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मोदी सरकार को भी जेल में होना चाहिए: वंजारा

 नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में जेल में कैद निलंबित डीआईजी डी जी वंजारा ने मंगलवार को ये सनसनीखेज आरोप लगाकर सबको चौंका दिया कि उन्होंने सिर्फ सरकारी नीतियों का पालन किया, वो नीतियां जो खुद सरकार के शीर्ष में बैठे लोगों ने तय की थीं। और अगर उन्हें आज जेल की कैद भुगतनी पड़ रही है तो खुद मोदी सरकार को भी आज उसी गुनाह में जेल में कैद होना चाहिए।
वंजारा ने कहा कि वो मोदी को भगवान मानते थे, लेकिन इस भगवान ने भी अमित शाह के शैतानी असर के चलते उनका साथ नहीं दिया। वंजारा ने 10 पन्नों के बेहद विस्फोटक इस्तीफे में लिखा है कि उन्होंने और उनके साथ गिरफ्तार 32 दूसरे पुलिस वालों ने सिर्फ और सिर्फ राज्य सरकार के सर्वोच्च नेतृत्व की नीतियों को लागू किया, उनका पालन किया, अगर आज वो जेल में हैं तो फिर मोदी सरकार को भी जेल में ही होना चाहिए।
वंजारा के मुताबिक गुजरात सीआईडी और सीबीआई ने मुझे और मेरे अफसरों को कई एनकाउंटर केस में गिरफ्तार किया है, आरोप हैं कि हमने ये एनकाउंटर फर्जी किए, अगर ये सच है तो सोहराबुद्दीन, प्रजापति, सादिक जमाल और इशरत जहां मुठभेड़ की जांच कर रहे सीबीआई अफसरों को सरकारी नीतियां बनाने वालों को भी गिरफ्तार करना चाहिए। हमने सिर्फ पुलिस अफसर के तौर पर सरकारी नीतियों का पालन किया। वो नीतियां जो दरअसल हमारे हर कदम को निर्देशित कर रही थीं और बहुत करीब से हमारी निगरानी कर रही थीं। लिहाजा मैं स्पष्ट मानता हूं कि इस सरकार की जगह गांधीनगर नहीं होनी चाहिए बल्कि इस सरकार को या तो नवी मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल में या फिर अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में होनी चाहिए।
वंजारा लिखते हैं कि मेरी नैतिक जिम्मेदारी है कि मैं एनकाउंटर केस के जिम्मेदार लोगों को बेनकाब करूं। इसीलिए मैं दोटूक कहूंगा कि क्राइम ब्रांच वालों, एटीएस और बॉर्डर रेंज वालों ने 2002 से 2007 के बीच सिर्फ सुविचारित सरकारी नीतियों का पालन करते हुए अपने कर्तव्य का वहन किया।
वंजारा एक पुलिस अफसर हैं लेकिन सियासत को बखूबी समझते हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे के चिट्ठे में एनकाउंटर को लेकर ध्रुवीकरण का भी जिक्र किया, एनकाउंटर के बहाने सियासी नफा नुकसान को भी नापा। और तो और मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक हसरत पर भी कटाक्ष किया।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने भारत मां का कर्ज अदा करने का बयान बड़ा मौजूं दिया है। निश्चित तौर पर ये हर भारतीय का पावन कर्तव्य है। लेकिन हम उन्हें याद दिलाना चाहेंगे कि वो दिल्ली की अपनी दौड़ में हमें न भूल जाएं, उन्हें जेल में कैद तमाम अफसरों के कर्ज भी अदा करने हैं। गुजरते वक्त के साथ मुझे ये अहसास हो गया है कि इस सरकार को हमें बचाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बल्कि ये सीबीआई से खुद की खाल बचाने के लिए मुझे और मेरे कई पुलिस अफसरों को जेल में कैद रखने की कोशिश कर रही है। इसके जरिए सरकार खुद को तो बचाना चाहती है, साथ ही राजनीतिक फायदे उठाने की कोशिश में भी है।
वंजारा के शब्द ऐसे जैसे मोदी और गुजरात सरकार ने उन्हें धोखा दिया हो। और इस धोखे से वो बुरी तरह आहत हों। वंजारा ने साफ लिखा है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी उनके लिए भगवान थे, वो भगवान जिसने उनका साथ नहीं दिया।
मैं बेहद संयमित अंदाज में एक लंबे वक्त तक चुप रहा क्योंकि मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्रभाई मोदी पर अगाध विश्वास था। मैं उन्हें ईश्वर मानता था लेकिन मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि मेरा ईश्वर अमित भाई शाह के शैतानी प्रभाव के चलते हमें बचा नहीं पाया।
अमित शाह ही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के वक्त गुजरात के गृह राज्य मंत्री थे। लेकिन उस दौर में खुद गृह मंत्रालय का काम सीधे मुख्यमंत्री मोटा भाई यानि नरेंद्र मोदी ही देख रहे थे। सो जाहिर है जो कुछ अमित शाह को पता था, वो मोदी को न मालूम हो इसकी गुंजाइश कम ही है। वंजारा की इस चिट्ठी से साफ हो गया है कि उनके दिल में और भी कई गहरे राज कुलबुला रहे हैं, एक झलक उन्होंने ये कहकर दिखा दी है कि मोदी सरकार को जेल में होना चाहिए, सबसे बड़ी बात यही है, अगर फर्जी एनकाउंटर केस में जेल में कैद एक निलंबित डीआईजी ये बोले तो यकीनन दाल में कुछ काला है।

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