जीवाजी विश्वविद्यालय में तबादलों पर नेतागिरी से बवाल
ग्वालियर | जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्षों बाद एक साथ 65 कर्मचारियों का एक
से दूसरे विभाग में तबादला कर मुसीबत मोल ले ली है। हालांकि उच्च शिक्षा
विभाग के आदेशानुसार लंबे समय से एक ही सीट पर जमे कर्मचारियों के विभाग
बदले गए हैं,मगर इसमें भी भेदभाव को लेकर विरोध की ज्वाला भड़कने लगी है।
तबादला सूची में किसी विशेष खेमे के कर्मचारियों के चुन-चुन नाम दर्ज करते
हुए जिस तरह पहली खेप में चहेतों को छोड़ा गया है,उससे विवि में अब नेतागिरी
शुरू हो गई है।
इसके चलते कुलसचिव समेत उन अधिकारियों को चौतरफा घेराबंदी की तैयारी की जा
रही है,जिन्होंने सलाह-मशविरा कर तबादला सूची को फायनल किया। कर्मचारी
नेताओं का कहना है कि विवि में कोई भी अधिकारी दूध का धुला नहीं है ।
चहेतों पर कृपा और बाकियों को सजा देने की अफसरों की कार्यशैली से खफा
कर्मचारी अब लामबंद हो गए हैं। ये कर्मचारी नेता संबंधित अफसरों की पोलों
का पुलिंदा तैयार करने में लग गए हैं। सबसे ज्यादा नाराज कर्मचारी कुलसचिव
से हैं। अधिकारियों को घेरने का कर्मचारियों के पास दुसरा मुद्दा उन लैब
टैक्नीशियनों का है,जिनसे बाबू का काम कराया जा रहा है। अध्ययनशालाओं में
पदस्थ जिन लैब टैक्नीशियन कुछ घंटे के लिए विवि में काम करने बुलाए जा रहे
हैं,इस मुद्दे को भी उठाया जाएगा।
नाराज एआर छुट्टी पर
कर्मचारियों के तबादलों को लेकर जेयू के अधिकारियों में भी अनबनी हो गई है। प्रशासन विभाग के सहायक कुलसचिव डॉ.रविशंकर सोनवाल ने जो तबादला सूची तैयार की थी,उस पर बरिष्ठ अधिकारियों ने कैंची चला दी। जिसका उन्होंने विरोध किया फिर भी तमाम नाम हटा दिए गए। इससे नाराज होकर डॉ.सोनवाल तबादला आदेश जारी होने से पहले ही छुट्टी पर चले गए।
कर्मचारियों के तबादलों को लेकर जेयू के अधिकारियों में भी अनबनी हो गई है। प्रशासन विभाग के सहायक कुलसचिव डॉ.रविशंकर सोनवाल ने जो तबादला सूची तैयार की थी,उस पर बरिष्ठ अधिकारियों ने कैंची चला दी। जिसका उन्होंने विरोध किया फिर भी तमाम नाम हटा दिए गए। इससे नाराज होकर डॉ.सोनवाल तबादला आदेश जारी होने से पहले ही छुट्टी पर चले गए।

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