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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना ने रचना को बनाया उद्यमी

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना ने रचना को बनाया उद्यमी


अनूपपुर / केन्द्र एवं राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बेटी बचाओ अभियान की नीति ने महिलाओं के निर्भरता के द्वार खोल दिए हैं। आज महिलाएं उन क्षेत्रों में उड़ान भरने लगी हैं, जिन क्षेत्रों में कभी पुरुषों का एकाधिकार होता था। अब महिलाएं चिकित्सक, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासक तो बन ही रही हैं। उद्यमिता के क्षेत्र में भी अपने झण्डे गाड़ दिए हैं। छोटे-छोटे कस्बो से उद्यमी बनकर महिलाएं आगे आ रही हैं। अनूपपुर जिले के कोतमा कस्बे की 30 वर्षीय श्रीमती रचना जैन ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना से सहयोग लेकर उद्यमी बनने का अपना सपना पूरा किया है। श्रीमती जैन का मायका मध्यप्रदेश के सागर में है। उनके मायके का परिवार उद्योग-धंधों से जुड़ा हुआ है। उनका विवाह भी अनूपपुर जिले के कोतमा क्षेत्र के व्यवसायी अभिषेक जैन के साथ संपन्न हुआ। यह परिवार भी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। डाॅ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से रसायन शास्त्र में एम.एससी. करने के बाद उनकी इच्छा शासकीय प्रशासनिक सेवा में जाने की थी। लगातार प्रयास करने के बाद जब मनमाफिक पद नहीं मिला, तो उन्होंने अपने अभिभावकों से अनुकरण प्राप्त कर स्वयं उद्यमी बनने की ठानी। पूरे परिवार ने उनका सहयोग किया। श्रीमती रचना जैन ने अपना उद्यम शुरु करने हेतु उद्योग विभाग में आवेदन किया। आपने उद्यम का चयन उनके भाई द्वारा सागर में पूर्व से किए जा रहे उद्यम के अनुरूप एवं पूर्व से प्राप्त अनुभव के आधार पर मशीन से दोना पत्तल, कागज के पत्तल तथा हाथ से दोना बनाने का काम शुरु किया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना से स्टेट बैंक आॅफ इंडिया कोतमा द्वारा उन्हें 25 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हुआ। जिससे उन्होंने शहडोल एवं दिल्ली से 10 लाख रुपए की मशीनें खरीदीं। इस ऋण में उद्योग विभाग द्वारा ऋण राशि की 35 प्रतिशत राशि 8.75 लाख रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया। इसके अतिरिक्त उद्यमी को बैंक ऋण की समय पर अदायगी पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी प्राप्त होगा। इसके साथ ही उद्यमी को उद्योग विभाग द्वारा 15 दिवस का प्रशिक्षण भी दिलाया गया। अब रचना जैन का उद्यमी संसार आगे बढ़ चला है। उनके द्वारा बनाई गई अरिहंत पेपर वक्र्स संस्था न केवल उनकी आय का साधन है, बल्कि 6 लोगों को रोजगार भी दिला रहा है। उनकी उद्यमी संस्था का मासिक टर्न ओव्हर 2 लाख रुपए है, जिससे उनको 30 हजार रुपए तक की मासिक बचत हो जाती है। अपनी आय में से 25 हजार रुपए प्रतिमाह बैंक ऋण अदायगी में खर्च करती हैं। अरिहंत पेपर वक्र्स में सामग्री निर्माण हेतु दिल्ली से कच्चा माल क्रय किया जाता है। तैयार माल को बेचने हेतु उन्होंने संभागीय मुख्यालय शहडोल, अनूपपुर, बिजुरी, कोतमा, मनेन्द्रगढ़, पेण्ड्रा(छ.ग.) में भी अपने दो-दो डीलर नियुक्त कर दिए हैं। व्यवसाय में लगातार वृद्धि हो रही है।

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