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मुख्यमंत्री ने किया ‘सामाजिक नवाचार और नागर समाज-एक संवाद’ कार्यशाला का शुभारंभ

रायपुर | मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी द्वारा ‘सामाजिक नवाचार और नागर समाज-एक संवाद’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने शुभारंभ सत्र में कहा कि जनता की भलाई के लिए शासन और प्रशासन द्वारा जनता को विश्वास में लेकर अच्छे इरादे से अगर नये प्रयोग किए जाएं, तो उनके अच्छे और सकारात्मक नतीजे मिलते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं इसका अच्छा उदाहरण है। कार्यशाला का आयोजन प्रदेश में नव पदस्थ भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए किया गया। शुभारंभ सत्र में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री शिवराज सिंह, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री सुनिल कुमार और अपर मुख्य सचिव तथा प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री डी.एस.मिश्रा रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर के स्वामी व्याप्तानंद, बिलासपुर के गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केन्द्र के डॉ. योगेश जैन और मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह फेडरेशन जिला राजनांदगांव की पदमश्री सम्मान प्राप्त श्रीमती फूलवासन यादव राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए सहित विभिन्न संस्थाओं प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि की आसंदी से शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन में नवाचार अथवा नये प्रयोग तभी सफल होते हैं, जब उन्हें जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को समझकर पूरी पारदर्शिता के साथ अपनाया जाए। जनता के नजदीक जाकर ही लोगों की समस्याओं का पता चलता है और उन समस्याओं के निराकरण के लिए नयी योजनाएं शुरू की जा सकती हैं। उन्होनंे कहा कि राज्य में अनेक नई योजनाओं का जन्म ग्राम सुराज अभियान के जरिए हुआ है। इस अभियान के तहत मैं स्वयं मुख्य सचिव को साथ लेकर हेलीकॉप्टर से गर्मियों की दोपहरी में किसी भी गांव में अचानक पहुंचता हूं। ग्रामीणों के साथ कहीं पेड़ की छांव में, तो कहीं चौपालों में बैठकर उनकी स्थानीय जरूरतों के बारे में चर्चा करता हूं। ग्राम सुराज अभियान में राज्य सरकार के राजधानी से लेकर पंचायत स्तर के अधिकारी-कर्मचारी भी स्थानीय पंच-सरपंचों के साथ प्रदेश के हजारों गांवों का दौरा करते हैं। ग्रामीणें से मिलते हैं। लोगों की समस्याओं के बारे में चर्चा होती है और उन्हें संकलित कर उनके समयबद्ध निराकरण के लिए कार्ययोजना बनाकर काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाते मुझे जनता की बेहतरी के लिए काम करने में आज थोड़ी बहुत जो भी सफलता मिली है, वह केवल मंत्रालय के कमरे में बैठकर काम करने से नहीं, बल्कि ग्राम सुराज जैसे अभियानों में जनता के बीच जाने और उनकी बातों को सुनकर उनके लिए काम करने पर मिली है|

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ग्राम सुराज अभियान में ग्रामीणों की जरूरतों को समझ कर छत्तीसगढ़ सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गरीबों के लिए एक रूपए और दो रूपए अनाज तथा निःशुल्क नमक वितरण की योजना शुरू की और आगे चलकर देश का पहला खाद्य़ सुरक्षा एवं पोषण सुरक्षा कानून बनाया। अब छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को देश की एक आदर्श वितरण प्रणाली के रूप में देखा जा रहा है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए निःशुल्क चरण पादुका वितरण की योजना बनाने और उसे संचालित का विचार भी ग्राम सुराज अभियान में उनके बीच जाने पर आया। छत्तीसगढ़ के लिए शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण एक बड़ी चुनौती है। खाद्य सुरक्षा कानून के जरिए हम गरीब परिवारों के लिए सस्ता अनाज, निःशुल्क आयोडिन नमक, पांच रूपए किलो में दो किलो चना और दस रूपए किलो में दो किलो दाल की व्यवस्था करके, स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत बनाकर इस चुनौती का बखूबी मुकाबला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जन कल्याण के लिए बनी सभी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन हो यह देखना प्रशासनिक अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समस्याओं के लक्षण को समझकर ही उनके निराकरण के लिए योजनाएं बन सकती हैं। सीखने की प्रक्रिया आजीवन चलती रहती है। हमें दूसरों के अच्छे प्रयोगों को समझकर उनसे काफी कुछ सीखने की जरूरत है। व्यक्ति को हर दिन कुछ न कुछ नया देखने और समझने को मिलता है, जिनसे वह बहुत कुछ सीख सकता है। सार्वजनिक जीवन में लगभग तीन दशकों से हूं, लेकिन जब गांवों में जाता हूं, ग्रामीणों से सीधे मिलता हूं, तो उनसे कई नये विचार, नये सुझाव, मिलते हैं। नये प्रयोगों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने डॉ.रमन सिंह ने राज्य के बस्तर राजस्व संभाग में सर्वाधिक नक्सल पीड़ित नारायणपुर जिले में समाज सेवी संस्था रामकृष्ण मिशन आश्रम द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अबूझमाड़िया समुदाय और अन्य ग्रामीणों की भलाई के लिए संचालित नये प्रकल्पों का भी उल्लेख किया। डॉ. रमन सिंह ने बिलासपुर जिले के गनियारी में डॉक्टरों की समाज सेवी संस्था ‘जन स्वास्थ्य केन्द्र’ द्वारा चलायी जा रही सार्वजनिक स्वास्थ्य परियोजनाओं का और राजनांदगांव जिले में महिला सशक्तिकरण के लिए पदमश्री सम्मान प्राप्त श्रीमती फूलवासन यादव के नेतृत्व में लगभग बारह हजार महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित गतिविधियों की भी प्रशंसा की। 

डॉ. सिंह ने कहा कि इन संस्थाओं द्वारा जनता की बेहतरी के लिए जो नये प्रयोग शुरू किए गए हैं, वे आगे चलकर देश के लिए मॉडल बन सकते हैं। शुभारंभ सत्र में राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री शिवराज सिंह ने कहा कि कोई भी योजना तभी सफल होती है, जब सरकार, प्रशासन और नागरिक समाज तीनों परस्पर सहयोग और सामंजस्य से काम करें और अपने-अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्त्तव्यों का भी ध्यान रखें। श्री शिवराज सिंह ने देश और समाज में हाल के वर्षों में प्रचलित शब्द ‘सिविल सोसायटी’ का भी उल्लेख किया और कहा कि चाहे सिविल सोसायटी हो, या सरकार, दोनों के उददेश्य जनकल्याण के लिए होते हैं। इसलिए उनके बीच तालमेल आवश्यक है। मुख्य सचिव श्री सुनिल कुमार ने सिविल सोसायटी के संदर्भ में कहा कि कुछ दशक पहले तक यह शब्द केवल यूरोपीय विचारकों की पुस्तकों में सीमित रहता था। बाद में यह 1980 के दशक से सामाज में भी प्रचलित हुआ। श्री सुनिल कुमार ने कहा कि नये प्रशासकों को सिविल सोसायटी को समझना चाहिए। मीडिया की भूमिका भी एक तटस्थ पर्यवेक्षक की तरह महत्वपूर्ण है। मुख्य सचिव ने नये प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि उन्हें समाज से लगातार सीखना चाहिए। हमें केवल एक परीक्षा उत्तीर्ण करके स्वयं को सर्वज्ञानी नहीं समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि 73 वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायती राज की निर्वाचित संस्थाओं को और 74 वें संशोधन के जरिए नगरीय निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों को जनता की सुविधा के लिए  कई अधिकार दिए गए हैं। उनके साथ भी सिविल सोसायटी का सामंजस्य होना चाहिए। 

अपर मुख्य सचिव और प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री डी.एस.मिश्रा ने स्वागत भाषण में कहा कि आज ही के दिन यानी 11 सितम्बर को वर्ष 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्म संसद में अपना विश्व प्रसिद्ध व्याख्यान दिया था। समाज, शासन और प्रशासन तीनों के लिए उनका यह व्याख्यान आज भी प्रेरणादायक है। श्री मिश्रा ने कार्यशाला के उददेश्यों पर प्रकाश डाला। नारायणपुर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के स्वामी व्याप्तानंद, ने बताया कि उनकी संस्था नारायणपुर में अबूझमाड़ क्षेत्र में विगत 28 वर्षों से कार्यरत है। संस्था द्वारा वहां के बच्चों के लिए पहली से बारहवीं तक आवासीय स्कूल संचालित करते हुए अब आई.टी.आई. का भी संचालन किया जा रहा है। कम्प्यूटर का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बिलासपुर के गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केन्द्र के डॉ. योगेश जैन ने बताया कि लगभग ढाई हजार गांवों के लोग उनकी संस्था की स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। राजनांदगांव की श्रीमती फूलवासन यादव ने बताया कि उनकी संस्था मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह फेडरेशन में लगभग बारह हजार महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी है, जिनमें लगभग दो लाख महिलाएं सदस्य हैं। संस्था की जमा पूंजी लगभग 25 करोड़ रूपए तक पहुंच गयी है। श्रीमती फूलवासन यादव ने अपने जीवन संघर्ष का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। कार्यशाला में राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों- बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा समुदायों के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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