प्रशासन का भ्रष्टाचार पर दोहरा मापदंड : सचिवों में असंतोष
रीवा/जवा
प्रशासनिक नाक के नीचे पंचायतों में पहले व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार रूपी लूट के तूफान में जनता के खून पसीने की कमाई बही।सारा का सारा प्रशासनिक एवं तकनीकी अमला आंखों में पट्टी बाँध कर जेबे आगे सरपंच सचिवों को जनधन की लूट की छूट दी और जमकर ऊपरी कमाई नाम के सूत्र को व्यावहारिक स्वीकारोक्ति प्रदान करने का काम किया।जिसका परिणाम रहा की पंचायतों के खाते में धन तो खूब आया परंतु जमीन पर निर्माण नाम की चीज नहीं दिखी जो दिखी भी तो बारिश की चंद बूँदों में ही नेस्तनाबूत हो गई ।
पंचायतों में मची जनता के धन की लूट की समाचार पत्रों और जागरूक नागरिकों ने जमकर मुखालफत की शासन और प्रशासन को जगाने का प्रयास किया परंतु हिस्सेदार की भूमिका निभाने वाले अमले ने शिकायत कर्त्ताओं और पत्रकारों पर ही आरोप जड़ कर भ्रष्टाचार का समर्थन जारी रखा जिसका परिणाम रहा विद्यालय भवन शौंचालयों हाट बाजार पी सीसी सड़क निर्माण मेंड़ बंधान आदि अनेकों नाम धारी विकास कार्य जमीन से रिश्ता तोड़ कागजों में संपन्न होने लगे।
उक्त लूट के तूफान को रोंकने के प्रयास के लिए अनेकों सम्मानित नागरिक अपमानित हुए तो कइयों ने न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया।तब जाकर बीस से तीस प्रतिशत भ्रष्टाचार की राशि को हड़पे जाने के प्रकरण तैयार किए गए ।कार्य एजेंसी ग्राम पंचायतों के सरपंचों को तो पूरी दरिया दिली के साथ छोड़ दिया गया परंतु कुछ सचिवों को दागी बनाकर राशि वसूलने की नोटिस आदि का नाटक शुरू हुआ ।इस नाटक का पर्दा कब गिरेगा ? भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी जनता की गाढ़ी कमाई क्या वापिस हो पायेगी ? इसमें सामिल और इसके संरक्षकों को दण्ड मिलेगा या पुरस्कार ? इन सवालों के बीच दोषी ठहराये गये सचिवों में ही भेदभाव पूर्ण कार्रवाई पर असंतोष उभर रहा है।हमारे जवा संवाददाता राहुल तिवारी से नाम न छापने की सर्त पर चर्चा करते हुए एक सचिव ने बताया की राशि आहरण और कार्य निर्माण के मालिकों सरपंचों को छोड़ कर हम सचिवों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।जबकि हम सचिव तो केवल सरपंचों के लिपिक की हैसियत में थे।सरपंच लोग अनेकों तरह के दबाव बनाकर हमसे हस्ताक्षर करते थे आनाकानी करने पर सरपंचों के कहने पर अधिकारी भी हमारी न सुन हमारे ऊपर दण्ड रोपित करने को तैयार बैठे रहते थे।ऐसे में सरपंचों को छोड़कर सचिवों को दोषी ठहराना सचिवों से वसूली करना शासन प्रशासन का भेदभाव पूर्ण कार्रवाई है।ऐसी कार्रवाई जनता के सामने शासन प्रशासन के चेहरे की कलई खोल रहा है।
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