लोक सभा अध्यक्ष ने 16वीं लोक सभा के प्रबोधन कार्यक्रम का शुभारम्भ किया
भोपाल :लोक सभा अध्यक्ष, सुमित्रा महाजन ने आज 16वीं लोक सभा के नव निर्वाचित सदस्यों हेतु दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि संसद की सफलता मुख्यतः संसद सदस्यों के कार्य-निष्पादन, उनकी निष्ठा, प्रतिबद्धता तथा संसदीय संस्थाओं में उनकी आस्था पर निर्भर करती है। निर्वाचित सदस्यों को जन प्रतिनिधि, विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों और एक विधायी निकाय के सदस्यों के रूप में विविध भूमिकाएं निभानी हैं। सांसद के रूप में उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे कितनी खूबी से अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करते हैं और इन्हें पूरा करने के लिए किस कुशलता से योजनाएं बनाते हैं। दूसरा, प्रक्रिया नियमों से भली-भांति अवगत होने पर ही सदस्य सभा की कार्यवाही में प्रभावी और सार्थक ढ़ंग से भाग ले सकेंगे।
श्रीमती महाजन ने यह भी कहा कि सभा का समय बहुत सीमित होता है और यह आवश्यक है कि प्रत्येक सदस्य नियत समय में अपने विचार स्पष्ट और सशक्त रूप से व्यक्त करने की कला में निपुणता हासिल करे। इस सम्बन्ध में उनका यह कहना था कि बहुत दुःख की बात है कि सदस्य पीठासीन अधिकारियों द्वारा बार-बार चेताए जाने के बावजूद निर्धारित समय से अधिक समय तक बोलते रहते हैं। इसका खराब असर पड़ता है, विशेष रूप से इसलिए कि अब सभा की कार्यवाही सीधे प्रसारित की जाती है। इसके अलावा, इससे दूसरे सदस्यों के लिए भी समय कम बच पाता है। उन्होंने यह सुझाव दिया कि सदस्य हमेशा अपने विचार सशक्त रूप से लेकिन निर्धारित समय के भीतर ही व्यक्त करने का प्रयास करें। सभा में नियमित रूप से उपस्थित रहने और समय का पाबंद रहने से सदस्यों को अनेक महत्वपूर्ण बातों को समझने में मदद मिलेगी जिससे वे सभा के कार्य में अधिक कुशलता से भाग ले सकेंगे।
संसदीय समितियों की व्यापक प्रणाली का उल्लेख करते हुए श्रीमती महाजन ने कहा कि चूंकि सभा का समय सीमित होता है अतः समितियां मुद्दों को स्पष्ट रूप से समझने तथा सरकार को उपयुक्त सुझाव देने के लिए सदस्यों को एक अच्छा मंच प्रदान करती हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि संसद की प्रतिष्ठा बहुत हद तक इसके सदस्यों के आचरण पर निर्भर है, श्रीमती महाजन ने कहा कि यह सदस्यों और उनके मतदाताओं के हित में है कि वे सभा में अनुशासन और शालीनता बनाए रखने के दायित्व को समझें। यदि सभा के भीतर व्यवहार शालीन न हो और यदि सदस्य स्वयं ही अपने आचरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करते रहें तो इससे संसदीय संस्थाओं की साख गिर सकती हैं।
इस प्रबोधन कार्यक्रम में सदस्यों को सम्बोधित करने वाले अन्य वक्ताओं में केन्द्रीय विदेश और प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री, श्रीमती सुषमा स्वराजय केन्द्रीय रसायन और उवर्रक मंत्री, श्री अनंत कुमारय पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री अॉस्कर फर्नांडिस, संसद सदस्यय श्री भर्तृहरि महताब, संसद सदस्य और पूर्व केन्द्रीय श्री राम नाईक शामिल थे। इस प्रबोधन कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्यों को विभिन्न प्रक्रियात्मक उपायों और तत्संबंधी विषयों जैसे श्प्रभावी सांसद कैसे बनें, संसद में प्रश्नकाल, सभा में मामले उठाने के लिए प्रक्रियात्मक उपाय और सदस्यों के लिए सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
श्रीमती महाजन ने यह भी कहा कि सभा का समय बहुत सीमित होता है और यह आवश्यक है कि प्रत्येक सदस्य नियत समय में अपने विचार स्पष्ट और सशक्त रूप से व्यक्त करने की कला में निपुणता हासिल करे। इस सम्बन्ध में उनका यह कहना था कि बहुत दुःख की बात है कि सदस्य पीठासीन अधिकारियों द्वारा बार-बार चेताए जाने के बावजूद निर्धारित समय से अधिक समय तक बोलते रहते हैं। इसका खराब असर पड़ता है, विशेष रूप से इसलिए कि अब सभा की कार्यवाही सीधे प्रसारित की जाती है। इसके अलावा, इससे दूसरे सदस्यों के लिए भी समय कम बच पाता है। उन्होंने यह सुझाव दिया कि सदस्य हमेशा अपने विचार सशक्त रूप से लेकिन निर्धारित समय के भीतर ही व्यक्त करने का प्रयास करें। सभा में नियमित रूप से उपस्थित रहने और समय का पाबंद रहने से सदस्यों को अनेक महत्वपूर्ण बातों को समझने में मदद मिलेगी जिससे वे सभा के कार्य में अधिक कुशलता से भाग ले सकेंगे।
संसदीय समितियों की व्यापक प्रणाली का उल्लेख करते हुए श्रीमती महाजन ने कहा कि चूंकि सभा का समय सीमित होता है अतः समितियां मुद्दों को स्पष्ट रूप से समझने तथा सरकार को उपयुक्त सुझाव देने के लिए सदस्यों को एक अच्छा मंच प्रदान करती हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि संसद की प्रतिष्ठा बहुत हद तक इसके सदस्यों के आचरण पर निर्भर है, श्रीमती महाजन ने कहा कि यह सदस्यों और उनके मतदाताओं के हित में है कि वे सभा में अनुशासन और शालीनता बनाए रखने के दायित्व को समझें। यदि सभा के भीतर व्यवहार शालीन न हो और यदि सदस्य स्वयं ही अपने आचरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करते रहें तो इससे संसदीय संस्थाओं की साख गिर सकती हैं।
इस प्रबोधन कार्यक्रम में सदस्यों को सम्बोधित करने वाले अन्य वक्ताओं में केन्द्रीय विदेश और प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री, श्रीमती सुषमा स्वराजय केन्द्रीय रसायन और उवर्रक मंत्री, श्री अनंत कुमारय पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री अॉस्कर फर्नांडिस, संसद सदस्यय श्री भर्तृहरि महताब, संसद सदस्य और पूर्व केन्द्रीय श्री राम नाईक शामिल थे। इस प्रबोधन कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्यों को विभिन्न प्रक्रियात्मक उपायों और तत्संबंधी विषयों जैसे श्प्रभावी सांसद कैसे बनें, संसद में प्रश्नकाल, सभा में मामले उठाने के लिए प्रक्रियात्मक उपाय और सदस्यों के लिए सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
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