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राज्पाल रामनरेश यादव ने शिवराज के 23 मंत्रीयों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई

भोपाल(21DEC)। मप्र में तीसरी बार सरकार बनाने जा रहे शिवराज सिंह ने अपने कैबिनेट में 23 मंत्रियों का जगह दी है। इसमें पिछली सरकार में मंत्री रहे अनुभवी चेहरों को जगह देने के साथ-साथ जाति व क्षेत्रीय संतुलन को भी साधने की कोशिश की गई है। नए मंत्रिमंडल में लोकसभा चुनाव की तैयारी की भी झलक दिखाई दे सकती है। फ्री-हैंड मिलने के बाद मुख्यमंत्री इस बार मंत्रिपरिषद के गठन को लेकर ज्यादा गंभीर दिखे। संगठन भी चाहता है कि स्वच्छ और परफार्मेंस देने वाले चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल हों। इसलिए पहले चरण में मंत्रिमंडल का आकार छोटा रखा जा रहा है। माना जा रहा है कि विस्तार लोकसभा चुनाव के बाद होगा।

भोपाल संभाग 5 मंत्री

भोपाल संभाग से जहां दसवीं बार चुनाव जीतकर रिकार्ड बनाने वाले वरिष्ठ विधायक बाबूलाल गौर नहीं माने और फिर से उन्हें मंत्री बनाना पड़ा है। वहीं उमाशंकर गुप्ता को दुबारा मौका मिल गया। हालांकि विश्वास सारंग का नाम भी लगभग तय माना जा रहा था। उनके लिए उनके पिता कैलाश सारंग लॉबिंग कर रहे थे, लेकिन दाल नहीं गली। विदिशा जिले से कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के अलावा सीहोर जिले की इछावर सीट से पराजित होने वाले पूर्व मंत्री करण सिंह वर्मा की वजह से पूर्व मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार को मौका मिल गया है। वे लंबे समय से उपेक्षित चल रहे थे। उन्हें पूर्व वित्त मंत्री राघवजी के पार्टी से बाहर होने का फायदा भी मिला है। इधर, पूर्व मंत्री रामपाल के चुनाव जीत जाने से कुछ दिग्गजों के समीकरण गड़बड़ा गया। शिवराज सिंह ने उन्हें भी मंत्री बनाया है। रामपाल मुख्यमंत्री के काफी करीबी माने जाते हैं। वहीं भोजपुर से कांग्रेस के दिग्गज नेता सुरेश पचौरी को हराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के पुत्र सुरेंद्र पटवा को भी पहली बार मंत्री बनाया है।

मालवांचल 3 मंत्री
मालवा क्षेत्र से उद्योग मंत्री रहे कैलाश विजयवर्गीय को फिर से मंत्री बनाया गया है। उनके प्रबल समर्थक रमेश मेंदोला इस बार रिकार्ड वोटों से जीते हैं, इसलिए मंत्री पद को लेकर मेंदोला और पूर्व राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया के बीच कड़ा मुकाबला रहा, लेकिन शिवराज सिंह ने इन दोनों को फिलहाल कोई जगह नहीं दी। जगदीश देवड़ा, कैलाश चावला को भी मौका नहीं मिला। इंदौर संभाग से पर्यटन मंत्री रहे तुकोजीराव पवार भी मंत्री नहीं बनाए गए। उज्जैन संभाग से खाद्य राज्यमंत्री रहे पारस जैन भी दुबारा मंत्री बनने में सफल रहे।  हाट पिपलिया से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी पहली बार मंत्री बनाए गए हैं। वहीं आगर से विधायक बने मनोहर ऊंटवाल फिर से मंत्री नहीं बन पाए हैं।

बुंदेलखंड 4 मंत्री
इस क्षेत्र से शिवराज कैबिनेट के कद्दावर मंत्रियों में शामिल रहे गोपाल भार्गव और जयंत मलैया दुबारा मंत्री बनाए गए हैं। पूर्व राज्यमंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के चुनाव हार जाने के बाद अब पूर्व मंत्री कुसुम सिंह मेहदेले को भी मौका मिल गया। इस क्षेत्र से कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय और फिर भाजपा विधायक के तौर पर चुनाव जीतने वाले मानवेंद्र सिंह की इच्छा पूरी नहीं हो पाई। यही स्थिति ललिता यादव की भी रही। यह ऐसा क्षेत्र हैं, जहां से चार मंत्रियों को पराजय का सामना करना पड़ा है। इनमें बृजेंद्र प्रताप के अलावा डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया, हरिशंकर खटीक और दशरथ सिंह लोधी शामिल हैं। वहीं खुरई से विधायक बने भूपेंद्र सिंह को भी मंत्री बनने का मौका मिला है।

निमाड़ 2 मंत्री

निमाड़ क्षेत्र से पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस को व्यापमं घोटाले के आरोपों के चलते अलग रखा गया है। हालाँकि आदिम जाति कल्याण मंत्री रहे विजय शाह की ताजपोशी हुई है। झाबुआ और अलीराजपुर जिले से आदिवासी वर्ग की ओर से नागर सिंह चौहान प्रबल दावेदार थे, तो वरिष्ठ नेता दिलीप सिंह भूरिया की बेटी निर्मला भूरिया को आदिवासी और महिला होने के नाते मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन दोनों को निराशा हाथ लगी। हालांकि माना जा रहा था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के गढ़ में निर्मला को मंत्री बनाने से पार्टी और मजबूत हो सकती थी। पिछली कैबिनेट में मंत्री रहीं रंजना बघेल भी अपनी छवि के चलते मंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गईं। पश्चिम निमाड़ से पिछली बार मंत्रिमंडल में शामिल किए गए पूर्व मंत्री अंतर सिंह आर्य  को अवश्य जगह मिली है।

ग्वालियर चंबल संभाग 4 मंत्री
यहां से नरोत्तम मिश्रा के अलावा यशोधरा राजे सिंधिया, माया सिंह को मंत्री बनाया गया है। हालांकि जयभान सिंह पवैया प्रमुख दावेदार थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। पवैया को सियासी तौर पर महल विरोधी माना जाता है। सांसद यशोधरा पूर्व में भी मंत्री रह चुकी हैं। यशोधरा और माया सिंह राजघराने से जुड़ी हैं। यशोधरा को मंत्री बनाने से उनके भतीजे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में पार्टी को मजबूती मिलेगी। पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह भी दावा कर रहे थे, लेकिन विफल रहे।  वहीं परिवहन राज्यमंत्री रह चुके नारायण सिंह कुशवाह भी दुबारा मंत्री बनने से वंचित रह गए। लालसिंह आर्य जरूर मंत्री बनने में सफल रहे।

महाकौशल क्षेत्र 2 मंत्री
यहां से सांसद भूपेंद्र सिंह व केडी देशमुख प्रबल दावेदारों के तौर पर देखे जा रहे थे, लेकिन जगह नहीं हासिल कर पाए। सहकारिता मंत्री रहे गौरीशंकर बिसेन को दोबारा मौका मिला है। स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री रहे नानाभाऊ माहोड़, अंचल सोनकर और ओम प्रकाश धुर्वे, पूर्व मंत्री चौधरी चंद्रभान सिंह और मोती कश्यप दौड़ में हार गए। शरद जैन मंत्री बनाये गए हैं। पूर्व मंत्री अजय विश्नोई को हार का मुंह देखना पड़ा है, वहीं पूर्व राज्यमंत्री देवीसिंह सैयाम को टिकट ही नहीं दिया गया था।


नर्मदांचल 1 मंत्री
पूर्व मंत्री सरताज सिंह तमाम विरोधों के बावजूद फिर से मंत्री बनने में सफल रहे। सीताशरण शर्मा भी प्रमुख दावेदारों में शामिल रहे। इसी तरह पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल का नाम भी इन दावेदारों में शुमार रहा, लेकिन दोनों नाकामयाब रहे। वरिष्ठ नेता प्रहलाद पटेल के अनुज जालम सिंह पटेल की इच्छा भी अधूरी रह गई।


विंध्य क्षेत्र 2 मंत्री
पूर्व ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ला फिर से मंत्री बनाए गए हैं। केदारनाथ शुक्ला और पूर्व मंत्री रमाकांत तिवारी दौड़ में हार गए। जबकि वरिष्ठ विधायक ज्ञान सिंह मंत्री बन गए। इसके अलावा रामलाल रौतेल, कुंवर सिंह टेकाम भी मंत्री नहीं बन पाए। पूर्व मंत्री मीना सिंह और  हर्ष सिंह भी असफल रहे।

































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