ज्योतिरादित्य सिंधिया पर सरकार ने कसा शिकंजा...
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज के बयान के बाद सिंधिया की मुसीबतें बढ़ सकती है। सिंधिया पर अवैध जमीन पर कब्जा करने के आरोप में सीएम के बयान के बाद आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) हरकत में आ गया है। विभाग द्वारा जमीन में गड़बड़ी की शिकायत के तीन साल बाद शिकायतकर्ता को बयान देने के लिये बुलाया गया है।
राजनीतिक बयानबाजी अब कानूनी कार्रवाई का रूप लेती नजर आ रही है। भाजपा के निशाने के पर आए सिंधिया अब जमीन फर्जीवाड़े के मामले में घिरते नजर आ रहे हैं। ईओडब्लू विभाग ने शिकायतकर्ता सुरेन्द्र श्रीवास्तव को बयान दर्ज करने के लिए 1 और 2 मई को बुलाया है। इस मामले में तीन साल बाद बयान दर्ज होंगे। वहीं, ईओडब्लू एसपी का कहना है कि उन्होंने बीते तीन सालों में जमीनों की जानकारी के लिए कलेकअर को 25 से ज्यादा पत्र लिखो थे। लेकिन उनमें से किसी का जवाब आजतक नहीं प्राप्त हुआ है। आपको बतादें इस मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ सुरेन्द्र श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति ने शिकासयत दर्ज करवाई थी।
ये है शिकायत का कारण
महलगांव में 2014 में सिंधिया से सर्वे नं. 916 में 15000 स्कावायर फीट जमीन पत्नी सीमा श्रीवास्तव के नाम से खरीदी थी। जिसकी रजिस्ट्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, माधवी राजे, चित्रान्गदा ने की थी। बाद में इसे काट कर 9800 स्कावयर फीट कर दिया गया, जिसके कारण शिकायत की गयी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कलेक्टरों ने दबाव डाला कि शिकायत वापस लो नहीं तो इसे सरकारी घोषित कर देंगे। फिलहाल मामला कलेक्टर कोर्ट की निगरानी में है। इसके चलते सुरेन्द्र ने 2014 में ईओडब्लू में भी शिकायत की थी।
यी है मामला
1— महलगांव का सर्वे नम्बर 1212 पूरा बेच दिया गया जो लगभग 0.146 हेक्टेयर है। वहीं, इस जमीन का मालिकाना हक किस व्यक्ति का है इस बात को भी छुपाया गया। कभी ये बात रूपी तरह है साफ नहीं की गई। जब भी इस मामले में पूछताछ की गई तो जमीन को कभी ज्योतिरादित्य तो कभी पद्मा राजे तो कभी कमलाराजे ट्रस्ट का बताया गया। जबकि जमीन आज भी सरकारी जमीन के रुप में दर्ज है।
2- दूसरे मामले में महाराणा प्रताप गृहनिर्माण सोसायटी महलगांव सरकारी नहर और नाले के रुप में दर्ज है। इस सोसायटी को किसी भी रजिस्ट्री में कोई भी सर्वे नम्बर दर्ज नहीं है।
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