दिल्ली पहुंचे भागवत ने संभाली 'मिशन मोदी' की कमान
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को प्यारे हैं। और अब बीजेपी में मोदी की जंग खुद संघ ने संभाल ली है। खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है और वो उन लोगों से मिल रहे हैं उन्होंने खुद आडवाणी, सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि कोशिश शांतिपूर्ण तरीके से मोदी विरोधियों को समझाने की है, अगर मान गए तो ठीक अगर नहीं माने तो उन नेताओं का विरोध दरकिनार कर दिया जाएगा।
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का मोदी को लेकर विवादित बयान। बंजारा की गुजरात सरकार को कठघरे में खड़ा करती चिठ्ठी, और बीजेपी के साथ संघ परिवार की बैठकें, ये सब एक ही समय में हो रहा है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भ्रम खत्म करने बीड़ा खुद ही उठा लिया है। वे दिल्ली में हैं और आडवाणी और सुषमा स्वराज जैसे मोदी विरोधी बीजेपी नेताओं को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। ये बात और है कि बीजेपी नेता इसके बारे में खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
दरअसल संघ परिवार और बीजेपी का एक बड़ा धड़ा चाहता है कि नरेंद्र मोदी को अब प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में देर नहीं करनी चाहिये। कोशिश इस बात की है कि मोदी के नाम का प्रस्ताव खुद आडवाणी करें। आरएसएस को लगता है कि बीजेपी की पहली प्राथमिकता यूपीए सरकार को हटाने की होनी चाहिये और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ऐसा किया जा सकता है। एक राय ये भी है कि अगर आडवाणी और सुषमा जैसे नेता तैयार न हों तो संसदीय बोर्ड में बहुमत से ये फैसला कर लिया जाये।
मोदी समर्थक इस तर्क से सहमत नहीं हैं कि फिलहाल इस फैसले को टालना पार्टी हित में है। वो शिवराज सिंह चौहान की भी इस राय से सहमत नहीं हैं कि मोदी के नाम के ऐलान से मध्य प्रदेश में पार्टी का नुकसान हो जाएगा।
सूत्रों की मानें तो मोदी खुद चाहते हैं कि उनके नाम के ऐलान में अब ज्यादा देर न हो। मोदी समर्थकों का तर्क है कि कांग्रेस के इशारे में मोदी पर हमलों का सिलसिला तेज होगा। ऐसे में राजनीतिक तौर पर उसका मुकाबला करने के लिए मोदी के पास पीएम की उम्मीदवारी की ढाल होनी चाहिए।
बीजेपी नेता सीपी ठाकुर का कहना है कि उससे चुनाव पर कोई फरक नहीं पड़ेगा। मोदी का नाम घोषित हो जाए तो अच्छा ही है। जनता चाहती है।
इस महीने की 8 और 9 तारीख को संघ परिवार और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की भी बैठक होनी है। बैठक में इस बात पर गहन चर्चा होगी कि आखिर बीजेपी किन मुद्दों को आगे रखकर चुनाव लड़े और उसकी सांगठनिक क्षमता कैसे बढ़ाई जाए। इस बैठक के से पहले मोहन भागवत का बीजेपी के बड़े नेताओं को ये संदेश देना अहम है कि मोदी के नाम पर विवाद खत्म किया जाए। राजनाथ सिंह ने मोदी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष भी कुछ ऐसी ही परिस्थितियों में बनाया था।

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