विघ्नहर्ता भगवान गणेश मूर्तियों पर महंगाई का असर
भोपाल | भक्तों को विघ्नों से मुक्ति दिलाने वाले विघ्नहर्ता भगवान गणेश
मूर्तियों की बढ़ती लागत को देखकर खुद परेशान है। भक्तों की समस्या का निदान
करने वाला भगवान स्वयं इस समस्या का निदान नहीं कर पा रहा है। बदलते समय
के साथ उत्सव का स्वरूप बदला। गली- गली में आयोजन होने लगे। उत्सव के साथ
प्रतिमाओं का आकार बढ़ा। बाजारवाद ने भी इसमें घुसपैठ कर ली। अब स्थिति यह
है कि बढ़ती महंगाई से आयोजन पर इसका असर पड़ रहा है।और आशंका जताई जा रही है
कि उत्सव की रंगीनियत इस बार वह नहीं रहेगी,जो अब तक देखने में आई है।
इसके आसार भी नजर आ रहे हंै। उत्सव इस बार नो सितंबर से शुरू हो रहा है।
खर्च भी बढ़ा
एक उत्सव केआयोजन में कम से कम दस हजार के आसपास राशि खर्च हो जाती है। बड़ेआयोजनों पर लागत काआंकडा एक से पांच लाख तक पार कर जाता है। जिसको बर्दाश्त कर पाना सहज नहीं है।
एक उत्सव केआयोजन में कम से कम दस हजार के आसपास राशि खर्च हो जाती है। बड़ेआयोजनों पर लागत काआंकडा एक से पांच लाख तक पार कर जाता है। जिसको बर्दाश्त कर पाना सहज नहीं है।
कार्यक्रम व सजावट पर पड़ेगा असर
महंगाई का असर निश्चित रूप से आयोजन और विद्युत सजावट पर पड़ेगा। उधर आर्थिक मंदी भी इस बार उत्सव पर तरस नहीं खाएगी अर्थात दोनों तरफ से मार। इसके चलते आयोजक इस बार आयोजन का प्लान बदलने की तैयारी कर रहे है। सांस्कृतिक और विद्युत सजावट पर व्यय कम करके इसे आकार देने का प्रयास किया जा रहा है।
महंगाई का असर निश्चित रूप से आयोजन और विद्युत सजावट पर पड़ेगा। उधर आर्थिक मंदी भी इस बार उत्सव पर तरस नहीं खाएगी अर्थात दोनों तरफ से मार। इसके चलते आयोजक इस बार आयोजन का प्लान बदलने की तैयारी कर रहे है। सांस्कृतिक और विद्युत सजावट पर व्यय कम करके इसे आकार देने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रतिमाओं का आकार हुआ छोटा
मूर्तिकार नरेंद्र और दिनेश प्रजापति स्वीकारते है कि बढ़ती लागत और महंगाई से प्रतिमाओं के कद पर इसका असर पड़ा है। कभी बड़ी मूर्तियों की मांग करने वाले बडेÞ आयोजक भी इस बार मध्यम श्रेणी के आकार की मूर्तियों की मांग पर जोर दे रहे हैं। मूर्तिकार भी इस बात को ध्यान में रखकर प्रतिमाओं को बनाने में अपनी नई कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं,पर उनका कद सीमित ही रखा है।
मूर्तिकार नरेंद्र और दिनेश प्रजापति स्वीकारते है कि बढ़ती लागत और महंगाई से प्रतिमाओं के कद पर इसका असर पड़ा है। कभी बड़ी मूर्तियों की मांग करने वाले बडेÞ आयोजक भी इस बार मध्यम श्रेणी के आकार की मूर्तियों की मांग पर जोर दे रहे हैं। मूर्तिकार भी इस बात को ध्यान में रखकर प्रतिमाओं को बनाने में अपनी नई कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं,पर उनका कद सीमित ही रखा है।
भाव पर एक नजर
आकार गत वर्ष इस वर्ष
1 फुट 200 से 250 300 से 350
3 फुट 2500 3000
5 फुट 6000 7500
आकार गत वर्ष इस वर्ष
1 फुट 200 से 250 300 से 350
3 फुट 2500 3000
5 फुट 6000 7500

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