शिक्षक दिवस के पहले शिक्षकों को मिलीं लाठियां
लखनऊ | पांच सितम्बर को
शिक्षक दिवस मनाया जाता है। पूरा देश शिक्षकों को इस दिन सम्मान और
पुरस्कार देता है। वहीं राजधानी लखनऊ में उसके एक दिन पहले पुलिस ने
लाठियों से उनका 'सम्मान' किया। यह शिक्षक मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे
थे। पुलिस के इस लाठीजार्ज से दर्जनभर से ज्यादा शिक्षक घायल हुए। इनमें कई
महिला शिक्षक भी शामिल हैं।
बुधवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के शिक्षकों ने अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया। इससे रोड पर जाम लग गया। पुलिस ने इस जाम को हटाने के लिए शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया। महिला पुलिस की संख्या कम होने से शिक्षिकाएं कई बार उनपर भारी पड़ती नजर आईं। शिक्षिकाओं ने झड़प के दौरान बैरीकैटिग गिरा दी और सड़क पर ही बैठ गईं। ये लोग मांग कर रहे थे कि छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के आधार पर उनके मानदेय में वृद्धि की जाए। नवीनीकरण प्रक्रिया को समाप्त किया जाए। 24 घंटे की जगह आठ घंटे सेवा ली जाए। विद्यालय में पुरुषों की भर्ती लगी रोक हटाई जाए।
तीन घंटे लगाया जाम जनता रही बेहाल
शिक्षकों के प्रदर्शन से विधानसभा से चारों ओर की सड़क लगभग तीन घंटे तक जाम रही। जाम से यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसी की ट्रेन छूटी तो कोई जल्दी-जल्दी में आटो से उतर कर पैदल ही चल पड़ा। कई बसें और ऑटो सवारियों को वहीं उतारकर वापस हो गए। बूढ़े, बच्चे और महिलाएं सब कड़ी धूप में पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जाते दिखाई दिए। अपने परिवार के सदस्य की मौत होने पर सीतापुर से कानपुर जा रहे रमेश कुमार घंटों में जाम में फंसे रहे। काफी मान मनौवल के बाद प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी को जाने के लिए रास्ता दिया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान पुलिस व सेना की लाल बत्ती लगी गाड़ियों को भी रास्ता नहीं दिया। जाम में फंसे लोगों की भी प्रदर्शनकारियों के साथ कई बार बहस हुई।
बुधवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के शिक्षकों ने अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया। इससे रोड पर जाम लग गया। पुलिस ने इस जाम को हटाने के लिए शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया। महिला पुलिस की संख्या कम होने से शिक्षिकाएं कई बार उनपर भारी पड़ती नजर आईं। शिक्षिकाओं ने झड़प के दौरान बैरीकैटिग गिरा दी और सड़क पर ही बैठ गईं। ये लोग मांग कर रहे थे कि छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के आधार पर उनके मानदेय में वृद्धि की जाए। नवीनीकरण प्रक्रिया को समाप्त किया जाए। 24 घंटे की जगह आठ घंटे सेवा ली जाए। विद्यालय में पुरुषों की भर्ती लगी रोक हटाई जाए।
तीन घंटे लगाया जाम जनता रही बेहाल
शिक्षकों के प्रदर्शन से विधानसभा से चारों ओर की सड़क लगभग तीन घंटे तक जाम रही। जाम से यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसी की ट्रेन छूटी तो कोई जल्दी-जल्दी में आटो से उतर कर पैदल ही चल पड़ा। कई बसें और ऑटो सवारियों को वहीं उतारकर वापस हो गए। बूढ़े, बच्चे और महिलाएं सब कड़ी धूप में पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जाते दिखाई दिए। अपने परिवार के सदस्य की मौत होने पर सीतापुर से कानपुर जा रहे रमेश कुमार घंटों में जाम में फंसे रहे। काफी मान मनौवल के बाद प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी को जाने के लिए रास्ता दिया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान पुलिस व सेना की लाल बत्ती लगी गाड़ियों को भी रास्ता नहीं दिया। जाम में फंसे लोगों की भी प्रदर्शनकारियों के साथ कई बार बहस हुई।

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