वरिष्ठ आरक्षकों को मिला विवेचना का अधिकार, डीजीपी ने जारी किया आदेश
सतना : विवेचना का अधिकार पाने अब प्रमोशन के बाद प्रधान आरक्षक बनने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विवेचकों की कमी को पूरा करने के लिए वरिष्ठ आरक्षकों को विवेचना का अधिकार दिया गया है। इस आशय का आदेश बुधवार को प्रदेश के डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने जारी किए हैं। उक्त आदेश प्रदेश के समस्त पुलिस अधीक्षकों और रेल पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है ताकि निर्देश का पालन त्वरित शुरू हो सके।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार डीजीपी श्री शुक्ला ने 6 दिसम्बर बुधवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि मप्र शासन विधि एवं विधायी कार्य विभाग के आदेश क्र./फा.क्र. 37(ई)5 /2004/1119/21-ब (दो) मप्र शासन दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 157 के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा विभाग के आदेश क्रमांक के अनुसार राज्य सरकार द्वारा ऐसे समस्त वरिष्ठ आरक्षकों को जो समयबद्ध वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं उन्हें उक्त धारा के प्रयोजन के लिए पुलिस अधिकारी घोषित किया गया है।
लिहाजा संदर्भित आदेश के परिपेक्ष्य में विवेचना अधिकारियों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए निर्देशित किया जाता है कि पुलिस विभाग के समस्त वरिष्ठ आरक्षक जो कि समयबद्ध वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं उन्हें विवेचना का अधिकार सौंपा जाए। जारी आदेश में प्रदेश के समस्त पुलिस अधीक्षक एवं रेल अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करें।
अपराधों के निपटारे में आएगी तेजी
पुलिस महकमे में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी है। इस बात से आला अफसरों से लेकर राज्य सरकार भी वाकिफ है। थानों में स्टाफ कम है विवेचकों की कमी है। विवेचकों को कमी के कारण थानो में दर्ज होने वाले अपराधों का निराकरण समय से नहीं हो पाता। लिहाजा थानों में अपराधों की पेंडेंसी बढ़ती जाती है परन्तु अब वरिष्ठ आरक्षकों को विवेचना का अधिकार मिल जाने से थानो में विवेचना अधिकारी की संख्या बढ़ जाएगी। विवेचक बढ़ेंगे तो अपराधों के निकाल में भी तेजी आएगी। महकमे के अफसर भी मानते हैं कि वरिष्ठ आरक्षकों को विवेचक बनाए जाने से छोटे अपराधों का निराकरण त्वरित हो सकेगा।
अभी मुंशी के पास था जिम्मा
पुलिस विभाग में अपराध की विवेचना का जिम्मा प्रधान आरक्षक (मुंशी) से शुरू होता है। अभी तक आरक्षकों को अपराध के अनुसंधान में लगाया जाता था। कानून व्यवस्था के लिए तैनात किया जाता था लेकिन आरक्षक के पद पर रहते हुए पुलिस कर्मियों को विवेचना का अधिकार नहीं था। प्रमोशन के उपरान्त ही प्रधान आरक्षक बनने पर ही विवेचना अधिकारी का दायित्व मिलता था परन्तु डीजीपी के नए आदेश के बाद वरिष्ठ आरक्षकों को अपराधों की विवेचना का दायित्व मिल गया है।
वरिष्ठ आरक्षकों को अपराधों की विवेचना करने का अधिकार सौंपने का आदेश मिला है। इस आदेश से थानों में विवेचकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। विवेचक बढ़ने से अपराधों के निराकरण में भी तेजी आएगी।
राजेश हिंगणकर, एसपी, सतना
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार डीजीपी श्री शुक्ला ने 6 दिसम्बर बुधवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि मप्र शासन विधि एवं विधायी कार्य विभाग के आदेश क्र./फा.क्र. 37(ई)5 /2004/1119/21-ब (दो) मप्र शासन दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 157 के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा विभाग के आदेश क्रमांक के अनुसार राज्य सरकार द्वारा ऐसे समस्त वरिष्ठ आरक्षकों को जो समयबद्ध वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं उन्हें उक्त धारा के प्रयोजन के लिए पुलिस अधिकारी घोषित किया गया है।
लिहाजा संदर्भित आदेश के परिपेक्ष्य में विवेचना अधिकारियों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए निर्देशित किया जाता है कि पुलिस विभाग के समस्त वरिष्ठ आरक्षक जो कि समयबद्ध वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं उन्हें विवेचना का अधिकार सौंपा जाए। जारी आदेश में प्रदेश के समस्त पुलिस अधीक्षक एवं रेल अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करें।
अपराधों के निपटारे में आएगी तेजी
पुलिस महकमे में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी है। इस बात से आला अफसरों से लेकर राज्य सरकार भी वाकिफ है। थानों में स्टाफ कम है विवेचकों की कमी है। विवेचकों को कमी के कारण थानो में दर्ज होने वाले अपराधों का निराकरण समय से नहीं हो पाता। लिहाजा थानों में अपराधों की पेंडेंसी बढ़ती जाती है परन्तु अब वरिष्ठ आरक्षकों को विवेचना का अधिकार मिल जाने से थानो में विवेचना अधिकारी की संख्या बढ़ जाएगी। विवेचक बढ़ेंगे तो अपराधों के निकाल में भी तेजी आएगी। महकमे के अफसर भी मानते हैं कि वरिष्ठ आरक्षकों को विवेचक बनाए जाने से छोटे अपराधों का निराकरण त्वरित हो सकेगा।
अभी मुंशी के पास था जिम्मा
पुलिस विभाग में अपराध की विवेचना का जिम्मा प्रधान आरक्षक (मुंशी) से शुरू होता है। अभी तक आरक्षकों को अपराध के अनुसंधान में लगाया जाता था। कानून व्यवस्था के लिए तैनात किया जाता था लेकिन आरक्षक के पद पर रहते हुए पुलिस कर्मियों को विवेचना का अधिकार नहीं था। प्रमोशन के उपरान्त ही प्रधान आरक्षक बनने पर ही विवेचना अधिकारी का दायित्व मिलता था परन्तु डीजीपी के नए आदेश के बाद वरिष्ठ आरक्षकों को अपराधों की विवेचना का दायित्व मिल गया है।
वरिष्ठ आरक्षकों को अपराधों की विवेचना करने का अधिकार सौंपने का आदेश मिला है। इस आदेश से थानों में विवेचकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। विवेचक बढ़ने से अपराधों के निराकरण में भी तेजी आएगी।
राजेश हिंगणकर, एसपी, सतना
सम्भार : starsamachar.com

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