महिला दिवस पर 'आरुषि' पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन, बच्चों को गले लगा कर रो पड़ीं
भोपाल। मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बच्चों से खास लगाव है शपथ लेने के बाद ही वो सबसे पहले बच्चों से मिलने पहुंची थी। आज का दिन भी ख़ास था, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राज्यपाल राजधानी भोपाल स्तिथ आरुषि संस्थान पहुंची। जहां वो बच्चों से मिलकर भावुक हो गई और अपने आंसू नहीं रोक पाई।
आरुषि संस्थान पहुंचकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बच्चों से मुलाक़ात की | इस दौरान वो भावुक हो गई और संस्थान के बच्चों से मिलते समय राज्यपाल ने बच्चों को गले से लगाकर रो पड़ी। राज्यपाल ने संस्थान के बच्चों से गाना भी सुना। इस दौरान आईएएस मोहन राव भी मौजूद रहें। इस दुअरान आनंदीबेन ने गुलजार की पेंटिंग और उनके द्वारा दिये गए पियानो को देखा| राज्यपाल की मांग पर बच्चों ने गाना भी सुनाया। राज्यपाल ने आरुषि संस्था को ₹50000 का चेक दिया इस राशि से संस्था दृष्टिहीन बच्चों के लिए विशेष डिवाइस खरीदेगें। यहा पर सभी दृष्टिहीन बच्चे पढाई करते है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आरुषि की टीचर टीचर नहीं माताएं है। मैं सभी को सलाम करती हूं। मैं भी टीचर थी मैं जानती थी कि नार्मल बच्चों को संभालना कितना कठिन है। ऐसे में इन बच्चों को पढ़ाना और सिखाना बहुत कठिन काम है। मैं पिछले डेढ़ महीने से शहर में भ्रमण कर रही हूं, लेकिन जो आज खुशी मिली वह इसके पहले कभी नहीं मिली।आज बच्चों से मिलकर बहुत खुशी हुई है।
आरुषि संस्थान पहुंचकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बच्चों से मुलाक़ात की | इस दौरान वो भावुक हो गई और संस्थान के बच्चों से मिलते समय राज्यपाल ने बच्चों को गले से लगाकर रो पड़ी। राज्यपाल ने संस्थान के बच्चों से गाना भी सुना। इस दौरान आईएएस मोहन राव भी मौजूद रहें। इस दुअरान आनंदीबेन ने गुलजार की पेंटिंग और उनके द्वारा दिये गए पियानो को देखा| राज्यपाल की मांग पर बच्चों ने गाना भी सुनाया। राज्यपाल ने आरुषि संस्था को ₹50000 का चेक दिया इस राशि से संस्था दृष्टिहीन बच्चों के लिए विशेष डिवाइस खरीदेगें। यहा पर सभी दृष्टिहीन बच्चे पढाई करते है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आरुषि की टीचर टीचर नहीं माताएं है। मैं सभी को सलाम करती हूं। मैं भी टीचर थी मैं जानती थी कि नार्मल बच्चों को संभालना कितना कठिन है। ऐसे में इन बच्चों को पढ़ाना और सिखाना बहुत कठिन काम है। मैं पिछले डेढ़ महीने से शहर में भ्रमण कर रही हूं, लेकिन जो आज खुशी मिली वह इसके पहले कभी नहीं मिली।आज बच्चों से मिलकर बहुत खुशी हुई है।

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