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मुकदमे वापस लेने की UP सरकार की मुहिम को झटका

नई दिल्ली। बम विस्फोट के आरोपियों के मुकदमे वापस लेने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा झटका लगा है। अदालत ने राज्य सरकार को ऐसे मुकदमों का ब्योरा हाई कोर्ट में पेश करने से छूट मांगने वाली याचिका खारिज कर दी है। अलबत्ता ये रिकार्ड पेश करने के लिए राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय अवश्य मिल गया है।
याचिका खारिज होने के बाद प्रदेश सरकार को मुकदमे वापस लेने के कानूनी मुद्दे पर विचार कर रही हाई कोर्ट की बड़ी पीठ के गत 7 अक्टूबर के आदेश का पालन करना होगा। हाई कोर्ट ने वापस लिए जा रहे मुकदमों का जिलेवार मूल रिकार्ड पेश करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट ने रिकार्ड में ओरिजनल ऑफीशियल नोटिंग पेश करने को भी कहा है, ताकि पता चले कि मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया कहां से शुरू हुई थी। प्रदेश सरकार ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
शुक्रवार को प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता यूयू ललित व रविप्रकाश मेहरोत्रा ने कहा कि मुकदमों का ब्योरा पेश करने का बड़ी पीठ का आदेश क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण है। तय व्यवस्था में बड़ी पीठ सिर्फ उन्हीं कानूनी मुद्दों पर विचार कर सकती है, जो उसे भेजे गए हैं। वह मामले की मेरिट पर विचार नहीं कर सकती। उसे कानूनी मुद्दा तय करके मामला वापस खंडपीठ को मेरिट पर विचार के लिए भेजना चाहिए।
न्यायमूर्ति एचएल दत्तू व न्यायमूर्ति पीसी घोष की पीठ ने वकीलों की इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट रिकार्ड मांग रहा है तो दिखाना चाहिए।राज्य सरकार ने बम विस्फोट और आतंकी गतिविधियों में आरोपियों के खिलाफ लंबित मुकदमे वापस लेने का आदेश दिया था। प्रदेश के सात जिलों में ऐसे 14 मुकदमे वापस लेने के लिए अदालतों में अर्जी दी गई हैं। सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में मुसलमानों को खुश करने से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके खिलाफ रंजना अग्निहोत्री ने हाईकोर्ट में याचिका डाली। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए इस मुद्दे को विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया था।
कहां से वापस हो रहे कितने मुकदमे
वाराणसी - 1
गोरखपुर - 1
बिजनौर - 1
लखनऊ - 6
कानपुर - 3
रामपुर - 1
बाराबंकी - 1

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