कुरजा भूमिगत कोयला खदान प्रभावित आदिवासी किसानों ने राष्ट्रपति से माॅगा इच्छा मृत्यु
मामला एस ई सी एल हसदेव क्षेत्र का,,,,,
कुरजा भूमिगत कोयला खदान प्रभावित आदिवासी किसानों ने राष्ट्रपति से माॅगा इच्छा मृत्यु
पूर्व विधायक जुगल किषोर गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली जाकर सौपा ज्ञापन
अनुपूर / बिजुरी / प्रदीप मिश्रा - 8770089979
भूमिगत कोयला खदान कुरजा उपक्षेत्र द्वारा चार गाॅव के किसानों की भूमि के नीचे कोयला उत्खनन कर उत्पादन लक्ष्य को पूरा कर लिया गया किन्तु किसानों के हितों पर जमकर कुठाराघात किया गया जिससे किसान तबाह व बर्बाद हो चले। उन्हे न नौकरी दी गई न क्षतिपूर्ति राशि मुआबजा। किसान पिछले 10 वर्षों से अपने हक की लडाई राज्य सरकार को अवगत कराकर कालरी प्रशासन से लड रहा है। जिसमेे सांकेतिक धरना प्रदर्शन, हडताल शामिल रहा है। किसान के अंादोलन पर हर बार जिला प्रशासन ने अपने स्तर से पहल कर धरना प्रदर्शन व हडताल को समझौते के तहत रोकने का काम किया पर किसानों को उनका हक कालरी प्रशासन से दिलाने में कामयाब नही रहा। यह सिलसिला लगातार चलता रहा किन्तु राहत न मिल सका। और बेबसी का एक ऐसा वातावरण बना कि उन्हे अपनी लडाई करो य मरो की दिखने लगी और वे अपनी लडाई को देश के राष्ट्रपति, व देश की सर्वोच्च न्यायिक सॅस्था माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली के पास लेकर जा पहुॅचे। जॅहा पर अपने लिए स्व हस्ताक्षरित शपथपत्र देकर भूमि के हक पर कालरी द्वारा डाका डालने का आरोप लगाया तथा अपने तबाही व बर्बादी का दोषी माना है तथा प्रदेश सरकार के प्रति असॅतोष जताते हुए कोल इॅण्डियाॅ लिमिटेड द्वारा उत्पादन के नाम पर खुलेआम किये जा रहे शेाषण प्रताडना बर्बादी से तॅग आकर अपने लिए इच्छा मृत्यु के अनुमति की माॅग कर बैठे हैं। प्रभावित किसान पूर्व विधायक जुगल किशोर गुप्ता के साथ दिल्ली जाकर एक ज्ञापन दिनाॅक 22 मार्च 2018 को भारत के राष्ट्रपति व सर्वोच्च सॅस्था उच्चतम न्यायालय दिल्ली सहित अन्य को सौंपा है तथा अपने बर्बादी व तबाही का जिम्मेदार कालरी को मानते हुए तथा सरकार व उनके आला अधिकारियों द्वारा कालरी के मनमाने पन पर कोई कार्यवाही न किये जाने से इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की माॅग की है।
चार गाॅव के किसानांेकी भूमि पर बरपा तबाही का कहर
एस ई सी एल हसदेव क्षेत्र के कुरजा भूमिगत खदान द्वारा अपने उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के लिए कुरजा, दलदल, पडरीपानी रेउन्दा,, के किसानों के भूमियों को अधिग्रहण करने की सूचना वर्ष 2006 में दी जाकर भूमि को अपने कब्जे में वषर््ा 2012 में ले लिया गया तथा डिप्लंेरिग कर कोयला का उत्खनन कर लिया गया। लगभग 314,780, हेक्टैयर भूमि के नीचे से पिछले 6 वर्षों में सी एम नामक मशीन लगाकर उत्पादन लक्ष्य पूरा कर लिया गया तथा भूमि का अधिगृहण करने की सूचना के बाद भूमि के बदले नौकरी व भूमि की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नही किया गया। लगभग 231 किसानों के भूमि जिसमें ज्यादातर आदिवासी किसान हैं की भूमियों पर कालरी प्रबॅघन द्वारा जबरन कोयला उत्खनन कार्य कर उत्पादन लक्ष्य को पूरा किया गया। कोल प्रबॅधन के कोयला उत्पादन लक्ष्य से प्रभावित किसान बर्बाद व तबाह हो चले हैं जिनका सुध लेना प्रशासन ने उचित नही समझा है।
आदिवासियों का हक छीन उन्हे जमीन से किया बेदखल
उल्लेखनीय है कि अधिगृहीत गाॅव आदिवासी बाहुल्य गाॅव हैं । चारों गाॅव की आवादी लगभग 5 से 7 हजार की है जिनके जीविका का प्रमुख साधन खेती रहा है। कुरजा उपक्षेत्र द्वारा उनकी सॅपूर्ण भूमि मकान से लेकर खेत खलिहान, तक के नीचे से कोयला उत्खनन कार्य किया गया है। घरों की दीवारे दरक गई हैं तथा पीने के पानी के सॅसाधन कुएॅ तालाब सूख गए हैं तथा जमीन जो फसल से लहलहाते थे बॅजर हो गई हैं। चार गाॅवेंा के किसानों के सामने आज एक बडा सॅकट कोयला उत्पादन लक्ष्य से परिवार सहित भूख से विलखने का आ गया है।
जिला पुर्नवास व पुर्नस्थापना समिति सवाल के घेरे में
जिला कलेक्टर अनूपपुर द्वारा कोयला धारक क्षेत्र अधिनियम 1957 के तहत किसाना केें अधिगृहित भूमि पर स्थित मकान कुॅआ, पेड इत्यादि परिसॅप्पत्तियों के मुआबजा निर्धारण हेतु एवॅ किसानों के रोजगार व मुआबजा प्रदाय किये जाने हेतु वर्ष 2014 में अनुविभागीय अधिकारी कोतमा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया जिसका कार्य किसानों के क्षतिग्रस्त भूमि व अन्य सॅपत्तियों का मौका मुआयना कर कालरी प्रषासन से मुआबजा व नौकरी दिलाना रहा हैं किन्तु उक्त समिति ने क्या किया जिससे किसानों को अब तक उनका अधिकार न मिल सका।
करते रहे आॅदोलन सोती रही सरकार
वर्ष 2012 कुरजा कालरी के लिए उत्पादन लक्ष्य के लिए एक स्वर्णिम साल लेकर आया वहीं स्थानीय रहवासियों के लिए काला काल बनकर। कोयला उत्पादन लक्ष्य से सधे कोल कॅपनी ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक बडे कॅपनी से डील कर बडे सी एम मशीन को कुरजा खदान के नीचे उतारा तथा बेतरतीब उत्खनन कर अपे लक्ष्य को 6 वर्षों में पूरा करने में लग गया। अपने भूमि के नीचे हलचल पा किसानों ने वर्ष 2012 से कालरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया किसान जिला प्रशासन को सूचना देकर साकेतिक धरना प्रदर्शन हडताल करते और जिला प्रशासन के नुमाॅइदे आकर समझौते की बात कर आदोलन को स्थगित करते और मामला कालरी के पाले में जाता गया तथा किसान ठगा का ठगा रह गया। अब तक सैंकडों धरना प्रदर्षन किसानों ने किया तथा अपनी बात को राज्य सरकार से लेकर जिला प्रषासन के समक्ष रखा पर परिणाम सार्थक न निकल सका मसलन किसान अब सरकार पर सवाल खडा कर अपने हक की लडाई को देश के सर्वोच्च सॅस्था के पास ले जाकर खडा हुआ है।

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