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डीयू ने चार साल का डिग्री कोर्स लिया वापस

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपना चार साल का डिग्री कोर्स वापस ले लिया और अब तीन साल के डिग्री कोर्स के आधार पर ही दाखिले होंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह ने शुक्रवार को बयान जारी कर यह घोषणा की।दिल्ली विश्वविद्यालय ने गुरुवार को यूजीसी को जो प्रस्ताव भेजा था, उस पर यूजीसी राजी नहीं हुई थी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने गुरुवार रात 8.29 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय को इसकी सूचना दी थी। इसके बाद शुक्रवार सुबह दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से यूजीसी को पत्र गया कि वह उसके निर्देश के आधार पर निर्णय लेने जा रहा है।

इसके बाद कुलपति डॉ. सिंह ने बयान जारी कर यह घोषणा की कि उन्होंने एफयूआईपी (चार साल का डिग्री कोर्स) वापस लेने का फैसला किया है। यूजीसी के दबाव में इसके बाद कुलपति ने झुकते हुये अपने बयान में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय समय की जरूरत को पहचानते हुये छात्रों के दाखिले की प्रक्रिया शुरू करना सुनिश्चित करता है और इस तरह उनके हितों की रक्षा को महत्व देता है।

यूजीसी के निर्देश पर विश्वविद्यालय ने एफवाईयूपी को वापस लेने का फैसला किया है। नतीजतन दाखिले तीन साल के डिग्री के आधार पर होंगे, जो सभी कॉलेजों में 2012-13 में लागू थे। सिंह ने बयान में यह भी कहा कि आशा की जाती है कि सभी कॉलेजों के प्रिसिंपल दाखिल की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने में सहयोग करेंगे।

इस तरह दिल्ली विश्वविद्यालय और यूजीसी का टकराव शुक्रवार को खत्म हो गया तथा पिछले कुछ दिनों से व्याप्त अनिश्चितता का माहौल अब समाप्त हो गया। गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय ने चार साल के कोर्स में संशोधन करतीन साल का कोर्स बनाने का एक प्रस्ताव यूजीसी को भेजा था।

यूजीसी के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश उस प्रस्ताव को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के पास गए थे और तय हुआ कि शाम पांच बजे यूजीसी की स्थायी समिति की बैठक में इस पर चर्चा होगी पर यह बैठक रद्द हो गयी। उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय को देर रात यूजीसी का पत्र मिला, जिसमें उसके प्रस्ताव को नामंजूर कर चार साल के कोर्स को खत्म करने की बात कही गयी।दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नात्तक कोर्स के लिए कुल 54 हजार सीटें थीं, पर गत वर्ष 60 हजार छात्र चार साल के डिग्री कोर्स में दाखिल किए गए थे। इस बार 2 लाख 78 हजार छात्रों ने दाखिले के लिए आवेदन किए थे।

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