प्रदेश में पंचायत सचिवों को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, सेवा नियमों में होगा बदलाव
भोपाल : मध्यप्रदेश में अब पंचायत सचिव के परिजनों को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने सेवा भर्ती नियम में बदलाव की फाइल अनुमोदन कर विभाग को वापस भेज दी है। अनुकंपा नियुक्ति नियम एक अप्रैल 2017 से लागू होंगे।
सूत्रों के मुताबिक पंचायत सचिव संगठन ने चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव के पहले सतना में बड़ा प्रदर्शन करते हुए पंचायत सचिवों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग दोहराई थी। इसके बाद सरकार ने मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए पंचायत सचिवों को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में लाने का फैसला किया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए पंचायत सचिव सेवा भर्ती नियम में संशोधन की फाइल विभागीय मंत्री गोपाल भार्गव के पास भेजी थी, जिसे उन्होंने अनुमोदन कर वापस भेज दिया है। अब नियमों में संशोधन कर अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधान जोड़कर उसे लागू किया जाएगा।
2008 से लागू करें नियम, हम विरोध करेंगे: शर्मा
उधर, पंचायत सचिव संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने अनुकंपा नियुक्ति का लाभ एक अप्रैल 2017 से दिए जाने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जब विभाग हमारी नियुक्ति 2008 से मानकर वेतन तय कर रहा है। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति का लाभ भी उसी वक्त से दिया जाना चाहिए। यदि 2008 से लाभ नहीं दिया गया तो संगठन विरोध करेगा।
सूत्रों के मुताबिक पंचायत सचिव संगठन ने चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव के पहले सतना में बड़ा प्रदर्शन करते हुए पंचायत सचिवों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग दोहराई थी। इसके बाद सरकार ने मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए पंचायत सचिवों को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में लाने का फैसला किया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए पंचायत सचिव सेवा भर्ती नियम में संशोधन की फाइल विभागीय मंत्री गोपाल भार्गव के पास भेजी थी, जिसे उन्होंने अनुमोदन कर वापस भेज दिया है। अब नियमों में संशोधन कर अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधान जोड़कर उसे लागू किया जाएगा।
2008 से लागू करें नियम, हम विरोध करेंगे: शर्मा
उधर, पंचायत सचिव संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने अनुकंपा नियुक्ति का लाभ एक अप्रैल 2017 से दिए जाने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जब विभाग हमारी नियुक्ति 2008 से मानकर वेतन तय कर रहा है। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति का लाभ भी उसी वक्त से दिया जाना चाहिए। यदि 2008 से लाभ नहीं दिया गया तो संगठन विरोध करेगा।

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