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जंगल के अमले के संरक्षण में हो रहा अवैध उत्खनन कट रहे पेड़ - हो रहा लकड़ियों का व्यवसाय मामला सिरमौर रेंज का


जंगल का अमला बना जंगल का दुश्मन

राहुल तिवारी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ संवाददाता
रीवा (जवा) : वैसे तो वनों के संरक्षण संवर्धन के लिए वन विभाग का गठन शासन द्वारा किया गया था।सोच रही होगी की वनों की रक्षा करेंगे ।परंतु जब वन विभाग का अमला ही निजी लाभ के आगे वन विभाग के उद्देश्य को वलाए ताक पर रख कर वनों का दुश्मन बन जाय तो यह कहावत चरितार्थ होती है की -- जब बाड़ी खेत खाय ता कउन बचावै ।
इस कहावत को अमलीजामा पहना रहे सिरमौर रेंज के वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी ।लूक भनिगवां जनकहाई नीवा आदि कई गाँवों के आस पास जहाँ वन विभाग के अंतर्गत विंध्य की पहाड़ी भी आती है वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के लोभ का शिकार हो रहा है।उक्त वन्य क्षेत्र में निर्वाध रूप से कई पत्थर पटिया गिट्टी की खदाने संचालित हैं ।इतना ही नहीं विभागीय अमले के संरक्षण में सड़क ठेकेदारों द्वारा मिट्टी और मुरुम की खुदाई भारी मात्रा में की जा रही है।
अगर सूत्रों पर भरोसा करें तो सहायक रेंज अधिकारी के संरक्षण में केवल खदाने ही संचालित नही हो रही हैं वल्कि लकड़ी के लिए पेड़ भी काटे जा रहे हैं ।जिसका व्यवसाय मजदूरों द्वारा आधे पर किया जा रहा है।सूत्रों के अनुसार इसका प्रमाण सितलहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लगा सी सी टी वी कैमरा कैद करता रहता है।क्यों की विद्यालय परिसर में ही तीन बालिका छात्रावास संचालित हैं जिनकी अधीक्षिकायों द्वारा भोजन बनाने के लिए खरीदा जाता है।
अब सवाल उठता है की जब इतनी भारी मात्रा में अवैध व्यवसाय जारी है तो क्या केवल एक अधिकारी के संरक्षण में अथवा उक्त डिप्टी रेंजर की जिम्मेदारी में आला अधिकारियों द्वारा कराया जा रहा है ?

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