शनि अमावस्या : ऐंती में मेला, शोभन योग में श्रद्धालुओं ने किए शनि महाराज के दर्शन
ग्वालियर : शनिश्चरीअमावस्या पर देश के दूर-दराज हिस्सों से शनिश्चरा मंदिर के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने रात को टार्च की रोशनी में ही मुंडन कराया और लंगर में प्रसादी लेकर दर्शन की लाइन में लग गए। शनिवार रात से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। यहां रातभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। रात एक बजे के बाद ग्राम ऐंती की ओर जाने वाले रास्ते पर वाहनों के साथ पैदल यात्रियों की भारी भीड़ लग गई।
शनिश्चरामंदिर में लोगों की भीड़ देखते हुए प्रशासन ने मंदिर परिसर में चार स्थानों पर तेल चढ़ाने की व्यवस्था की है। मंदिर के बाहरी हिस्से में दो ऐसे पात्र बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया तेल 50 मीटर के पाइप से होता हुआ शनिदेव की प्रतिमा का अभिषेक किया। इसके अलावा लाइनें के पास दो स्थानों पर शनि प्रतिमाएं भी लगाई गई हैं, उन पर चढ़ाया गया तेल पास ही बने कुंड में एकत्र हो रहा था। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई अन्य सामग्री कहीं पाइप लाइन को चोक कर दे, इसके लिए पात्रों में जाली की व्यवस्था की गई है, इससे सिर्फ तेल ही अंदर जा रहा था। मंदिर के अंदर या प्रतिमा के पास जाना प्रतिबंधित किया गया है। श्रद्धालुों ने बाहर से ही शनिदेव के दर्शन किए।
30 साल बाद बना शोभन योग
शनिश्चरीअमावस्या पर शोभन योग है, जो 30 साल बाद बन रहा है। इसके अलावा गजकेसरी योग और बुद्धादित्य योग के साथ-साथ कालसर्प दोष की भी निष्पत्ति हो रही है। इसलिए इस बार की शनिश्चरी अमावस्या खरीदारी के साथ-साथ पितृ दोष, शनि की ढैया या साढ़े साती की शांति के लिए विशेष शुभ है।
शनिश्चरामंदिर में लोगों की भीड़ देखते हुए प्रशासन ने मंदिर परिसर में चार स्थानों पर तेल चढ़ाने की व्यवस्था की है। मंदिर के बाहरी हिस्से में दो ऐसे पात्र बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया तेल 50 मीटर के पाइप से होता हुआ शनिदेव की प्रतिमा का अभिषेक किया। इसके अलावा लाइनें के पास दो स्थानों पर शनि प्रतिमाएं भी लगाई गई हैं, उन पर चढ़ाया गया तेल पास ही बने कुंड में एकत्र हो रहा था। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई अन्य सामग्री कहीं पाइप लाइन को चोक कर दे, इसके लिए पात्रों में जाली की व्यवस्था की गई है, इससे सिर्फ तेल ही अंदर जा रहा था। मंदिर के अंदर या प्रतिमा के पास जाना प्रतिबंधित किया गया है। श्रद्धालुों ने बाहर से ही शनिदेव के दर्शन किए।
30 साल बाद बना शोभन योग
शनिश्चरीअमावस्या पर शोभन योग है, जो 30 साल बाद बन रहा है। इसके अलावा गजकेसरी योग और बुद्धादित्य योग के साथ-साथ कालसर्प दोष की भी निष्पत्ति हो रही है। इसलिए इस बार की शनिश्चरी अमावस्या खरीदारी के साथ-साथ पितृ दोष, शनि की ढैया या साढ़े साती की शांति के लिए विशेष शुभ है।
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