आसाराम को नहीं मिली बेल, अभी जारी रहेगी जेल
जोधपुर।
नाबालिग से यौन शोषण के आरोप से घिरे आसाराम की जमानत अर्जी जोधपुर कोर्ट
ने खारिज कर दी है। आसाराम को अब 15 सितंबर तक जेल में ही रहना होगा।
आसाराम के वकील ने उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत न होने का तर्क दिया था तो
सरकारी वकील ने जमानत मिलने पर आसाराम द्वारा गवाहों को धमकाने और केस को
प्रभावित करने का अंदेशा जताया था। कोर्ट ने सरकारी वकील की दलीलों को
मजबूत मानते हुए आसाराम को जमानत देने से इनकार कर दिया।
इससे
पहले आज करीब डेढ़ घंटे की बहस के दौरान जोधपुर पुलिस ने आसाराम पर कई
संगीन आरोप लगाए। पुलिस ने कोर्ट में दलील दी है कि धारा 164 में बयान दर्ज
हुए लेकिन आसाराम ने सहयोग नहीं किया। आसाराम ने स्वीकार किया था कि
पीड़िता के आरोपों के वक्त वो आश्रम में उसके साथ थे। लड़की नाबालिग है इसका
प्रूफ भी सरकारी पक्ष ने पेश कर दिया है और उसे छूना तक गैर-जमानती अपराध
है। पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। केस की जांच कर
रहे अफसरों को भी धमकी मिल रही हैं।
सरकारी
वकील के मुताबिक नई धाराओं में यदि कोई व्यक्ति महिला के निजी अंग गलत
मंशा से छूता है तो वो भी रेप में आता है। लड़की की मेडिकल रिपोर्ट आरोपी
पक्ष ने निकाल ली जो कि केवल पुलिस के पास रहती है। साफ है कि ये लोग
प्रभावशाली हैं और अगर बाहर निकल आए तो केस की जांच पर असर पड़ेगा। इस केस
में शिल्पी समेत कई मुजरिम फरार हैं जबकि आसाराम बीमार कहीं से नहीं हैं
इसीलिए उन्हें जमानत न दी जाए।
वहीं
आसाराम के वकील ने कहा कि आसाराम के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। उनका
केवल मीडिया ट्रायल चल रहा है। वकील ने ये भी कहा कि आसाराम को एक मानसिक
बीमारी है जिसका लंबे समय से इलाज चल रहा है लेकिन सरकारी वकील की तरफ से
तर्क था कि आसाराम के टेस्ट हो चुके हैं और उन्हें कोई बीमारी नहीं पाई गई।
आसाराम के वकील भी उनकी बीमारी से संबंधित कोई दस्तावेज कोर्ट में पेश
नहीं कर पाए। वकील ने जोधपुर की घटना की एफआईआर दिल्ली में दर्ज कराने पर
भी सवाल उठाए। यही नहीं लड़की के बालिग होने का भी तर्क दिया गया। लेकिन
उनका कोई तर्क काम नहीं आया।

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