बीटी फसलों को प्रोत्साहन भारतीय कृषि की बर्बादी का कारण बनेगा
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री बंशीलाल
गुर्जर ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के बीटी फसलों को देश में लोकप्रिय
बनाने के आव्हान को भारतीय कृषि पंरपरा के हितों के विपरीत बताते हुए इसे
देश के लिए आत्मघाती बताया है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि की आजादी के
बाद सकल घरेलु उत्पाद में 50 प्रतिशत भागीदारी थी जो घटकर 15 प्रतिशत रह
गयी है। समृद्ध सशक्त भारतीय किसान अन्नदाता और राजकोष के लिए दाता होता था
उसे गृहिता बना दिया गया है। इसका कारण भारतीय कृषि परंपरा की
आत्मनिर्भरता दूसरों पर आश्रित कर दिया जाता है। बीटी फसलों पर
मल्टीनेशनल्स कंपनियों का एकाधिकार है। बीटी फसलों की अनुशंसा देश के
किसानों के विरूद्ध षडयंत्र है। इससे भारतीय कृषि की सुरक्षा समाप्त हो
जायेगी।
श्री बंशीलाल गुर्जर ने कहा कि यूपीए सरकार ने खेती की बेहतरी के नाम पर किसानों को औद्योगिक क्षेत्र के रहमों करम पर छोड दिया है। किसानों को बीज उर्वरक कीटनाशक इनपुट मंहगे करके निचोड लिया है। किसान का सारा इनपुट औद्योगिक क्षेत्र से प्रदाय किया जाए। केन्द्र सरकार के इस अर्थशास्त्र ने देश के किसानों को बर्बाद कर दिया है। उर्वरक के मामले में प्रधानमंत्री मूल्यवृद्धि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढती महंगाई का तर्क देते है, लेकिन बढती कृषि लागत के अनुरूप समर्थन मूल्य बढाने पर रोक लगाकर यूपीए सरकार दोहरे मापदण्ड अपना रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद स्वीकार करते है कि बीटी फसलों के नकारात्मक पहलू भी है। उनकी सुरक्षा का काम किसानों पर नहीं छोडा जा सकता है, इसलिए पहले केन्द्र सरकार बीटी फसलों के घातक पक्षों के बारे में खातरी करें और किसानों को सुरक्षा कवच सुनिश्चित करें, लेकिन जिस तरह अंधानुकरण करने का आग्रह किया जा रहा है। वह जानबूझकर जहर खाने का आत्मघाती प्रयास है।
श्री बंशीलाल गुर्जर ने कहा कि यूपीए सरकार ने खेती की बेहतरी के नाम पर किसानों को औद्योगिक क्षेत्र के रहमों करम पर छोड दिया है। किसानों को बीज उर्वरक कीटनाशक इनपुट मंहगे करके निचोड लिया है। किसान का सारा इनपुट औद्योगिक क्षेत्र से प्रदाय किया जाए। केन्द्र सरकार के इस अर्थशास्त्र ने देश के किसानों को बर्बाद कर दिया है। उर्वरक के मामले में प्रधानमंत्री मूल्यवृद्धि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढती महंगाई का तर्क देते है, लेकिन बढती कृषि लागत के अनुरूप समर्थन मूल्य बढाने पर रोक लगाकर यूपीए सरकार दोहरे मापदण्ड अपना रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद स्वीकार करते है कि बीटी फसलों के नकारात्मक पहलू भी है। उनकी सुरक्षा का काम किसानों पर नहीं छोडा जा सकता है, इसलिए पहले केन्द्र सरकार बीटी फसलों के घातक पक्षों के बारे में खातरी करें और किसानों को सुरक्षा कवच सुनिश्चित करें, लेकिन जिस तरह अंधानुकरण करने का आग्रह किया जा रहा है। वह जानबूझकर जहर खाने का आत्मघाती प्रयास है।

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