लोकायुक्त की नियुक्ति में सरकार ने अपनाया गलत तरीका : पूर्व लोकायुक्त
भोपाल। मप्र लोकायुक्त पद पर जस्टिस नरेश गुप्ता की नियुक्ति को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। उप लोकायुक्त और मौजूदा कार्यवाहक लोकायुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे जस्टिस यूसी माहेश्वरी से जस्टिस गुप्ता हाईकोर्ट जज की वरिष्ठता क्रम में 6 वर्ष जूनियर हैं। इस पर सहमति देकर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह घिर गए, वहीं अब मध्यप्रदेश के पूर्व लोकायुक्त फैजानुद्दीन ने भी तीखे वार किये हैं।
पूर्व लोकायुक्त फैजानुद्दीन ने कहा मेरी तो रुह कंपकपा गयी कि इतने लोगो ने लोकायुक्त की नियुक्ति पर आंखे कैसे बंद कर ली। सरकार इतनी ढीट कैसे हो गयी। वही विपक्ष द्वारा नियुक्ति पर सहमति देने पर भी हमला बोलते हुए कहा है ऐसे विपक्ष का होना न होना बराबर है। लोकायुक्त की नियुक्ति में सरकार ने गलत तरीका अपनाया है। लोकायुक्त का ईलेक्शन होता है,सलेक्शन नही। सरकार ने एक नाम भेजकर सलेक्शन किया। सरकार इस संगठन को जिन्दा रखना नही चाहती। उन्होंने सेक्शन तीन का हवाला देते हुए कहा सरकार नाम भेजती है और चीफ जस्टिस व नेता प्रतिपक्ष सहमति देते हैं। जबकि सरकार ने एक ही नाम भेजा।
फैजानुद्दीन ने कहा लोकायुक्त रहते मैने उपलोकायुक्त के लिये एक नाम भेजा था तब सरकार ने उसे वापस लौटा दिया था और पैनल मांगा था। लोगों को वो मिसाल भी नही दिखी जिसमें उ.प्र. में एक साल लोकायुक्त पद खाली रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने ही पैनल में से लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था।
पूर्व लोकायुक्त फैजानुद्दीन ने कहा मेरी तो रुह कंपकपा गयी कि इतने लोगो ने लोकायुक्त की नियुक्ति पर आंखे कैसे बंद कर ली। सरकार इतनी ढीट कैसे हो गयी। वही विपक्ष द्वारा नियुक्ति पर सहमति देने पर भी हमला बोलते हुए कहा है ऐसे विपक्ष का होना न होना बराबर है। लोकायुक्त की नियुक्ति में सरकार ने गलत तरीका अपनाया है। लोकायुक्त का ईलेक्शन होता है,सलेक्शन नही। सरकार ने एक नाम भेजकर सलेक्शन किया। सरकार इस संगठन को जिन्दा रखना नही चाहती। उन्होंने सेक्शन तीन का हवाला देते हुए कहा सरकार नाम भेजती है और चीफ जस्टिस व नेता प्रतिपक्ष सहमति देते हैं। जबकि सरकार ने एक ही नाम भेजा।
फैजानुद्दीन ने कहा लोकायुक्त रहते मैने उपलोकायुक्त के लिये एक नाम भेजा था तब सरकार ने उसे वापस लौटा दिया था और पैनल मांगा था। लोगों को वो मिसाल भी नही दिखी जिसमें उ.प्र. में एक साल लोकायुक्त पद खाली रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने ही पैनल में से लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था।
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