए समस्या पैदा कर सकती है।

अदालत ने कहा कि संत रामपल को गिरफ्तार करने में राज्य सरकार की इच्छा में कमी है और उन्हें पेश करने के लिए ईमानदारी से प्रयास नहीं किए गए। अदालत ने हरियाणा के महानिदेशक (डीजीपी) और गृह सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि रामपाल 17 नवंबर या उससे पहले व्यक्तिगत रूप से पेश हों।

न्यायमूर्ति एम जयपाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि अगर रामपाल उसके सामने पेश होने में फिर नाकाम रहते हैं तो एेसी स्थिति में पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उनके सामने पेश होना पड़ेगा। पीठ ने हिसार जिला प्रशासन द्वारा रामपाल के स्वास्थ्य की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि मैडिकल बोर्ड ‘‘अवैध’’ है और संत रामपाल के स्वास्थ्य पर हरियाणा के डीजीपी की ‘‘स्थिति रिपोर्ट’’ ‘‘स्वीकार्य नहीं’’ है।

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार की यह दलील कि संत रामपाल को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया में हिंसा हो सकती है, ‘‘असंगत’’ है।  इससे पहले, सरकारी वकील ने पीठ से कहा था कि रामपाल को अदालत में नहीं लाया जा सका क्योंकि हिसार जिले के बरवाला स्थित उनके आश्रम के सामने गिरफ्तारी के विरोध में महिलाएं और बच्चे बैठे हैं और अधिकारी किसी तरह की हिंसा को टालना चाहते हैं।

उच्च न्यायालय ने वर्ष 2006 के हत्या के एक मामले में रामपाल को मिली जमानत रद्द कर दी और इस मामले से जुड़ी सभी फाइलें मंगाई। हत्या से जुड़े मामले के संबंध में वर्ष 2008 में अदालत द्वारा रामपाल को जमानत दी गई थी। अदालत ने कहा कि रामपाल को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह बंकर में बैठे हैं और कानून उन्हें नहीं पकड़ पाएगा।

पीठ ने कहा, ‘‘उन्हें अदालत के सामने पेश होना पड़ेगा।’’ रामपाल पर हिसार सत्र अदालत में लंबित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक कार्रवाई में हस्तक्षेप का आरोप है। उनके समर्थकों ने 15 जुलाई को हिसार की जिला अदालत परिसर के अंदर तक मार्च किया था और अदालती कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास किया था।

उच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेकर रामपाल तथा हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। हाजिर नहीं होने पर अदालत ने पिछले सप्ताह रामपाल के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था और हरियाणा सरकार से रामपाल तथा उनके सहयोगी राम कुमार ढाका को उसके सामने आज पेश करने का निर्देश दिया था। संत रामपाल को हाजिर नहीं किया जा सका लेकिन उनके सहयोगी राम कुमार ढाका को गिरफ्तार करके यहां अदालत में पेश किया गया।

अदालत ने ढाका से संबंधित सीजेएम अदालत से याचिका दायर करके जमानत मांगने को कहा और उन्हें हर सुनवाई पर उसके सामने हाजिर होने का निर्देश दिया। इससे पहले, हरियाणा सरकार के वकील ने कहा कि राज्य सरकार को चिंता है कि संत रामपाल को गिरफ्तार करने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अतिरिक्त बल और तर्कपूर्ण समय मांगा है ताकि रामपाल को अदालत के सामने लाने के लिए जरूरी प्रबंध किए जा सकें। रामपाल के वकील ने भी कहा कि उनके मुवक्किल की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था और इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार के पास है। इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने हालांकि दलील दी कि यह राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव द्वारा न्यायालय की अवमानना है।

अदालत ने इस मामले में मेडिकल बोर्ड के गठन पर आपत्ति जताई और इसे ‘‘तमाशा’’ तथा सरकार द्वारा रामपाल के साथ ‘‘सांठगांठ’’ का प्रयास करार दिया। इस बीच, हिसार के पास बरवाला स्थित आश्रम के कार्यकर्त्ता इमारत की ‘रक्षा’ कर रहे हैं और कई महिलाएं तथा बच्चे भी आश्रम के परिसर में बैठे हैं।

रामपाल के भाई पुरुषोत्तम दास ने कहा कि रामपाल बीमार हैं और ठीक होने पर वह अदालत में पेश होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम अदालत के आदेशों का सम्मान करते हैं। संत रामपाल बीमारी से उबरने के तुरंत बाद अदालत में पेश होंगे।’’ इस बीच, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि रामपाल के अनुयायियों को कानून हाथ में लेने से रोकने के लिए पंचकुला और चंडीगढ़ में भारी पुलिस तैनाती की गई है।

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