जिले को सूखाग्रस्त घोषित करें सरकार : तरुणेंद्र
रीवा/जवा (राहुल तिवारी)
अवर्षा के चलते जिले में सूखे की भयावह स्थिति निर्मित हो रही है। वर्षा नहीं होने से जलस्रोत सूख रहे हैं फसलें तबाह हो रही है इससे किसान चिंतित हैं। वहीं जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए किसानों ने बैठक करना शुरू कर दिए हैं। शनिवार को किसान कांग्रेस नेता तरुणेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने कई जगह बैठक लिए। किसानों को न सिर्फ रबी सीजन बल्कि खरीफ के सीजन में ग्रामीण क्षेत्रों के जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता था। इस अवर्षा के चलते वर्षाकाल में ही जलाशय सूख गए हैं। ऐसे में अब किसान भयावह सूखा पड़ने की बात कहकर चिंतित हैं। जिले के त्योंथर, जवा व डभौरा क्षेत्र में आने वाले सैकड़ो गाँवो में इन दिनों भयावह सूखे की स्थित उत्पन्न हो गई है अगर ऐसा ही रहा तो भूखे मरने की नौबत आ जायेगी।
वर्षों बाद सूखे जलाशय
ग्रामीणों किसानो ने बताया इन दिनों समस्त किसान परेशान है । उन्होंने बताया कि नल,तालाबो का पानी सूखने लगा है।जवा तराई क्षेत्र के लगभग दो सौ गांव के किसान पानी को लेकर चिंतित हैं।
सूखे की मांग को लेकर होगा आन्दोलन
अवर्षा के चलते सूखी फसलें और सीजन में बोवनी न होने की स्थिति को देखते हुए अब जिले में आंदोलन प्रदर्शन भी शुरू होने वाला है। शनिवार को हुई बैठक में किसानों ने जिले को न सिर्फ सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की मांग की है बल्कि किसानों से जुड़ी हुई अन्य समस्याओं को भी शासन-प्रशासन की पटल पर रखा है। इसी तरह कांग्रेस पार्टी जवा तहसील में कांग्रेस नेता तरुणेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में आंदोलन करके सरकार को जगाने की कोशिश करेंगे। वहीं जिले के जवा क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों के ग्रामीण किसान विद्युत कटौती के विरोध में आवाज उठाई।
जवा,बबंधर,किरहाई,पथरौड़ा जनकहाई सहित अन्य गांवों के पहुंचे किसानों ने कहा कि एक तरफ सूखे की मार से किसान पस्त है तो वहीं बिजली कटौती से परेशान है और खेतों में धान की जो भी फसल है उसमें पानी देने के लिए विद्युत नहीं मिल पा रही है।
ये हैं मांगें
बैठक के दौरान मांग की गई है कि जिले को पूर्णता सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। खाद और बीज में मिलने वाली छूट पुनः बहाल की जाए। सभी कृषि उपकरण और विद्युत में सरकार किसानों को छूट का प्रावधान रखे। किसानों को कर्ज नहीं सरकार अनुदान दें। बिजली का बिल माफ किया जाए। सहायता राशि प्रति एकड़ 20 हजार रुपए के हिसाब से दिया जाए और मुआवजा राशि तत्काल किसानों को वितरित कराई जाए। सहकारी समिति के किसानों को दिया गया कर्ज माफ किया जाए। प्रदेश में कृषि नीति लागू कर कृषि को उद्योग का दर्जा दिया जाए और किसान को क्रेडिट कार्ड का कर्ज माफ किए जाने की मांग बैठक के दौरान किसानों ने की है और सभी किसानों ने कहा है कि इन मांगों को लेकर भव्य आंदोलन किया जायेगा।


No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com