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आॅर्थोपेडिक सर्जन डॉ. नीमा को पद्मश्री अवार्ड दिए जाने की सिफारिश

इंदौर। शहर के प्रसिद्ध आॅर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रमोद पी. नीमा को हेल्थ एवं सोशल सेक्टर में दिए गए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस साल का पद्मश्री अवार्ड दिए जाने की सिफारिश विभिन्न सामाजिक संगठनों ने की है। डॉ. नीमा वर्ष 1991 से इंदौर के जवाहर मार्ग पर यूनिक हॉस्पिटल एवं अन्नपूर्णा रोड पर यूनिक सुपर स्पेशियालिटी सेंटर का संचालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि सभी प्रकार की आॅर्थोपेडिक डिसीसेज के टोटल मैनेजमेंट के लिए डॉ. नीमा को श्रेष्ठ आॅर्थोपेडिक सर्जन माना जाता है। वे अभी तक 2500 से ज्यादा हिप एवं नी ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक कर चुके हैं। डॉ. नीमा सामाजिक क्षेत्र में वर्ष 1995 से काफी सक्रिय हैं और वे सैकड़ों की संख्या में दिव्यांग बच्चों की पोलियो करेक्टिव सर्जरी कर चुके हैं। इसके अलावा डॉ. नीमा ग्रामीण क्षेत्रों में कैम्प लगाकर 5000 से ज्यादा नि:शुल्क करेक्टिव सर्जरी के आॅपरेशन सफलतापूर्वक कर चुके हैं। उन्हें 1997 में रॉयल कॉलेज आॅफ सुंदरलैंड, इंग्लैंड से तथा 2010 में यूरोपीयन सर्जिकल इंस्टीस्ट्यूट, हैम्बर्ग, जर्मनी से फैलोशिप हासिल कर चुके हैं। साथ ही डॉ. नीमा पूरी दुनिया के दो तिहाई हिस्से का भ्रमण कर चुके हैं।


पूरा जीवन समर्पित किया ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों, दिव्यांग बच्चों को


मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे डॉ. प्रमोद नीमा ने आॅर्थोपेडिक सर्जन बनते ही अपना पूरा जीवन ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, असहाय एवं आॅर्थोपेडिकली हैंडीकेप्ड बच्चों को समर्पित कर दिया। उन्होंने हजारों बच्चों के जीवन का उद्धार करने का अभियान शुरू कर अपने जीवन का लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही उन्होंने एक विजन के साथ सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल एवं डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित किया ताकि वे मानवता की सेवा करने के साथ-साथ समाज के गरीब तबके के लोगों तक चिकित्सा सेवाएं वाजिब दामों पर मुहैया करा सकें। अपने सपनों को पूरा करने के लिए वे इंग्लैंड और जर्मनी भी अनुभव हासिल करने गए। 


कॅरियर के शुरुआती दिनों में पोलियो पीड़ित बच्चों का इलाज किया


अपने कॅरियर के शुरुआती दिनों में डॉ. नीमा ने इंदौर जिले के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पोलियो पीड़ित बच्चों का इलाज शुरू किया। इसके बाद उन्होंने समाज के प्रति समर्पण, प्रतिबद्धता और जुनून का एक आदर्श उदाहरण पेश किया। अपने इसी जुनून के तहत वे पिछले 25 वर्षों में ग्रामीण इलाकों में 250 से ज्यादा शिविर लगा चुके हैं और इन शिविरों के माध्यम से 40 हजार से ज्यादा रोगी लाभान्वित हो चुके हैं। डॉ. नीमा ने 5000 से ज्यादा विकलांग बच्चों का आॅपरेशन कर उनको जीवन की खुशियां दे चुके हैं। इसके अलावा वे 7000 बैशाखियां दिव्यांग बच्चों को दे चुके हैं ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें। यही नहीं उन्होंने अपने हॉस्पिटल में 50 बिस्तरों वाला चिल्ड्रन आॅर्थोपेडिक वार्ड भी स्थापित किया है जहां गरीब विकलांग बच्चों का निशुल्क इलाज किया जाता है। 


क्लासिकल सिंगर भी डॉ. नीमा


इंटलेक्चुअल, सोशल वर्कर, एकेडमिशियन होने के साथ डॉ. नीमा एक अच्छे क्लासिकल सिंगर भी हैं। उन्होंने पद्म भूषण गोकुलोत्सव महाराज से संगीत की शिक्षा हासिल की। वे अभी तक अपने स्वर स्पंदन संगठन के जरिए कई स्टेज प्रोग्राम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने क्लासिकल म्युजिक के उपयोग से कैसे दर्द कम किया जा सकता है इस पर थिसिस लिख रहे हैं। उन्होंने प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ, पद्मश्री, पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. एचके संचेती के सानिध्य में रहकर पुणे से आॅर्थोपेडिक्स में भारत के प्रतिष्ठित नेशनल बोर्ड आॅफ एकेडमी में डीएनबी की उच्च शिक्षा हासिल की है। वे मप्र से डीएनबी आॅर्थोपेडिक डिग्री हासिल करने वाले पहले सर्जन हैं। 


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