सुष्मिता का शव कोलकाता लाने की मांग
कोलकाता। अफगानिस्तान में मारी गईं लेखिका सुष्मिता बनर्जी के
परिजन चाहते हैं उनकी पार्थिव देह कोलकाता लाई जाए। इसे लेकर वह विदेश
मंत्रालय से अनुरोध करेंगे। यह बात शुक्रवार को लेखिका के छोटे भाई गोपाल
बनर्जी ने कही।परिजनों का कहना है कि मना करने के बावजूद वह अफगानिस्तान लौटने के लिए
बेताब थीं। वह भारत में नहीं रहना चाहती थीं। वह अफगान महिलाओं के जीवन पर
एक और किताब लिखना चाहती थीं। वह शुरू से ही जिद्दी प्रवृति की थीं और वह
नहीं मानीं। हम लोगों ने यहां तक कहा था कि जिस तरह से तालिबान के बारे में
इतना लिख चुकी हो, वे वहां शांति से नहीं जीने देंगे।
सुष्मिता बनर्जी की अमानवीय तरीके से हत्या की गई उससे बंगाल का लेखक
समुदाय हैरान और स्तब्ध है। बनर्जी ने परिवार से बगावत कर अफगानी व्यवसायी
जांबाज खान से शादी की थी। शादी के बाद वह अपने पति के साथ कई साल
अफगानिस्तान में रही थीं।उनकी हत्या से दुखी मैगसेसे अवार्ड सम्मानित लेखिका महाश्वेता देवी ने
कहा कि यह दुखद है और मैं हैरान हूं। प्रसिद्ध लेखक शीर्शेदु मुखर्जी ने
हैरानी जताते हुए कहा कि मैंने उनकी किताब पढ़ी है, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत
रूप से नहीं जानता हूं। वह एक साहसी महिला थीं और उन्होंने काफी कठिनाई
झेली थी। साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता शंख घोष ने कहा कि यह हैरानी भरा
है। अगर तालिबान यह कर रहा है, तो वह सभ्यता के खिलाफ है।

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