...तो 100 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिकेगी प्याज!
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दिल्ली।। राजधानी में प्याज की मार अभी और रुलाएगी। रीटेल बाजार में दो बार
सेंचुरी लगाने के बाद प्याज अब थोक में शतकीय पारी खेलने की तैयारी में
है। थोक बाजार में प्याज की कीमतें 60 रुपए किलो तक पंहुच गई हैं तो
राजधानी के कुछ इलाकों में इसका रीटेल प्राइस 70 से 90 रुपए तक पहुंच गया
है। कारोबारियों की मानें तो प्याज के दाम अभी और चढ़ेंगे। कांग्रेस सरकार
के लिए परेशानी यह है कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह सस्ते में प्याज
नहीं बेच सकती, जिस कारण उसकी परेशानी बढ़ सकती है।
राजधानी को प्याज सप्लाई करने वाले राज्य आजकल बाढ़ में डूब उतरा रहे हैं। इसलिए, दिल्ली में उसकी जबरदस्त किल्लत हो गई है। थोक कारोबारियों ने आशंका जताई है कि यही हाल रहा तो प्याज के थोक दाम 90 रुपए के आसपास पहुंच सकते है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसका रीटेल दाम कहां तक जाएंगे।प्याज के रास्ते सत्ता पाने का सपना देख रही राजनीतिक पार्टियां भी अपने मतदाताओं की मदद नहीं कर पाएंगी। नेता भी लोगों को रिझाने के लिए सस्ती प्याज के स्टॉक नहीं लगा पाएंगे। आजादपुर मंडी के चेयरमैन राजेंद्र शर्मा के अनुसार, दिल्ली ही नहीं देशभर में पिछले करीब 3 महीनों से प्याज की कीमतें जी का जंजाल बनी हुई हैं। इस साल प्याज की कीमतें थोक बाजार में 65 रुपए किलो तक का आंकड़ा छू चुकी हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल थोक बाजार में प्याज की कीमतें 60 रुपए किलो तक है जिसके रीटेल में करीब 80 से 90 रुपए किलो तक मिलने की संभावना है।
अमीर की हो गई प्याज
प्याज गरीब की थाली से बिल्कुल ही नदारद हो गई है। दिल्ली के पांडव नगर में रहने वाली हाउस वाइफ सुनीता शर्मा का कहना है कि पिछले कई महीनों से जब से प्याज महंगा हुआ था तब से कम कम इस्तेमाल करके काम चला रहे थे लेकिन प्याज की कीमतें हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ऐसे में अब प्याज लाना ही छोड़ दिया है।
राजनीति पर असर डालती प्याज
प्याज के बढ़ते दाम दिल्ली की राजनीति को हमेशा प्रभावित करते रहे हैं। वर्ष 1998 में प्याज के बढ़ते दामों ने दिल्ली की बीजेपी सरकार को धूल चटा दी थी। उसके बाद से बीजेपी आज तक दिल्ली की सत्ता पाने के लिए तरस रही है। संभावना जताई जा रही है कि प्याज के दामों का यही हाल रहा तो इस बार दिल्ली की कांग्रेस सरकार को चुनाव के दौरान खासी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
राजधानी को प्याज सप्लाई करने वाले राज्य आजकल बाढ़ में डूब उतरा रहे हैं। इसलिए, दिल्ली में उसकी जबरदस्त किल्लत हो गई है। थोक कारोबारियों ने आशंका जताई है कि यही हाल रहा तो प्याज के थोक दाम 90 रुपए के आसपास पहुंच सकते है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसका रीटेल दाम कहां तक जाएंगे।प्याज के रास्ते सत्ता पाने का सपना देख रही राजनीतिक पार्टियां भी अपने मतदाताओं की मदद नहीं कर पाएंगी। नेता भी लोगों को रिझाने के लिए सस्ती प्याज के स्टॉक नहीं लगा पाएंगे। आजादपुर मंडी के चेयरमैन राजेंद्र शर्मा के अनुसार, दिल्ली ही नहीं देशभर में पिछले करीब 3 महीनों से प्याज की कीमतें जी का जंजाल बनी हुई हैं। इस साल प्याज की कीमतें थोक बाजार में 65 रुपए किलो तक का आंकड़ा छू चुकी हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल थोक बाजार में प्याज की कीमतें 60 रुपए किलो तक है जिसके रीटेल में करीब 80 से 90 रुपए किलो तक मिलने की संभावना है।
अमीर की हो गई प्याज
प्याज गरीब की थाली से बिल्कुल ही नदारद हो गई है। दिल्ली के पांडव नगर में रहने वाली हाउस वाइफ सुनीता शर्मा का कहना है कि पिछले कई महीनों से जब से प्याज महंगा हुआ था तब से कम कम इस्तेमाल करके काम चला रहे थे लेकिन प्याज की कीमतें हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ऐसे में अब प्याज लाना ही छोड़ दिया है।
राजनीति पर असर डालती प्याज
प्याज के बढ़ते दाम दिल्ली की राजनीति को हमेशा प्रभावित करते रहे हैं। वर्ष 1998 में प्याज के बढ़ते दामों ने दिल्ली की बीजेपी सरकार को धूल चटा दी थी। उसके बाद से बीजेपी आज तक दिल्ली की सत्ता पाने के लिए तरस रही है। संभावना जताई जा रही है कि प्याज के दामों का यही हाल रहा तो इस बार दिल्ली की कांग्रेस सरकार को चुनाव के दौरान खासी परेशानी उठानी पड़ सकती है।

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