गुरु-शिष्य परंपरा का आधार है ‘शिक्षक दिवस’
गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वर:
गुरुर्साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवैनम:
गुरु अंधकार में पड़े शिष्य को अपने प्रकाश रूपी ज्ञान से सिंचता है और उसका पथ प्रदर्शक बनता है. कहा भी गया है- ‘गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिले न मोक्ष, गुरु बिन मिटे न दोष. समाज में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
‘शिक्षक दिवस’ समाज में शिक्षक समुदाय की इसी भूमिका और मान-सम्मान को बढ़ाता है. भारत के द्वितीय राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद, दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस मनाया जाता है.
भारतीय संस्कृति में गुरु का ओहदा भगवान से भी ऊंचा माना गया है. कहा भी गया है- गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपनो जो गोविंद दियो मिलाय.
‘डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन’ का जन्म चेन्नई के पास तिरूतनी नाम के एक गांव में 1888 में हुआ था. वो बचपन से ही मेधावी थे. उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. की उपाधि ली और सन 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हो गए. इसके बाद वो प्राध्यापक भी रहे.
डॉ. राधाकृष्णन ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र से परिचित कराया. सारे विश्व में उनके लेखों की प्रशंसा की गई. शिकागो विश्वविद्यालय ने डॉ. राधाकृष्णन को तुलनात्मक धर्मशास्त्र पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया.
वो भारतीय दर्शन शास्त्र परिषद् के अध्यक्ष भी रहे. डॉ. राधाकृष्णन को अंग्रेजी सरकार ने सर की उपाधि से सम्मानित किया था. भारत की स्वतंत्रता के बाद भी डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया वो पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमिति के अध्यक्ष भी बनाए गए.
सन 1949 से सन 1952 तक डॉ. राधाकृष्णन रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे. भारत- रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा. सन 1952 में वो भारत के उपराष्ट्रपति बनाए गए.
इस महान दार्शनिक शिक्षाविद और लेखक को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने देश का सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न प्रदान किया. 13 मई, 1962 को डॉ. राधाकृष्णन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बने.
सन 1967 तक राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने देश की अमूल्य सेवा की. डॉ. राधाकृष्णन जीवनभर अपने आप को शिक्षक मानते रहे. उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों के लिए समर्पित किया. इसलिए 5 सितंबर सारे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने लगभग 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया. शिक्षक दिवस के पावन मौके पर इस महान शिक्षाविद को श्रीन्यूज का नमन.
गुरुर्साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवैनम:
गुरु अंधकार में पड़े शिष्य को अपने प्रकाश रूपी ज्ञान से सिंचता है और उसका पथ प्रदर्शक बनता है. कहा भी गया है- ‘गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिले न मोक्ष, गुरु बिन मिटे न दोष. समाज में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
‘शिक्षक दिवस’ समाज में शिक्षक समुदाय की इसी भूमिका और मान-सम्मान को बढ़ाता है. भारत के द्वितीय राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद, दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस मनाया जाता है.
भारतीय संस्कृति में गुरु का ओहदा भगवान से भी ऊंचा माना गया है. कहा भी गया है- गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपनो जो गोविंद दियो मिलाय.
‘डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन’ का जन्म चेन्नई के पास तिरूतनी नाम के एक गांव में 1888 में हुआ था. वो बचपन से ही मेधावी थे. उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. की उपाधि ली और सन 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हो गए. इसके बाद वो प्राध्यापक भी रहे.
डॉ. राधाकृष्णन ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र से परिचित कराया. सारे विश्व में उनके लेखों की प्रशंसा की गई. शिकागो विश्वविद्यालय ने डॉ. राधाकृष्णन को तुलनात्मक धर्मशास्त्र पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया.
वो भारतीय दर्शन शास्त्र परिषद् के अध्यक्ष भी रहे. डॉ. राधाकृष्णन को अंग्रेजी सरकार ने सर की उपाधि से सम्मानित किया था. भारत की स्वतंत्रता के बाद भी डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया वो पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमिति के अध्यक्ष भी बनाए गए.
सन 1949 से सन 1952 तक डॉ. राधाकृष्णन रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे. भारत- रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा. सन 1952 में वो भारत के उपराष्ट्रपति बनाए गए.
इस महान दार्शनिक शिक्षाविद और लेखक को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने देश का सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न प्रदान किया. 13 मई, 1962 को डॉ. राधाकृष्णन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बने.
सन 1967 तक राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने देश की अमूल्य सेवा की. डॉ. राधाकृष्णन जीवनभर अपने आप को शिक्षक मानते रहे. उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों के लिए समर्पित किया. इसलिए 5 सितंबर सारे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने लगभग 40 सालों तक शिक्षण कार्य किया. शिक्षक दिवस के पावन मौके पर इस महान शिक्षाविद को श्रीन्यूज का नमन.

No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com