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आईसीसी बोर्ड में बदलाव मंजूर, श्रीनिवासन होंगे अध्यक्ष

सिंगापुर । आईसीसी ने बेहतर प्रशासन के लिये अपने ढांचे में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के राजस्व और अधिकारों के नियंत्रण में भारत की भूमिका अहम हो जायेगी। पाकिस्तान, श्रीलंका और साउथ अफ्रीका के कड़े विरोध के बावजूद आईसीसी के ढांचे में बदलाव के विवादित प्रस्ताव को कार्यकारी बोर्ड की बैठक में मंजूरी दी गई।

बदलाव के विवादित प्रस्ताव को आईसीसी के दस पूर्णकालिक सदस्यों में से आठ का समर्थन मिला, जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका ने बैठक में भाग नहीं लिया। इस प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं में कार्यकारी समिति और वित्त तथा वाणिज्यिक मामलों की समिति का गठन शामिल है, जिसमें बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड तथा वेल्स क्रिकेट बोर्ड समेत पांच सदस्य होंगे।

बैठक में पारित प्रस्ताव के मुताबिक बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन 2014 के मध्य (जुलाई) से आईसीसी बोर्ड के अध्यक्ष होंगे, जो निर्णय लेने वाली शीर्ष ईकाई होगी। आईसीसी ने एक बयान में कहा कि एक नई कार्यकारी समिति का गठन किया जायेगा, जो बोर्ड को रिपोर्ट करेगी। कार्यकारी समिति के पहले अध्यक्ष क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के वेली एडवर्ड्स होंगे, जबकि वित्त और वाणिज्यिक मामलों की समिति के अध्यक्ष पद पर ईसीबी के जाइल्स क्लार्क ही बने रहेंगे। ये दोनों पहले दो साल तक अध्यक्ष रहेंगे। बदलाव का यह दौर पूरा होने के बाद आईसीसी बोर्ड के अध्यक्ष का चयन आईसीसी बोर्ड में से होगा और सभी पूर्णकालिक सदस्य निदेशकों को चुनाव में खड़े होने का अधिकार होगा।

आईसीसी के बयान में कहा गया है कि बीसीसीआई, सीए और ईसीबी दोनों उप समितियों में रहेंगे जबकि दो अन्य प्रतिनिधि पूर्णकालिक सदस्यों में से होंगे, जिन्हें बोर्ड चुनेगा। अब संबंधित प्रस्तावों को उनसे जुडी समितियों और बोर्ड के पास भेजा जायेगा और फिर मंजूरी के लिये परिषद के सामने रखा जायेगा। प्रस्ताव के अन्य अहम बिंदुओं में खेल के पारंपरिक प्रारूप को बचाने के लिये टेस्ट क्रिकेट कोष का गठन शामिल है, जिसमें असोसिएट सदस्यों को टेस्ट खेलने का मौका मिलेगा, पूर्णकालिक सदस्यों के लिये नया वित्तीय मॉडल बनाया जायेगा और असोसिएट सदस्यों को सहयोग बढ़ाया जायेगा।

आईसीसी ने यह भी कहा कि सभी पूर्णकालिक सदस्यों ने इसकी पुष्टि की है कि वे जल्दी ही द्विपक्षीय सीरीज के लिये करार करेंगे ताकि भविष्य में होने वाले दौरों के कार्यक्रम का व्यापक शेड्यूल बनाया जा सके। आईसीसी ने वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की जगह 2017 और 2021 में चैम्पियंस ट्रोफी के आयोजन का भी फैसला किया है। बयान में कहा गया, 'टेस्ट क्रिकेट में चार टीमों के फाइनल्स वाला प्रारूप तैयार कर पाना संभव नहीं था, जो टेस्ट क्रिकेट की आत्मा को बरकरार रख सके।' इसमें कहा गया, 'आईसीसी चैम्पियंस ट्रोफी, आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप और आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप के वेन्यू तय हो चुके हैं, लिहाजा 2015 से 2023 तक आईसीसी के पास लुभावना पैकेज है।'

आईसीसी का दावा है कि असोसिएट और अफिलिएट देशों को सीधे मिलने वाले कोष में इजाफा किया जायेगा। उनके लिये टूर्नमेंट्स के आयोजनों के अलावा कई सुविधायें भी मुहैया कराई जायेंगी। इसके तहत अब असोसिएट सदस्य टेस्ट क्रिकेट खेल सकेंगे। अगले आईसीसी इंटर कॉन्टिनेंटल कप के विजेता को पूर्ण सदस्यों में सबसे निचली रैंकिंग वाली टीम के साथ प्लेऑफ खेलने का मौका मिलेगा और सफल रहने पर टेस्ट दर्जा भी मिल सकता है।

आईसीसी अध्यक्ष एलेन इसाक ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'बोर्ड ने आज (शनिवार) कुछ अहम फैसले लिये, जिससे भविष्य में प्रशासन, प्रतिस्पर्धा और आईसीसी के आर्थिक मॉडल को लेकर हमें दीर्घकालिन निश्चितता मिलेगी।' उन्होंने कहा, 'यह फैसला सदस्यों के बीच लंबी बातचीत के बाद लिया गया। आठ पूर्ण सदस्यों ने इस प्रस्ताव को सहमति दी, जबकि बैठक में भाग नहीं लेने वाले दो सदस्यों ने इस पर भविष्य में और बातचीत करने की बात कही है ताकि सर्वसम्मति तक पहुंचा जा सके।'

आईसीसी सीईओ डेविड रिचर्डसन ने कहा, 'हमें अब बोर्ड से स्पष्ट निर्देश मिल गया है और हमारा काम मंजूर प्रस्ताव को लागू करना है।' आईसीसी ने कहा कि प्रस्ताव बीसीसीआई, सीए और ईसीबी के प्रमुख श्रीनिवासन, एडवर्ड्स और क्लार्क ने तैयार किया, जिसे नौ जनवरी को पूर्ण सदस्यों की बैठक में रखा गया था। इसमें कहा गया, 'इन प्रस्तावों पर बात की गई और बाद में आईसीसी बोर्ड की दो बैठकों में इनमें संशोधन किये गए। आज (शनिवार) प्रस्ताव पर वोटिंग हुई और इसे आठ सदस्यों का समर्थन मिल गया। पाकिस्तान और श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने वोटिंग में भाग नहीं लिया, क्योंकि उनका मानना है कि अभी इस पर गौर करने के लिये उन्हें और समय चाहिये।

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