CM साहब कभी उड़नखटोला से नीचे उतरकर 'विन्ध्य' की सड़क देखिये
भोपाल/रीवा/सीधी/सतना : दिनभर उडऩखटोले में उडऩे वाले प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह ने जब आसमान से नीचे उतरकर अमेरिका की सड़कों पर सफर किया तो उन्हें मध्यप्रदेश की सड़कें यूएस से बेहतर नजर आईं। मुख्यमंत्री द्वारा विदेश की धरती में प्रदेश की सड़कों की प्रशंसा से विंध्य की जनता हतप्रभ है। बीते पांच साल से बदहाल सड़कों पर हिचकोले खा रही विंध्य की जनता ने मुख्यमंत्री के इस दावे को जुमला करार दिया है। लोगों का कहना है, रीवा संभाग से गुजरे राष्ट्रीय राजमार्ग और एक दर्जन स्टेट हाईवे की हालत गांवों को मुख्य मार्गों से जोडऩे वाली पगडंडियों से भी बदतर है। जब सीएम के दावों की सच्चाई जानने के लिए पत्रिका ने विंध्य से गुजरे नेशनल हाइवे की पड़ताल की तो सड़कों की हालत दावों से एकदम विपरीत नजर आई।
बदहाल हाइवे, गड्ढे तोड़ रहे कमर
सतना जिले से दो हाइवे एनएच-75 और 7 गुजरते हैं। स्टेट हाइवे के रूप में नागौद-सिंहपुर, सेमरिया-सुंदरा व सतना-मैहर-ब्योहारी मार्ग हैं। इनकी स्थिति पूरी तरह से बदहाल है। 60 फीसदी से ज्यादा हाइवे जर्जर हो चुके हैं। हाइवे के गड्ढे वाहन चालकों की कमर तोड़ रहे हैं। दो पहिया चालकों के लिए धूल के गुबार मुसीबत बनते नजर आते हैं। जिले के दोनों एनएच के निर्माण कार्य 2010 से चल रहे हैं। कंपनियों ने आधा-अधूरा काम कर छोड़ दिया है।
उधर, चार स्टेट हाइवे में से दो का निर्माण पूरा हो सका है। शेष दो का कार्य जारी है। ठेका कंपनियों की इस मनमानी से जिले में 900 करोड़ से ज्यादा का निवेश संकट में पड़ा है। निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने के बावजूद मॉनीटरिंग एजेंसी एमपीआरडीसी चुप्पी साधे रही। जब लागत दोगुनी हो गई तो कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। सतना-रीवा रोड के लिए ठेका कंपनी एमपी टॉपवर्थ को ब्लैकलिस्टेड किया गया। हाइवे के खस्ताहाल होने के कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
निर्माण कंपनियों के बीच विवाद में पिस रही जनता
रीवा जिले से तीन नेशनल हाइवे गुजरते हैं। एक का निर्माण पूरा हो चुका है। दो की स्थिति दयनीय है। निर्माण कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनियों के बीच हुए विवाद की वजह से निर्माण रुका हुआ है। अभी ऐसी स्थिति नहीं बन रही कि जल्द निर्माण शुरू हो सके। नेशनल हाइवे-27 में मनगवां से चाकघाट तक कई जगह सड़क बची ही नहीं है। गड्ढे में तब्दील हो चुकी है।
निर्माण कंपनी टॉपवर्थ का टेंडर निरस्त होने के बाद भू-तल परिवहन विभाग ने सड़क निर्माण के लिए फिर से टेंडर निकाले हैं। टेंडर स्वीकृति और अनुबंध की प्रक्रिया में लगभग चार से पांच माह का समय लगेगा। ऐसे में वर्ष 2018 में ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है। रीवा से रांची तक के नेशनल हाइवे में रीवा से बदवार पहाड़ तक 28 किलोमीटर की सड़क बनी है। एनएचआई ने टोल टैक्स की वसूली भी शुरू कर दी है। मोहनिया घाटी की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
हकीकत
1. मनगवां से चाकघाट एनएच 27
कार्य शुरू- वर्ष 2013
निर्माण रुका - मई 2015
सड़क की लम्बाई - 52 किमी
लागत - 410 करोड़
निर्माण सड़क पूरा- 28.01 किलोमीटर
निर्माण कंपनी - टापवर्थ प्राइवेट लिमिटेड
योजना - बीओटी
2. रीवा- सतना (बेला) एनएच 07
निर्माण कार्य प्रारंभ- 2013
निर्माण रुका- मई 2015
लंबाई - 48 किमी
लागत - 357 करोड़ रुपए
निर्माण पूरा- 17.01 किलोमीटर
योजना- बीओटी
निर्माण एजेंसी - टापवर्थ प्राइवेट लिमिटेड
3. रीवा से रांची एनएच 75
रीवा से सीधी तक निर्माण कार्य प्रांरभ - 2013
निर्माण लागत- 248 करोड़
रीवा जिले में निर्माण पूरा- 30.5 किलोमीटर
योजना - बीओटी
पांच करोड़ खर्च फिर भी गड्ढे
दोनों हाइवे का निर्माण अधूरा होने के कारण यातायात बाधित हो रहा था। इस पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एमपीआरडीसी ने पांच करोड़ की राशि खर्च कर बारिश के पहले गड्ढे भरे थे, लेकिन सड़क फिर गड्ढों में तब्दील हो हो गई है। ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण पहले जैसे हालत निर्मित होने की आशंका है।
कछुए की चाल चल रहा हाइवे का निर्माण कार्य
सिंगरौली-सीधी नेशनल हाइवे का निर्माण कार्य कछुए की चाल चल रहा है। 105 किमी लम्बी सड़क निर्माण का कार्य सितंबर 2015 तक पूरा होना था। मगर, बजट और लेटलतीफी के चलते नहीं हो सका। दरअसल, रांची-रीवा एनएच-75 सिंगरौली से होकर गुजरा है। सिंगरौली-सीधी के बीच फोरलेन निर्माण 105 किमी दूरी में किया जाना है। सितंबर 2013 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। लागत 870 करोड़ रुपए है। एमपीआरडीसी निर्माणकारी संस्था है। अब तक 134 किमी टू लेन के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। एमपीआरडीसी के डिवीजनल मैनेजर मनोज गुप्ता ने बताया कि दिसम्बर 2017 तक टू लेन निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बीच में बैंक से लोन पास न होने के चलते निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था।
नेता प्रतिपक्ष का अल्टीमेटम नहीं आया काम
सीधी से नेशनल हाइवे-75 और 39 गुजरे हैं। एनएच-75 पर जिले की सीमा से सांड़ा चुरहट तक करीब 13 किमी दूरी का निर्माण कार्य अधर में लटका है। इसमें टनल सहित सड़क का निर्माण कार्य शामिल है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। शेष मार्ग का निर्माण कार्य (जिसमें चुरहट सोन नदी का पुल भी शामिल है) करीब छह माह पहले ही दिलीप बिल्डकॉन द्वारा पूर्ण किया जा चुका है। चुरहट की खस्ताहाल सड़क को लेकर युकां लोकसभा अध्यक्ष एड.रंजना मिश्रा द्वारा अगस्त में आमरण अनशन किया गया था।
करीब चार दिन तक चले अनशन के बाद 22 अगस्त को चुरहट विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष मप्र विस अजय सिंह ने प्रशासन के आश्वासन पर एक माह का समय देते हुए अनशन तुड़वाया था। उस समय नेता प्रतिपक्ष ने भी प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था कि सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन द्वारा एक माह का समय मांगा गया है। हम 30 सितंबर तक का समय दे रहे हैं। यदि एक अक्टूबर से इस सड़क पर काम नहीं शुरू किया गया तो इसका जो अंजाम होगा उसे मैं भी नहीं रोक पाउंगा। अल्टीमेटम का समय पूरा हो चुका है फिर भी काम भी शुरू नहीं हो पाया है। उधर, एनएच-39 सीधी-सिंगरौली सड़क का निर्माण कार्य सात वर्ष में भी पूर्ण नहीं हो पाया है। यह मार्ग फोरलेन बनना है। इसमें सीधी जिले की सीमा तक यानि सीधी से बहरी तक टू-लेन सड़क का निर्माण कार्य आधा अधूरा किया गया है। इसके लिए 887 करोड़ का बजट मिला है।
तीन साल से बन रहा सतना-बमीठा मार्ग
पन्ना जिले से एक मात्र ग्वालियर-रीवा नेशनल हाइवे-75 निकला है। सतना से बमीठा तक का हाइवे बीते तीन साल से निर्माणाधीन है। कई निर्माण एजेंसियां बदले जाने से मार्ग का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। उक्त हाइवे के निर्माण का ठेका कोनकॉस्ट नामक कोलकाता की कंपनी को करीब 200 करोड़ में दिया गया है। पेटी कांटे्रक्ट पर कई कंपनियां काम कर रही हैं।
मूल ठेका कंपनी द्वारा पेटी कांट्रेक्ट पर काम करने वाली कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण काम में लेटलतीफी हो रही है। भुगतान देरी के कारण कई कंपनियां पूर्व में काम को बीच में छोड़कर भाग चुकी हैं। उक्त निर्माणाधीन मार्ग पर देवेंद्रनगर से पन्ना के बीच सड़क का काम अभी भी अटका हुआ है। इस करीब 25 किमी. के हिस्से में काम नहीं हो पाया है। इसके अलवा पूरे मार्ग पर 10 से 15 किमी के पेंच बचे हुए हैं। उन्हें भी जोड़ा जाना जरूरी है।
स्टेट हाइवे भी खराब
पन्ना से होकर गुजरने वाला पन्ना-कटनी स्टेट हाइवे पर कटनी से शाहनगर के बीच मार्ग की हालत बेहद खराब है। मार्ग खराब होने के कारण उक्त मार्ग में भी आए दिन हादसे हो रहे हैं। जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इधर हाइवे पर भैरोटेक घाटी में सड़क उखड़ी हुई है। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इसकी सुरक्षा दीवार भी नहीं बनी है। इस कारण यह हादसों की घाटी बन चुकी है।
बदहाल हाइवे, गड्ढे तोड़ रहे कमर
सतना जिले से दो हाइवे एनएच-75 और 7 गुजरते हैं। स्टेट हाइवे के रूप में नागौद-सिंहपुर, सेमरिया-सुंदरा व सतना-मैहर-ब्योहारी मार्ग हैं। इनकी स्थिति पूरी तरह से बदहाल है। 60 फीसदी से ज्यादा हाइवे जर्जर हो चुके हैं। हाइवे के गड्ढे वाहन चालकों की कमर तोड़ रहे हैं। दो पहिया चालकों के लिए धूल के गुबार मुसीबत बनते नजर आते हैं। जिले के दोनों एनएच के निर्माण कार्य 2010 से चल रहे हैं। कंपनियों ने आधा-अधूरा काम कर छोड़ दिया है।
उधर, चार स्टेट हाइवे में से दो का निर्माण पूरा हो सका है। शेष दो का कार्य जारी है। ठेका कंपनियों की इस मनमानी से जिले में 900 करोड़ से ज्यादा का निवेश संकट में पड़ा है। निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने के बावजूद मॉनीटरिंग एजेंसी एमपीआरडीसी चुप्पी साधे रही। जब लागत दोगुनी हो गई तो कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। सतना-रीवा रोड के लिए ठेका कंपनी एमपी टॉपवर्थ को ब्लैकलिस्टेड किया गया। हाइवे के खस्ताहाल होने के कारण जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
निर्माण कंपनियों के बीच विवाद में पिस रही जनता
रीवा जिले से तीन नेशनल हाइवे गुजरते हैं। एक का निर्माण पूरा हो चुका है। दो की स्थिति दयनीय है। निर्माण कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनियों के बीच हुए विवाद की वजह से निर्माण रुका हुआ है। अभी ऐसी स्थिति नहीं बन रही कि जल्द निर्माण शुरू हो सके। नेशनल हाइवे-27 में मनगवां से चाकघाट तक कई जगह सड़क बची ही नहीं है। गड्ढे में तब्दील हो चुकी है।
निर्माण कंपनी टॉपवर्थ का टेंडर निरस्त होने के बाद भू-तल परिवहन विभाग ने सड़क निर्माण के लिए फिर से टेंडर निकाले हैं। टेंडर स्वीकृति और अनुबंध की प्रक्रिया में लगभग चार से पांच माह का समय लगेगा। ऐसे में वर्ष 2018 में ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है। रीवा से रांची तक के नेशनल हाइवे में रीवा से बदवार पहाड़ तक 28 किलोमीटर की सड़क बनी है। एनएचआई ने टोल टैक्स की वसूली भी शुरू कर दी है। मोहनिया घाटी की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
हकीकत
1. मनगवां से चाकघाट एनएच 27
कार्य शुरू- वर्ष 2013
निर्माण रुका - मई 2015
सड़क की लम्बाई - 52 किमी
लागत - 410 करोड़
निर्माण सड़क पूरा- 28.01 किलोमीटर
निर्माण कंपनी - टापवर्थ प्राइवेट लिमिटेड
योजना - बीओटी
2. रीवा- सतना (बेला) एनएच 07
निर्माण कार्य प्रारंभ- 2013
निर्माण रुका- मई 2015
लंबाई - 48 किमी
लागत - 357 करोड़ रुपए
निर्माण पूरा- 17.01 किलोमीटर
योजना- बीओटी
निर्माण एजेंसी - टापवर्थ प्राइवेट लिमिटेड
3. रीवा से रांची एनएच 75
रीवा से सीधी तक निर्माण कार्य प्रांरभ - 2013
निर्माण लागत- 248 करोड़
रीवा जिले में निर्माण पूरा- 30.5 किलोमीटर
योजना - बीओटी
पांच करोड़ खर्च फिर भी गड्ढे
दोनों हाइवे का निर्माण अधूरा होने के कारण यातायात बाधित हो रहा था। इस पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एमपीआरडीसी ने पांच करोड़ की राशि खर्च कर बारिश के पहले गड्ढे भरे थे, लेकिन सड़क फिर गड्ढों में तब्दील हो हो गई है। ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण पहले जैसे हालत निर्मित होने की आशंका है।
कछुए की चाल चल रहा हाइवे का निर्माण कार्य
सिंगरौली-सीधी नेशनल हाइवे का निर्माण कार्य कछुए की चाल चल रहा है। 105 किमी लम्बी सड़क निर्माण का कार्य सितंबर 2015 तक पूरा होना था। मगर, बजट और लेटलतीफी के चलते नहीं हो सका। दरअसल, रांची-रीवा एनएच-75 सिंगरौली से होकर गुजरा है। सिंगरौली-सीधी के बीच फोरलेन निर्माण 105 किमी दूरी में किया जाना है। सितंबर 2013 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। लागत 870 करोड़ रुपए है। एमपीआरडीसी निर्माणकारी संस्था है। अब तक 134 किमी टू लेन के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। एमपीआरडीसी के डिवीजनल मैनेजर मनोज गुप्ता ने बताया कि दिसम्बर 2017 तक टू लेन निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बीच में बैंक से लोन पास न होने के चलते निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था।
नेता प्रतिपक्ष का अल्टीमेटम नहीं आया काम
सीधी से नेशनल हाइवे-75 और 39 गुजरे हैं। एनएच-75 पर जिले की सीमा से सांड़ा चुरहट तक करीब 13 किमी दूरी का निर्माण कार्य अधर में लटका है। इसमें टनल सहित सड़क का निर्माण कार्य शामिल है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। शेष मार्ग का निर्माण कार्य (जिसमें चुरहट सोन नदी का पुल भी शामिल है) करीब छह माह पहले ही दिलीप बिल्डकॉन द्वारा पूर्ण किया जा चुका है। चुरहट की खस्ताहाल सड़क को लेकर युकां लोकसभा अध्यक्ष एड.रंजना मिश्रा द्वारा अगस्त में आमरण अनशन किया गया था।
करीब चार दिन तक चले अनशन के बाद 22 अगस्त को चुरहट विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष मप्र विस अजय सिंह ने प्रशासन के आश्वासन पर एक माह का समय देते हुए अनशन तुड़वाया था। उस समय नेता प्रतिपक्ष ने भी प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था कि सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन द्वारा एक माह का समय मांगा गया है। हम 30 सितंबर तक का समय दे रहे हैं। यदि एक अक्टूबर से इस सड़क पर काम नहीं शुरू किया गया तो इसका जो अंजाम होगा उसे मैं भी नहीं रोक पाउंगा। अल्टीमेटम का समय पूरा हो चुका है फिर भी काम भी शुरू नहीं हो पाया है। उधर, एनएच-39 सीधी-सिंगरौली सड़क का निर्माण कार्य सात वर्ष में भी पूर्ण नहीं हो पाया है। यह मार्ग फोरलेन बनना है। इसमें सीधी जिले की सीमा तक यानि सीधी से बहरी तक टू-लेन सड़क का निर्माण कार्य आधा अधूरा किया गया है। इसके लिए 887 करोड़ का बजट मिला है।
तीन साल से बन रहा सतना-बमीठा मार्ग
पन्ना जिले से एक मात्र ग्वालियर-रीवा नेशनल हाइवे-75 निकला है। सतना से बमीठा तक का हाइवे बीते तीन साल से निर्माणाधीन है। कई निर्माण एजेंसियां बदले जाने से मार्ग का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। उक्त हाइवे के निर्माण का ठेका कोनकॉस्ट नामक कोलकाता की कंपनी को करीब 200 करोड़ में दिया गया है। पेटी कांटे्रक्ट पर कई कंपनियां काम कर रही हैं।
मूल ठेका कंपनी द्वारा पेटी कांट्रेक्ट पर काम करने वाली कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण काम में लेटलतीफी हो रही है। भुगतान देरी के कारण कई कंपनियां पूर्व में काम को बीच में छोड़कर भाग चुकी हैं। उक्त निर्माणाधीन मार्ग पर देवेंद्रनगर से पन्ना के बीच सड़क का काम अभी भी अटका हुआ है। इस करीब 25 किमी. के हिस्से में काम नहीं हो पाया है। इसके अलवा पूरे मार्ग पर 10 से 15 किमी के पेंच बचे हुए हैं। उन्हें भी जोड़ा जाना जरूरी है।
स्टेट हाइवे भी खराब
पन्ना से होकर गुजरने वाला पन्ना-कटनी स्टेट हाइवे पर कटनी से शाहनगर के बीच मार्ग की हालत बेहद खराब है। मार्ग खराब होने के कारण उक्त मार्ग में भी आए दिन हादसे हो रहे हैं। जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इधर हाइवे पर भैरोटेक घाटी में सड़क उखड़ी हुई है। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इसकी सुरक्षा दीवार भी नहीं बनी है। इस कारण यह हादसों की घाटी बन चुकी है।
सम्भार : www.rewariyasat.com
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