PCB को मिली शिकायत के बाद अवैध निर्माण हटाने पहुंची आर्मी, जवानों से टकराए लोग
जबलपुर : केंटोन्मेंट क्षेत्र करौंदी में अवैध निर्माण की शिकायत प्रेसिडेंट केंट बोर्ड (पीसीबी) तक पहुंचने के बाद आर्मी प्रशासन सख्त हो गया है। आज सुबह करौंदी पहुंचे सैन्य जवानों ने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। वहीं भवन निर्माण सामग्री को जप्त कर वाहन में लोड करने के दौरान सैन्य जवानों और क्षेत्रीय नागरिकों में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। जानकारी के मुताबिक केंट बोर्ड के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक-7 करौंदी में कुछ लोगों द्वारा अवैध तरीके से मकान का निर्माण किया जा रहा है, ऐसी शिकायत प्रेसिडेंट केंट बोर्ड ब्रिगेडियर अरुण सभरवाल तक पहुंची थी। जिसके बाद आर्मी प्रशासन ने शिकायत हकीकत जानने पहले केंट बोर्ड के अमले को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, वहीं आर्मी क्यूआरटी को करौंदी में लगातार गश्त करने कहा गया था। सेंट्रल आॅर्डिंनेस डिपो (सीओडी) के सुरक्षा अधिकारी के साथ पहुंचे सैन्य जवानों ने निर्माणाधीन भवन को तोड़ना शुरू कर दिया। जिसका विरोध करते हुए क्षेत्रीय लोग सैन्य अधिकारियों से भिड़ गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया।अतिक्रमण हटाने के दौरान कुछ बस्ती वाले एक दूसरे की शिकायत का आरोप लगाते हुए आपस में ही उलझ गए।
करौंदी की जमीन आरक्षित ए-1 लैंड
करौंदी की जमीन को लेकर असमंजस की स्थिति है, जिसके चलते आर्मी प्रशासन द्वारा जिला प्रशासन की मदद से भूमि का सीमांकन कराया जा रहा है। जिसके बाद करौंदी का जीएलआर तैयार होगा, वहीं क्षेत्रीय पार्षद राजीत यादव का कहना है कि कुछ लोग अपने जर्जर मकान की मरम्मत कर रहे थे न कि ओपन लैण्ड में निर्माण कराया जा रहा है।
वर्तमान में करौंदी की भूमि आर्मी के लिए आरक्षित ए-1 लैण्ड मानी जाती है। इसी कारण करौंदी वासियों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं। लिहाजा आर्मी प्रशासन का मानना है कि जब तक जीएलआर तैयार न हो जाए करौंदी में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता।
करौंदी की जमीन आरक्षित ए-1 लैंड
करौंदी की जमीन को लेकर असमंजस की स्थिति है, जिसके चलते आर्मी प्रशासन द्वारा जिला प्रशासन की मदद से भूमि का सीमांकन कराया जा रहा है। जिसके बाद करौंदी का जीएलआर तैयार होगा, वहीं क्षेत्रीय पार्षद राजीत यादव का कहना है कि कुछ लोग अपने जर्जर मकान की मरम्मत कर रहे थे न कि ओपन लैण्ड में निर्माण कराया जा रहा है।
वर्तमान में करौंदी की भूमि आर्मी के लिए आरक्षित ए-1 लैण्ड मानी जाती है। इसी कारण करौंदी वासियों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं। लिहाजा आर्मी प्रशासन का मानना है कि जब तक जीएलआर तैयार न हो जाए करौंदी में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता।

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