धड़ल्ले से चल रहा सट्टा कारोबार पुलिस प्रशासन मौन
धड़ल्ले से चल रहा सट्टा कारोबार पुलिस प्रशासन मौन
अनूपपुर / राजेन्द्रग्राम /
नगर में इन दिनों सट्टे का अवैध कारोबार जोर शोर से चल रहा है। एक
रुपए को अस्सी रुपया बनाने के चक्कर में खासकर युवा वर्ग अधिक बर्बाद हो रहे हैं। सट्टे के
इस खेल को बढ़ावा देने सटोरिया ग्राहकों को मुफ्त में स्कीम देखने
सट्टे नंबर वाले चार्ट उपलब्ध करा रहे हैं। इसका गुणा भाग कर ग्राहक सट्टे की
चपेट में बुरी तरह से फंस कर पैसा इस अवैध कारोबार में गंवा रहे है।
सटोरियों की इतना हौसला बुलन्द है कि क्षेत्रीय पत्रकारों को ही खुलेआम धमकी
दी जा रही है आज करीब 4बजे
के आस पास अशोक
गुप्ता को खुले आम जो करना है करलो आगे इसका अंजाम भुगतने पड़ेगें। नगर के तमाम पान के गुमटियों में,
बस स्टैंड, चौक, बस स्टैंड, हाइवे पर बाजार, सब्जी मार्केट और चौक चौराहे में स्थित कई जनरल
स्टोर्स, नाई व छोटे छोटे
दुकानों में सट्टे
की पर्ची कटवाने वालों की भीड़ देखी जा सकती है। सटोरियों के चक्रव्यूह में लोग इस
कदर फंस चुके हैं की इससे उबर नहींं पा रहे हैं। नगर में एक दो नही बल्कि चार पांच आंका लंबे
समय से सट्टा संचालित करवा रहे हैं। पुलिस और सटोरियों की मिलीभगत से
यह अवैध कारोबार नगर सहित आस पास के अंचल में पूरी तरह से फल फूल रहा है।
सटोरियों ने भी गांव व नगर में अपना-अपना क्षेत्र बांटा हुआ है। एक
दूसरे के क्षेत्र में कोई दखल नहीं देता है।
पुलिस से सांठगांठ के चलते ये अवैध कारोबार को बाकायदा लाइसेंसी कारोबार के रूप में खुले आम नगर में संचालित किया जा रहा है। पुलिस और सटोरिया की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ऊपर अधिकारियों को दिखाने ये सटोरिया अपने गुर्गों के नाम हर महीने एक-एक प्रकरण बनवा देते हैं। ऊपर बैठे अफसरों को लगता है पुलिस कार्रवाई कर रही है। जबकि वास्तव में ये सांठगांठ का एक पहलू होता है। सवाल ये है कि जब पुलिस हर महीने सटोरियों के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो फिर उनसे पूछताछ कर सटोरियों तक क्यों नहीं पहुंच पाती
पुलिस से सांठगांठ के चलते ये अवैध कारोबार को बाकायदा लाइसेंसी कारोबार के रूप में खुले आम नगर में संचालित किया जा रहा है। पुलिस और सटोरिया की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ऊपर अधिकारियों को दिखाने ये सटोरिया अपने गुर्गों के नाम हर महीने एक-एक प्रकरण बनवा देते हैं। ऊपर बैठे अफसरों को लगता है पुलिस कार्रवाई कर रही है। जबकि वास्तव में ये सांठगांठ का एक पहलू होता है। सवाल ये है कि जब पुलिस हर महीने सटोरियों के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो फिर उनसे पूछताछ कर सटोरियों तक क्यों नहीं पहुंच पाती

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