भाजपा विधायक वेलसिंह भूरिया बोले- सरकार हमारी, जो चाहेंगे वही होगा...
इंदौर : लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराए या नहीं, इसे लेकर बुधवार शाम 4 बजे कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष में मप्र शासन की राज्य स्तरीय समिति की बैठक हुई। इसमें एक को छोड़कर सभी लोग एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में बोले। जनसंपर्क जल संसाधन व संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी में सरदारपुर से भाजपा के विधायक वेलसिंह भूरिया ने अपना पक्ष रखने के बजाय कहा कि सरकार हमारी है और हम जो चाहेंगे वही होगा, फिर चाहे विधानसभा-लोकसभा चुनाव एक साथ कराने की बात ही क्यों न हो।
इनके बाद धार विधानसभा विधायक नीना वर्मा ने उन्हीं शब्दों को दोहराते हुए कहा कि दोनों चुनाव एक साथ होने चाहिए। भले ही कोई इससे सहमत हो तो ठीक, न हो तो ठीक, क्योंकि केंद्र में हमारी सरकार है। हालांकि उन्होंने राजनीति में शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक में भाजपा के अलावा कांग्रेस व अन्य राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी नहीं पहुंचे। अन्य जिलों से भी भाजपा जनप्रतिनिधि आए थे, इनमें से केवल छात्र संघ अध्यक्ष को छोड़कर सभी ने दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए अपने तर्क रखे।
इनके तर्क व विचार लिखित रूप में भी समिति ने मांगे हैं। गौरतलब है कि देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहां चुनाव के इस विषय पर विचार की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया है। राजनीतिक दलों और विभिन्न वर्गों के विचार जानने के बाद समिति प्रतिवेदन तैयार करेगी, जिस पक्ष में ज्यादा सुझाव आएंगे उस पर विचार किया जाएगा।
कम होगा खर्च : मंडलेश्वर में कॉलेज की छात्र संघ नेता सलौनी पाटीदार ने चर्चा में सबसे पहले अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बार-बार चुनाव होने से रुपए खर्च होने का आंकड़ा बढ़ जाता है। जितनी बार चुनाव होते हैं उतनी बार आचार संहिता लगानी पड़ती है। प्रत्येक चुनाव के दो महीने पहले से ही आचार संहिता लग जाती है, जिससे लोगों के कई काम प्रभावित होते हैं। बहुत से प्रशासनिक कार्य अटक जाते हैं इसलिए सभी चुनाव एक साथ होना जरूरी है।
मतदाता हो चुका है जागरूक : बैठक में पहुंचे नगर निगम के सभापति अजय सिंह नरुका ने कहा कि मतदाता जागरूक हो चुका है। वह भी चाहता है कि चुनाव एक साथ होना चाहिए। इनके अलावा वकील संतोष देवताड़े, खिरकिया मंडी अध्यक्ष मनोहर पटेल, मंडल अध्यक्ष नारायण पटेल, झाबुआ पेटलावाद से भरत पाटीदार, वकील रोहित मंगल सहित अन्य कई जिलों से लोगों ने हिस्सा लिया।
अन्य पार्टियों से नहीं लिए सुझाव : लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर राय जानने के लिए बैठक में भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक पार्टी से कोई भी मौजूद नहीं रहा। अन्य जिलों से भी आने वाले लोगों में पक्ष पार्टी के ही जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता व अन्य लोग मौजूद थे।
बचता है समय, बढ़ेगा मतदान
विधायक उषा ठाकुर ने अपना सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि चुनाव एक साथ हो, जिससे कि चुनाव बार-बार होने के कारण लोगों को मतदान के लिए जाना पड़ता है। इससे लोगों को परेशानी होती है। इससे मतदान के आंकड़े में भी बढ़ोतरी होगी। इनके पक्ष में विधायक सुदर्शन गुप्ता व सांवेर विधायक राजेश सोनकर सहित अन्य लोगों ने भी चुनाव एक साथ होने की बात कही।
मुद्दे अलग-अलग
यूटीडी छात्र संघ अध्यक्ष दक्षिता गडवाल ने कहा कि विधानसभा व लोकसभा निर्वाचन एक साथ करना गलत है। सभी चुनावों में मुद्दे अलग होते हैं, लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को लिया जाता है। विधानसभा में लोकल व नगर निकाय व ग्राम पंचायत चुनाव में स्थानीय स्तर के विकास कार्यों पर चुनाव होता है। एक साथ चुनाव से मुद्दे भ्रमित होंगे।
इनके बाद धार विधानसभा विधायक नीना वर्मा ने उन्हीं शब्दों को दोहराते हुए कहा कि दोनों चुनाव एक साथ होने चाहिए। भले ही कोई इससे सहमत हो तो ठीक, न हो तो ठीक, क्योंकि केंद्र में हमारी सरकार है। हालांकि उन्होंने राजनीति में शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक में भाजपा के अलावा कांग्रेस व अन्य राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी नहीं पहुंचे। अन्य जिलों से भी भाजपा जनप्रतिनिधि आए थे, इनमें से केवल छात्र संघ अध्यक्ष को छोड़कर सभी ने दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए अपने तर्क रखे।
इनके तर्क व विचार लिखित रूप में भी समिति ने मांगे हैं। गौरतलब है कि देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहां चुनाव के इस विषय पर विचार की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया है। राजनीतिक दलों और विभिन्न वर्गों के विचार जानने के बाद समिति प्रतिवेदन तैयार करेगी, जिस पक्ष में ज्यादा सुझाव आएंगे उस पर विचार किया जाएगा।
कम होगा खर्च : मंडलेश्वर में कॉलेज की छात्र संघ नेता सलौनी पाटीदार ने चर्चा में सबसे पहले अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बार-बार चुनाव होने से रुपए खर्च होने का आंकड़ा बढ़ जाता है। जितनी बार चुनाव होते हैं उतनी बार आचार संहिता लगानी पड़ती है। प्रत्येक चुनाव के दो महीने पहले से ही आचार संहिता लग जाती है, जिससे लोगों के कई काम प्रभावित होते हैं। बहुत से प्रशासनिक कार्य अटक जाते हैं इसलिए सभी चुनाव एक साथ होना जरूरी है।
मतदाता हो चुका है जागरूक : बैठक में पहुंचे नगर निगम के सभापति अजय सिंह नरुका ने कहा कि मतदाता जागरूक हो चुका है। वह भी चाहता है कि चुनाव एक साथ होना चाहिए। इनके अलावा वकील संतोष देवताड़े, खिरकिया मंडी अध्यक्ष मनोहर पटेल, मंडल अध्यक्ष नारायण पटेल, झाबुआ पेटलावाद से भरत पाटीदार, वकील रोहित मंगल सहित अन्य कई जिलों से लोगों ने हिस्सा लिया।
अन्य पार्टियों से नहीं लिए सुझाव : लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर राय जानने के लिए बैठक में भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक पार्टी से कोई भी मौजूद नहीं रहा। अन्य जिलों से भी आने वाले लोगों में पक्ष पार्टी के ही जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता व अन्य लोग मौजूद थे।
बचता है समय, बढ़ेगा मतदान
विधायक उषा ठाकुर ने अपना सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि चुनाव एक साथ हो, जिससे कि चुनाव बार-बार होने के कारण लोगों को मतदान के लिए जाना पड़ता है। इससे लोगों को परेशानी होती है। इससे मतदान के आंकड़े में भी बढ़ोतरी होगी। इनके पक्ष में विधायक सुदर्शन गुप्ता व सांवेर विधायक राजेश सोनकर सहित अन्य लोगों ने भी चुनाव एक साथ होने की बात कही।
मुद्दे अलग-अलग
यूटीडी छात्र संघ अध्यक्ष दक्षिता गडवाल ने कहा कि विधानसभा व लोकसभा निर्वाचन एक साथ करना गलत है। सभी चुनावों में मुद्दे अलग होते हैं, लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को लिया जाता है। विधानसभा में लोकल व नगर निकाय व ग्राम पंचायत चुनाव में स्थानीय स्तर के विकास कार्यों पर चुनाव होता है। एक साथ चुनाव से मुद्दे भ्रमित होंगे।
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